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यूपी चुनाव: सीटों पर सपा-कांग्रेस आमने-सामने, दिवाली बाद फैसला

कांग्रेस 150 सीटों की मांग पर अड़ी, सपा 350 सीटों पर लड़ने के मूड में

यूपी चुनाव में सीट बंटवारे पर चर्चा करते राजनीतिक नेता
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सीट बंटवारे को लेकर सपा और कांग्रेस के बीच अभी तक सहमति नहीं बनी है। दिवाली के बाद ही सीटों की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।

कांग्रेस चाहती है कि सीटों पर फैसला जल्द हो जाए। वहीं सपा जीत सुनिश्चित करने के लिए मजबूत प्रत्याशी उतारने पर ज़्यादा जोर दे रही है। इस खींचतान के बीच सपा का फोकस फिलहाल राज्यसभा चुनाव पर अधिक है।

दिवाली बाद तय होगा फॉर्मूला

माना जा रहा है कि दिवाली के बाद दोनों दल सीटों की संख्या तय करेंगे। इसके बाद प्रत्याशियों का एलान जातीय समीकरणों और तत्कालीन हालात के हिसाब से होगा। दोनों दलों के शीर्ष नेता इस रणनीति पर सहमत बताए जाते हैं।

चुनाव का एलान होने के बाद सपा-कांग्रेस संयुक्त रैलियां करेंगी और साझा मुद्दे उठाएंगी। सपा जिलेवार घोषणा पत्र तैयार कराएगी, जिसमें कांग्रेस की राय भी ली जाएगी। वोट चोरी के मुद्दे पर इंडिया गठबंधन की रैलियों में सपा भी भागीदारी दिखाएगी।

नए अध्यक्ष से बदल सकता है माहौल

कांग्रेस को नया प्रदेश अध्यक्ष मिल चुका है, जिनके सपा से रिश्ते अच्छे माने जाते हैं। इससे सीटों को लेकर पहले जैसी तीखी बयानबाजी कम होने के आसार हैं। हालांकि कांग्रेस के प्रांतीय नेता अब भी 150 सीटों की मांग कर रहे हैं, जिसे सपा के कई सांसद पहले ही नकार चुके हैं।

कांग्रेस की मंशा हर जिले से कम से कम एक सीट लड़ने की है। सूत्रों के अनुसार सपा 2017 के फॉर्मूले पर सहमत नहीं है। सपा इस बार 2022 में सहयोगियों को दी गई सीटों से कुछ ज्यादा देकर कांग्रेस को राजी करने की कोशिश में है।

2017 में सपा ने कांग्रेस से गठबंधन नहीं किया था। उस समय सपा ने सुभासपा और रालोद जैसे सहयोगियों को 55 सीटें दी थीं और बाकी पर खुद लड़ी थी। कांग्रेस को 105 सीटें देने का एलान हुआ था, लेकिन पार्टी 114 सीटों पर लड़ गई थी, जिससे कुछ सीटों पर दोनों दलों के प्रत्याशी आमने-सामने आ गए थे। अब सपा दस साल बाद 311 की जगह 350 सीटों पर लड़ने के मूड में है।

बसपा के नेताओं की आवाजाही

नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य पहले ही कांग्रेस के साथ आ चुके हैं। बसपा सरकार में मंत्री रहे तीन-चार और नेता भी कांग्रेस के संपर्क में हैं। इन नेताओं की हाल में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात हो चुकी है। कांग्रेस सही मौका देखकर इन्हें पार्टी में शामिल कराएगी और इन्हीं में से मजबूत प्रत्याशी सपा के सामने रखे जाएंगे।

राज्यसभा चुनाव बाद तेज होगा पाला बदल

यूपी में चुनाव की आहट के साथ दल बदलने का सिलसिला भी तेज होगा। पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री फिलहाल कांग्रेस का दामन थाम रहे हैं। अक्तूबर के दूसरे-तीसरे हफ्ते से पार्टी छोड़ने और नए दल में जाने की रफ्तार बढ़ेगी। भाजपा की नजर उन सपा नेताओं पर भी है जो गठबंधन में सीट कांग्रेस को जाने पर भी चुनाव लड़ने को तैयार होंगे।