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UP में 2027 चुनाव से पहले वोटर लिस्ट की बड़ी पड़ताल, SIR के बाद बदली हर एंट्री पर नजर; दलों की सियासी हलचल तेज

Form-6, Form-7 और Form-8 की statewide scrutiny के आदेश; मंडलायुक्तों को रोल ऑब्जर्वर की जिम्मेदारी, डुप्लीकेट एंट्री हटाने और गड़बड़ी पर कार्रवाई के निर्देश

UP में 2027 चुनाव से पहले वोटर लिस्ट की बड़ी पड़ताल, SIR के बाद बदली हर एंट्री पर नजर; दलों की सियासी हलचल तेज
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

2027 के चुनाव से पहले वोटर लिस्ट बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं और इसी के साथ मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां भी बढ़ गई हैं। चुनाव से पहले सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक अब voter data की शुद्धता और उसकी जांच बनता जा रहा है।

ताजा घटनाक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी Navdeep Rinwa ने SIR यानी Special Intensive Revision के बाद मतदाता सूची में किए गए बदलावों की व्यापक जांच के निर्देश दिए हैं। खास तौर पर 10 अप्रैल 2026 को SIR समाप्त होने के बाद कंप्यूटर सहायकों द्वारा दर्ज किए गए Form-6, Form-7 और Form-8 की जांच की जाएगी।

इसका मतलब है कि इस अवधि में नए मतदाता जोड़ने, नाम हटाने और मौजूदा विवरण में बदलाव से जुड़ी entries अब दोबारा scrutiny के दायरे में होंगी।

तीनों Forms क्यों हैं इतने महत्वपूर्ण?

मतदाता सूची में अलग-अलग तरह के बदलाव के लिए अलग Forms इस्तेमाल होते हैं।

Form-6 नए मतदाता के registration से जुड़ा है। वहीं Form-7 किसी नाम को हटाने और Form-8 मतदाता की जानकारी में correction या modification से संबंधित है।

अब इन तीनों तरह की entries को विशेष रूप से जांचने का आदेश दिया गया है। चुनाव आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योग्य मतदाता का नाम गलत तरीके से न हटे, गलत व्यक्ति का नाम न जुड़े और duplicate entries भी बनी न रहें।

मंडलायुक्तों को मिली बड़ी जिम्मेदारी

इस पूरी प्रक्रिया में अब Divisional Commissioners की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी मंडलायुक्तों को Electoral Roll Observers के रूप में जिम्मेदारी दी है।

उन्हें अपने-अपने मंडलों के जिलों में voter-list work की close supervision करनी होगी। वहीं District Election Officers को अपने जिलों में मतदाता सूची तैयार करने वाले अधिकारियों के काम की निगरानी करनी होगी।

आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में कोई अनियमितता सामने आती है तो संबंधित ERO, AERO और computer assistant के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। अधिकारियों को Representation of the People Act, 1950 की Section 32 के तहत official duty में लापरवाही के प्रावधानों की भी याद दिलाई गई है।

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि किसी सूची में गलती मिलते ही हर वरिष्ठ अधिकारी स्वतः दोषी माना जाएगा। कार्रवाई जांच में सामने आने वाली जिम्मेदारी और लापरवाही के आधार पर होगी।

Computer assistants पर भी बदला नियम

वोटर डेटा में digital entry की प्रक्रिया को लेकर भी महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है।

निर्देश के मुताबिक अब computer assistants को physical voter forms की direct entry करने से रोक दिया गया है। मतदाताओं से प्राप्त physical applications को Booth Level Officers यानी BLOs, BLO App के जरिए digitise करेंगे।

साथ ही physical forms को सुरक्षित रखने और pending Form-6, Form-7 और Form-8 को EROs द्वारा हर दिन review करने के निर्देश दिए गए हैं।

इस बदलाव का मकसद voter data entry में अनधिकृत बदलाव और human-error की संभावना को कम करना बताया जा रहा है।

Pilibhit और दूसरे जिलों की शिकायतों के बाद बढ़ी सतर्कता

यह पूरी scrutiny ऐसे समय में हो रही है जब UP की मतदाता सूची को लेकर Pilibhit और कुछ अन्य जिलों में शिकायतें सामने आई हैं।

Pilibhit मामले में चुनाव अधिकारियों की शुरुआती जांच के बाद दो अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और कानूनी कदम उठाने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद चुनाव आयोग ने केवल एक जिले तक मामला सीमित रखने के बजाय राज्यभर की voter-list entries को लेकर ज्यादा सतर्कता दिखाई है।

इसके अलावा Azamgarh समेत अन्य विधानसभा क्षेत्रों से भी voter-list anomalies की शिकायतें सामने आने की बात रिपोर्टों में कही गई है। आयोग ने इसलिए सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में SIR के बाद की entries की scrutiny पर जोर दिया है।

विपक्ष के लिए मुद्दा, BJP के लिए साफ-सुथरी सूची का तर्क

मतदाता सूची की जांच अब राजनीतिक बहस का हिस्सा भी बन चुकी है।

Samajwadi Party और Congress लगातार voter-list में कथित irregularities, duplicate entries और नामों में बदलाव जैसे मुद्दे उठा रहे हैं। विपक्ष का सवाल है कि यदि SIR के बाद भी बड़ी संख्या में शिकायतें सामने आ रही हैं तो entries की verification प्रक्रिया कितनी प्रभावी रही।

