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UP में रियल एस्टेट का बढ़ता दायरा, 9 महीने में ₹46,795 करोड़ के 217 प्रोजेक्ट दर्ज

सितंबर 2026 तक 66 हजार से ज्यादा यूनिट्स प्रस्तावित; लखनऊ में सबसे ज्यादा प्रोजेक्ट, जबकि गौतमबुद्ध नगर निवेश और यूनिट्स के मामले में सबसे आगे

UP में रियल एस्टेट का बढ़ता दायरा, 9 महीने में ₹46,795 करोड़ के 217 प्रोजेक्ट दर्ज
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

उत्तर प्रदेश के रियल एस्टेट सेक्टर से विकास और निवेश को लेकर बड़ा आंकड़ा सामने आया है। UP RERA के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी से सितंबर 2026 तक राज्य में 217 रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स पंजीकृत हुए हैं। इन परियोजनाओं में कुल 66,158 यूनिट्स प्रस्तावित हैं और इनकी कुल अनुमानित प्रोजेक्ट लागत करीब ₹46,795 करोड़ बताई गई है।

ये आंकड़े ऐसे समय सामने आए हैं जब उत्तर प्रदेश में नोएडा-ग्रेटर नोएडा के अलावा लखनऊ, गाजियाबाद, आगरा, वाराणसी और मथुरा जैसे शहरों में भी रियल एस्टेट गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं।

हालांकि, एक बात समझना जरूरी है—₹46,795 करोड़ को सीधे तौर पर बाजार में लग चुकी निवेश राशि नहीं माना जाना चाहिए। यह पंजीकृत परियोजनाओं की बताई गई कुल अनुमानित लागत है। वास्तविक निवेश, बिक्री और प्रोजेक्ट से होने वाली कमाई इससे अलग हो सकती है।

पश्चिमी यूपी में सबसे ज्यादा प्रोजेक्ट और लागत

क्षेत्रवार आंकड़ों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश सबसे आगे है। सितंबर तक यहां 111 प्रोजेक्ट्स रजिस्टर्ड हुए, जिनमें 41,666 यूनिट्स प्रस्तावित हैं।

इन परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत करीब ₹35,794.56 करोड़ है। यानी राज्य में पंजीकृत परियोजनाओं की संख्या और कुल लागत—दोनों में पश्चिमी यूपी की हिस्सेदारी सबसे बड़ी है।

इसके पीछे सबसे बड़ा कारण गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद जैसे NCR से जुड़े बड़े रियल एस्टेट बाजार हैं। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और आसपास के इलाकों में आवासीय, कॉमर्शियल और मिश्रित उपयोग वाली परियोजनाओं की मांग ने इस क्षेत्र को राज्य के सबसे बड़े रियल एस्टेट केंद्रों में बनाए रखा है।

गौतमबुद्ध नगर में ₹21,221 करोड़ से ज्यादा की परियोजनाएं

जिलावार आंकड़ों में गौतमबुद्ध नगर सबसे महत्वपूर्ण तस्वीर पेश करता है।

यहां सितंबर 2026 तक 37 प्रोजेक्ट्स रजिस्टर्ड हुए हैं। इन परियोजनाओं में 18,599 यूनिट्स प्रस्तावित हैं और कुल प्रोजेक्ट लागत करीब ₹21,221.37 करोड़ है।

यानी प्रोजेक्ट्स की संख्या में गौतमबुद्ध नगर लखनऊ से पीछे है, लेकिन प्रस्तावित यूनिट्स और कुल प्रोजेक्ट लागत दोनों में पूरे राज्य में सबसे आगे है।

यह आंकड़ा बताता है कि NCR क्षेत्र में कम संख्या वाली कुछ बड़ी परियोजनाएं भी राज्य के कुल रियल एस्टेट निवेश मूल्य पर बड़ा प्रभाव डाल रही हैं।

लखनऊ में सबसे ज्यादा 59 प्रोजेक्ट

अगर केवल पंजीकृत परियोजनाओं की संख्या देखें तो लखनऊ सबसे आगे है।

राजधानी में सितंबर तक 59 रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स रजिस्टर्ड हुए हैं। इनमें करीब 15,959 यूनिट्स प्रस्तावित हैं और कुल अनुमानित प्रोजेक्ट लागत ₹5,795.33 करोड़ है।

इससे यह संकेत मिलता है कि लखनऊ में रियल एस्टेट गतिविधि सिर्फ बड़े कॉरिडोर या सीमित इलाकों तक नहीं है, बल्कि राजधानी के अलग-अलग हिस्सों में नए आवासीय और अन्य प्रोजेक्ट्स का विस्तार हो रहा है।

