उत्तर प्रदेश में संगठित अपराध और गैंगस्टर नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ा आंकड़ा सामने रखा है। सरकार के मुताबिक मार्च 2017 से अक्टूबर 2026 तक राज्य में 87,835 लोगों के खिलाफ Gangsters Act के तहत कार्रवाई की गई है। इसी अभियान के दौरान अपराधियों और माफिया से जुड़ी संपत्तियों पर करीब ₹15,233 करोड़ की कार्रवाई का आंकड़ा सामने आया है।
हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। ₹15,233 करोड़ का आंकड़ा पूरी तरह सरकारी खजाने में जमा हो चुकी या अंतिम रूप से confiscate की गई संपत्ति का मूल्य नहीं है। इसमें Gangsters Act के तहत हुई अलग-अलग तरह की संपत्ति कार्रवाई शामिल है—जैसे संपत्ति को अटैच करना, अवैध निर्माण गिराना और कानूनी प्रक्रिया के बाद संपत्ति को confiscate करना।
2017 के बाद बदली कार्रवाई की रणनीति
योगी सरकार के मुताबिक 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में अपराध के खिलाफ रणनीति केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रही। पुलिस और प्रशासन ने कथित अपराध से अर्जित संपत्ति और आर्थिक नेटवर्क को निशाना बनाने पर भी जोर दिया।
सरकार का तर्क है कि संगठित अपराध के नेटवर्क को कमजोर करने के लिए केवल आरोपियों को गिरफ्तार करना पर्याप्त नहीं है। यदि अपराध से बनाई गई संपत्ति और आर्थिक संसाधन उनके नियंत्रण में बने रहें, तो ऐसे नेटवर्क दोबारा खड़े हो सकते हैं। इसी वजह से Gangsters Act के तहत संपत्ति संबंधी कार्रवाई को अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।
अक्टूबर 2026 में सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 2017 से अब तक 23,601 इनामी/वांछित अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने की बात भी कही गई है। इसके अलावा 995 लोगों पर NSA के तहत कार्रवाई का आंकड़ा दिया गया है।
₹15,233 करोड़ के आंकड़े का मतलब क्या है?
संपत्ति कार्रवाई का यह आंकड़ा चर्चा का सबसे बड़ा हिस्सा है। रिपोर्ट के मुताबिक यह रकम समय के साथ बढ़ती गई—2021 में करीब ₹1,800 करोड़, मार्च 2023 तक ₹9,022.33 करोड़, अगस्त 2023 तक ₹11,841 करोड़, 2024 के अंत तक ₹14,246 करोड़ और अक्टूबर 2026 तक ₹15,233 करोड़ तक पहुंचने की बात कही गई है।
लेकिन इन आंकड़ों को समझते समय Attachment और Confiscation के बीच अंतर महत्वपूर्ण है।
किसी संपत्ति को attach करने का अर्थ यह नहीं है कि उसका मालिकाना हक उसी क्षण सरकार के पास चला गया। Attachment कानूनी प्रक्रिया के दौरान संपत्ति पर नियंत्रण/प्रतिबंध की कार्रवाई हो सकती है। वहीं final confiscation अलग कानूनी प्रक्रिया के बाद संपत्ति के सरकारी नियंत्रण में आने से जुड़ी होती है।
इसीलिए ₹15,233 करोड़ को “संपत्ति पर की गई कार्रवाई का cumulative value” कहना अधिक सटीक है, न कि यह कहना कि इतनी पूरी रकम की संपत्ति अंतिम रूप से सरकार की हो चुकी है।
अपराध की संपत्ति से गरीबों के लिए घर तक
योगी सरकार की इस नीति का एक और चर्चित पहलू यह है कि कुछ मामलों में अपराध से जुड़ी जमीन को Affordable Housing के लिए इस्तेमाल किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक अब तक ऐसे recovered plots पर 148 फ्लैट बनाकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को दिए जा चुके हैं।
प्रयागराज के लूकरगंज में 76 फ्लैट बनाए गए थे। यह परियोजना प्रयागराज विकास प्राधिकरण ने प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी के तहत विकसित की थी। रिपोर्ट के अनुसार जमीन का संबंध माफिया-राजनेता अतीक अहमद के नेटवर्क से जुड़ी संपत्ति से था। इन फ्लैटों की चाबियां जून 2023 में लाभार्थियों को सौंपी गई थीं।
इसी तरह लखनऊ के डालीबाग में 72 EWS फ्लैट तैयार किए गए। रिपोर्ट के मुताबिक यह परियोजना करीब 2,322 वर्गमीटर जमीन पर बनाई गई, जिसे मुख्तार अंसारी और उसके परिवार से जुड़ी संपत्ति से recovered land बताया गया है। नवंबर 2025 में पात्र परिवारों को allotment letters दिए गए थे।
प्रयागराज में 1,200 और घरों की योजना
इस अभियान का अगला बड़ा चरण प्रयागराज में प्रस्तावित है। रिपोर्ट के अनुसार कसारी-मसारी इलाके में करीब 1,200 घरों की योजना शुरू की गई है। यह परियोजना दो चरणों में पूरी की जानी है—पहले चरण में 602 और दूसरे चरण में 598 आवास प्रस्तावित हैं।
यदि यह परियोजना पूरी होती है, तो gangster-linked recovered land पर तैयार किए गए आवासों की संख्या 1,348 घरों तक पहुंचने की बात कही गई है।
यानी सरकार इस कार्रवाई को सिर्फ संपत्ति जब्ती या demolition तक सीमित नहीं दिखा रही, बल्कि कुछ recovered land को गरीब और EWS परिवारों के लिए आवास में बदलने की नीति के रूप में भी पेश कर रही है।
Gangsters Act के तहत कार्रवाई कितनी व्यापक?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2017 से अब तक 87,835 लोगों पर Gangsters Act लगाया गया है। इसके अलावा राज्य स्तर पर चिन्हित 68 बड़े माफिया चेहरों और उनके सहयोगियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। इन अभियानों में 909 मामले दर्ज करने और 651 लोगों की गिरफ्तारी का आंकड़ा सरकार ने दिया है।
सरकार का कहना है कि इस अभियान का लक्ष्य सिर्फ व्यक्तिगत अपराधियों को पकड़ना नहीं, बल्कि गैंग की पूरी आर्थिक और आपराधिक संरचना को कमजोर करना है।
सरकार के दावों पर ध्यान देने वाली बात
इतने बड़े आंकड़ों के साथ यह समझना भी जरूरी है कि ये आंकड़े सरकार द्वारा रिपोर्ट किए गए enforcement figures हैं। संपत्ति की कानूनी स्थिति प्रत्येक मामले में अलग हो सकती है और attachment, demolition तथा final confiscation एक ही चीज नहीं हैं।
इसलिए ₹15,233 करोड़ को लेकर सबसे सटीक निष्कर्ष यही है कि उत्तर प्रदेश में Gangsters Act के तहत करीब ₹15,233 करोड़ मूल्य की संपत्तियों पर व्यापक कार्रवाई रिपोर्ट की गई है, जबकि अंतिम confiscation का आंकड़ा इससे अलग हो सकता है।
आगे क्या?
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कानून-व्यवस्था और संगठित अपराध पर सरकार की कार्रवाई एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनी हुई है। योगी सरकार अपने “Zero Tolerance Against Crime” मॉडल को प्रशासनिक उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है।
आने वाले समय में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही रहेगा कि संपत्ति कार्रवाई के कितने मामलों में कानूनी प्रक्रिया पूरी होकर final confiscation होती है, कितनी संपत्ति वास्तव में सरकारी उपयोग में आती है और recovered land से बनने वाली आवासीय परियोजनाओं का विस्तार कितना होता है।
फिलहाल ₹15,233 करोड़ का आंकड़ा यह जरूर दिखाता है कि उत्तर प्रदेश में अपराध के खिलाफ सरकारी रणनीति का एक बड़ा हिस्सा अब criminal networks की आर्थिक ताकत पर प्रहार करने पर केंद्रित है।