दूसरी तरफ BJP और चुनावी प्रशासन का तर्क है कि voter-list revision का उद्देश्य ही duplicate और अपात्र entries हटाकर electoral roll को अधिक सटीक बनाना है। इसलिए scrutiny को चुनावी प्रक्रिया को कमजोर करने के बजाय उसे अधिक विश्वसनीय बनाने की प्रक्रिया के तौर पर देखा जाना चाहिए।

यानी राजनीतिक विवाद का केंद्र सिर्फ यह नहीं है कि कितने नाम जुड़े या हटे, बल्कि यह भी है कि किस प्रक्रिया के तहत बदलाव हुआ और क्या हर बदलाव का पर्याप्त verification हुआ।

SIR के बाद करीब 2 करोड़ मतदाताओं की कमी

UP में SIR का पैमाना भी इस विवाद को बड़ा बनाता है।

रिपोर्टों के मुताबिक 27 अक्टूबर 2025 की मतदाता सूची में करीब 15.44 करोड़ मतदाता थे। SIR के बाद 10 अप्रैल 2026 को जारी final roll में यह संख्या घटकर करीब 13.39 करोड़ रह गई—यानी लगभग 2.04 करोड़ की net कमी।

इतनी बड़ी संख्या में बदलाव के कारण 2027 विधानसभा चुनाव से पहले voter-roll accuracy और भी संवेदनशील मुद्दा बन गई है।

हालांकि केवल कुल संख्या में कमी को अपने आप गलत deletion का प्रमाण नहीं माना जा सकता। SIR में मृत, स्थानांतरित, duplicate या अन्य कारणों से अपात्र entries की पहचान और removal भी प्रक्रिया का हिस्सा है। विवाद का असली सवाल यह है कि प्रत्येक entry में कार्रवाई नियमों और उचित verification के साथ हुई या नहीं।

Duplicate voters पर विशेष फोकस

आयोग ने अब यह भी स्पष्ट किया है कि आगामी Special Summary Revision (SSR) के draft roll में duplicate entries नहीं रहनी चाहिए।

Bulandshahr, Sitapur, Ghaziabad और Aligarh से social media तथा अन्य माध्यमों से सामने आई duplicate-voter complaints पर समय से reports नहीं मिलने पर अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं।

इससे संकेत मिलता है कि चुनाव आयोग अब political parties और नागरिकों से मिलने वाली complaints को केवल स्थानीय शिकायत मानकर छोड़ने के बजाय systematic verification पर जोर दे रहा है।

2027 चुनाव के लिए क्यों अहम है यह पूरा अभियान?

उत्तर प्रदेश में विधानसभा की 403 सीटें हैं और राज्य का चुनाव राष्ट्रीय राजनीति पर भी बड़ा असर डालता है। ऐसे में voter list में छोटा-सा बदलाव भी कई विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी गणित को प्रभावित कर सकता है।

इसी कारण नए voters की registration, पुराने voters की corrections, duplicate entries और deletions सभी राजनीतिक दलों की नजर में हैं।

खास तौर पर युवाओं, पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं, शहरी क्षेत्रों में migration और लगातार बदलते residential addresses के कारण voter data को updated रखना चुनाव आयोग के लिए बड़ी प्रशासनिक चुनौती है।

अगला बड़ा पड़ाव—Special Summary Revision

अब नजर आगामी Special Summary Revision (SSR) पर है। आयोग ने निर्देश दिया है कि draft voter roll जारी होने से पहले duplicate entries और शिकायतों से जुड़ी समस्याओं को दूर किया जाए।

साथ ही Book a Call with BLO सुविधा के तहत आने वाले requests को 48 घंटे से ज्यादा pending नहीं रखने का निर्देश भी दिया गया है। BLOs को किसी voter को “unavailable” mark करने से पहले उससे संपर्क करने को कहा गया है।

इसका सीधा असर आम मतदाता पर भी पड़ेगा। जिन लोगों ने SIR के बाद नाम जोड़ने, हटाने या correction के लिए आवेदन किया है, उनके लिए आने वाले revision चरण में अपनी entry और status को verify करना महत्वपूर्ण होगा।

राजनीतिक दलों की नजर क्यों टिकी है?

2027 विधानसभा चुनाव से पहले voter data अब सिर्फ प्रशासनिक रिकॉर्ड नहीं रह गया है। यह चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

राजनीतिक दल अपने-अपने स्तर पर voter lists की जांच कर रहे हैं और जहां उन्हें discrepancies दिखाई देती हैं, वहां चुनाव आयोग के सामने शिकायतें रख रहे हैं।

ऐसे में आने वाले महीनों में voter-list verification, duplicate entries, additions और deletions पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो सकती है।

लेकिन अंतिम तौर पर महत्वपूर्ण बात यही होगी कि चुनाव आयोग की scrutiny के बाद कितनी entries में वास्तविक गड़बड़ी मिलती है, कितने नाम सुधारे जाते हैं और कितने मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होती है।

अब आगे क्या?

UP में 2027 चुनाव से पहले voter-list scrutiny का यह अभियान अभी शुरुआती चरण में है। आने वाले revision में Form-6, Form-7 और Form-8 की जांच, duplicate entries का removal और political parties की complaints का disposal महत्वपूर्ण रहेगा।

अगर यह प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी होती है तो इससे electoral roll पर भरोसा बढ़ सकता है। लेकिन यदि जांच के दौरान बड़े पैमाने पर irregularities सामने आती हैं, तो यह मुद्दा 2027 चुनाव के सबसे बड़े राजनीतिक विवादों में से एक बन सकता है।

फिलहाल चुनाव आयोग का संदेश स्पष्ट है—SIR के बाद voter data में हुए बदलावों की दोबारा जांच होगी और गलती या लापरवाही मिलने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी।