उत्तर प्रदेश कांग्रेस के नेतृत्व बदलाव के समारोह में 11 अक्टूबर को मुख्यालय पर गुटबाजी का खुला संघर्ष देखा गया। नई अध्यक्षा आरधना मिश्रा के कार्यभार समारोह में पूर्व अध्यक्ष अजय राय के समर्थकों और कांग्रेस महिला संगठन की नेता ममता चौधरी के बीच भिड़ंत हुई।
घटना तब शुरू हुई जब अजय राय अपने समर्थकों के साथ कार्यालय पहुँचे और लोगों से कहा गया कि रास्ता खाली करो। ममता चौधरी ने सवाल उठाया कि कौन सी अध्यक्ष बात कर रहे हैं। इससे विवाद बढ़ गया और दोनों गुटों के बीच हिंसक झड़प हुई।
महिलाओं के साथ बदसलूकी का आरोप
ममता चौधरी ने कहा कि राय के समर्थकों ने महिला कार्यकर्ताओं पर जूते और चप्पलें फेंकीं तथा हाथ और पैरों से उन्हें मारा। उन्होंने अजय राय को दलित विरोधी बताते हुए कहा कि वह उन्हें गालियाँ देते थे।
वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी और इमरान मसूद ने तुरंत हस्तक्षेप किया और स्थिति को नियंत्रित किया। अजय राय पहली बार कार्यभार समारोह में शामिल न होने का फैसला करने वाले थे लेकिन इमरान मसूद और आरधना मिश्रा के कहने पर वापस लौटे।
राय ने निष्कासन की माँग की
इसके बाद अजय राय ने वरिष्ठ नेताओं से कहा कि इस घटना से कांग्रेस की छवि को नुकसान हुआ है। उन्होंने ममता चौधरी को पार्टी से निष्कासित करने की माँग की।
पार्टी प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि वरिष्ठ नेताओं ने तुरंत हस्तक्षेप किया और यूपीसीसी एक सुसंगत संगठन है। राजनीतिक विश्लेषक लेनिन रघुवंशी के अनुसार जब किसी पार्टी में कुछ गुटों का दबदबा होता है तो नेतृत्व परिवर्तन से पुरानी मदद के नेटवर्क को खतरा हो जाता है और संगठनात्मक बदलाव राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई में बदल जाता है।
आरधना मिश्रा के लिए अब की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह पूर्ववर्ती समर्थकों के बीच असंतोष बढ़ाए बिना अपना अधिकार स्थापित करें।