गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को अहमदाबाद की साबरमती सेंट्रल जेल के एक बेहद संवेदनशील हाई-सिक्योरिटी ब्लॉक में शिफ्ट किए जाने की खबर सामने आई है। Times of India की रिपोर्ट के मुताबिक बिश्नोई को जेल के “Do Sau Kholi” यानी Block 200 में स्थानांतरित किया गया है। यह जेल का ऐसा सुरक्षा क्षेत्र बताया जा रहा है, जहां आतंकवाद और अन्य गंभीर आपराधिक मामलों से जुड़े करीब 200 कैदी रखे जाते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, इस ब्लॉक को कैदियों के बीच संपर्क और आवाजाही को बेहद सीमित रखने के लिए चार अलग-अलग सेक्शन में बांटा गया है। प्रत्येक सेक्शन में लगभग 50 कैदी रखे जा सकते हैं। बिश्नोई की सेल का आकार करीब 7.5×11 फीट बताया गया है।
‘Do Sau Kholi’ में क्यों भेजा गया?
बिश्नोई को इससे पहले साबरमती जेल के ‘Dus Kholi’ नामक छोटे हाई-सिक्योरिटी परिसर में रखा गया था, जिसकी क्षमता लगभग 10 कैदियों की बताई गई है। अब उसे इससे बड़े लेकिन अधिक कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल वाले Block 200 में रखा गया है।
हालांकि, जेल प्रशासन की ओर से उसके स्थानांतरण की विशिष्ट वजह को लेकर विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि उसे किसी एक खास घटना के कारण ही स्थानांतरित किया गया। उपलब्ध रिपोर्टें इसे उसकी सुरक्षा श्रेणी और जेल के कड़े सुरक्षा प्रबंधों से जोड़ती हैं।
चार सेक्शन में बंटा है पूरा ब्लॉक
रिपोर्ट के मुताबिक Block 200 को चार अलग हिस्सों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक हिस्से में करीब 50 कैदियों की क्षमता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य कैदियों की एक-दूसरे तक पहुंच और अनधिकृत आवाजाही को रोकना है।
इस हाई-सिक्योरिटी व्यवस्था में कैदियों की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जाती है। ब्लॉक में 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले से जुड़े दोषियों समेत गंभीर मामलों के कैदी भी रखे जाने की बात रिपोर्टों में कही गई है।
7.5×11 फीट की सेल में रहेगा बिश्नोई
ताजा रिपोर्ट में बिश्नोई की सेल का आकार लगभग 7.5 फीट × 11 फीट बताया गया है। यानी करीब 82.5 वर्ग फीट की जगह।
इस तरह की हाई-सिक्योरिटी सेल का उद्देश्य कैदी की आवाजाही और दूसरे कैदियों के साथ अनियंत्रित संपर्क को सीमित रखना होता है। बिश्नोई की जेल व्यवस्था पहले से ही बेहद प्रतिबंधित रही है और उसे जेल से बाहर ले जाने पर केंद्र सरकार के आदेश के तहत प्रतिबंध लागू हैं।
जेल से नेटवर्क चलाने की आशंकाओं पर निगरानी
लॉरेंस बिश्नोई लंबे समय से जांच एजेंसियों के रडार पर रहा है। अलग-अलग जेलों में रहते हुए उसके नाम से धमकी भरे कॉल, संदेश और कथित आपराधिक नेटवर्क से जुड़े मामले सामने आते रहे हैं। इसी वजह से जेल में उसके संचार और बाहरी संपर्कों को लेकर सुरक्षा एजेंसियां बेहद सतर्क रहती हैं।
हालिया रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि पिछले करीब दो वर्षों में बिश्नोई की ओर से कोई सीधा कॉल या संचार रिकॉर्ड नहीं हुआ, हालांकि यह जानकारी जांच एजेंसियों के हवाले से रिपोर्ट की गई है और इसका विस्तृत आधिकारिक विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
Tiger Shroff फायरिंग केस के बीच चर्चा में आया नाम
बिश्नोई का नाम हाल में Tiger Shroff firing case की जांच के संदर्भ में भी सामने आया है। मुंबई पुलिस कथित तौर पर इस बात की जांच कर रही है कि गोलीबारी में बिश्नोई गैंग से जुड़े लोगों की क्या भूमिका थी।
हालांकि, महत्वपूर्ण बात यह है कि टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले में लॉरेंस बिश्नोई की प्रत्यक्ष भूमिका अभी सार्वजनिक रूप से स्थापित नहीं हुई है। जांच एजेंसियां गिरफ्तार आरोपियों और कथित नेटवर्क के आधार पर आगे की कड़ियां तलाश रही हैं।
अगर मुंबई पुलिस को बिश्नोई से पूछताछ करनी होती है, तो उसे सीधे किसी दूसरे राज्य में ले जाना आसान नहीं है। उसके मामले में केंद्र सरकार के आदेश के तहत जेल से बाहर ले जाने पर प्रतिबंध लागू है। ऐसे में आवश्यक अनुमति मिलने पर पूछताछ साबरमती जेल के भीतर किए जाने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
साबरमती जेल में पहले से कड़ी पाबंदियां
बिश्नोई मई 2023 से साबरमती सेंट्रल जेल में बंद है। केंद्र सरकार के प्रतिबंधात्मक आदेश के कारण उसे जेल परिसर से बाहर ले जाने पर विशेष रोक लागू है और अदालत में उसकी पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कराई जा सकती है।
इस व्यवस्था का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि हाई-प्रोफाइल कैदी को जेल से बाहर ले जाने के दौरान सुरक्षा संबंधी जोखिम न पैदा हों और विभिन्न राज्यों की जांच एजेंसियों को भी निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना पड़े।
आगे क्या?
लॉरेंस बिश्नोई को Block 200 में भेजे जाने की खबर ऐसे समय सामने आई है जब उसके कथित नेटवर्क से जुड़े मामलों की जांच कई स्तरों पर चल रही है। हाई-सिक्योरिटी ब्लॉक में शिफ्ट किए जाने के बाद उसकी आवाजाही, अन्य कैदियों से संपर्क और बाहरी संचार पर निगरानी और कड़ी रहने की संभावना है।
हालांकि, स्थानांतरण के पीछे जेल प्रशासन का विस्तृत आधिकारिक कारण अभी सामने नहीं आया है। इसलिए फिलहाल उपलब्ध जानकारी को रिपोर्टों और सूत्रों पर आधारित जानकारी के रूप में ही देखा जाना चाहिए।