आने वाले वर्षों में शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार, कनेक्टिविटी और बढ़ती आबादी के साथ इस बाजार पर और नजर रहने की संभावना है।

गाजियाबाद भी बड़े बाजार के रूप में उभरा

गाजियाबाद भी आंकड़ों में मजबूत स्थिति में है। यहां 35 प्रोजेक्ट्स रजिस्टर्ड हुए हैं।

इन परियोजनाओं में 13,666 यूनिट्स प्रस्तावित हैं और कुल अनुमानित लागत करीब ₹11,261.87 करोड़ है।

गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद को साथ देखें तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश में NCR से जुड़े इलाके राज्य के रियल एस्टेट सेक्टर की कुल गतिविधि में बड़ी भूमिका निभाते दिखाई देते हैं।

आगरा, वाराणसी और मथुरा में भी नए प्रोजेक्ट

रियल एस्टेट का विस्तार सिर्फ NCR और लखनऊ तक सीमित नहीं है।

आगरा और वाराणसी में सितंबर तक 12-12 प्रोजेक्ट्स रजिस्टर्ड हुए। आगरा में करीब 3,691 यूनिट्स और वाराणसी में 2,176 यूनिट्स प्रस्तावित हैं।

आगरा की इन परियोजनाओं की कुल लागत करीब ₹1,054.58 करोड़, जबकि वाराणसी की परियोजनाओं की लागत करीब ₹1,772.89 करोड़ बताई गई है।

वहीं मथुरा में 11 प्रोजेक्ट्स रजिस्टर्ड हुए हैं, जिनमें 2,126 यूनिट्स प्रस्तावित हैं और कुल परियोजना लागत करीब ₹829.85 करोड़ है।

इससे संकेत मिलता है कि धार्मिक, पर्यटन और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों से जुड़े शहरों में भी रियल एस्टेट डेवलपमेंट का आधार बढ़ रहा है।

मध्य, पूर्वी और बुंदेलखंड में भी गतिविधि

आंकड़ों के मुताबिक मध्य उत्तर प्रदेश में 60 प्रोजेक्ट्स रजिस्टर्ड हुए हैं। इनमें 16,117 यूनिट्स प्रस्तावित हैं और कुल लागत करीब ₹5,997.05 करोड़ है।

पूर्वी उत्तर प्रदेश में 30 प्रोजेक्ट्स के तहत 5,636 यूनिट्स प्रस्तावित हैं और इनकी कुल लागत करीब ₹3,869.34 करोड़ है।

इसके अलावा रोहिलखंड में 12 प्रोजेक्ट्स और बुंदेलखंड में 4 प्रोजेक्ट्स दर्ज हुए हैं। बुंदेलखंड में प्रस्तावित 975 यूनिट्स की कुल परियोजना लागत करीब ₹192.32 करोड़ बताई गई है।

इस तरह पश्चिमी यूपी के दबदबे के बावजूद राज्य के दूसरे हिस्सों में भी रियल एस्टेट परियोजनाओं की मौजूदगी दिखाई दे रही है।

UP RERA ने आंकड़ों को बताया सेक्टर की सक्रियता का संकेत

UP RERA के अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी ने इन आंकड़ों को राज्य के रियल एस्टेट सेक्टर में जारी गतिविधियों और अलग-अलग क्षेत्रों की विकास क्षमता का संकेत बताया है।

RERA के अनुसार, प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन का उद्देश्य सेक्टर में पारदर्शिता, जवाबदेही और नियामकीय अनुपालन को मजबूत करना है। प्राधिकरण लगातार डेवलपर्स के लिए अनुपालन और घर खरीदारों के अधिकारों से जुड़े नियमों पर भी जोर दे रहा है।

हाल में UP RERA ने घर खरीदारों को भी सलाह दी है कि वे परियोजना से संबंधित भुगतान केवल उसके निर्धारित कलेक्शन अकाउंट में ही जमा करें।

होमबायर्स के लिए इसका क्या मतलब?

नए प्रोजेक्ट्स की बढ़ती संख्या खरीदारों के लिए विकल्प बढ़ा सकती है, लेकिन केवल बड़ी परियोजना लागत देखकर निवेश का फैसला करना सही नहीं होगा।

घर या फ्लैट खरीदने वाले लोगों को परियोजना का RERA रजिस्ट्रेशन, प्रमोटर की जानकारी, स्वीकृत नक्शा, परियोजना की समयसीमा, भुगतान व्यवस्था और पिछले रिकॉर्ड की जांच करनी चाहिए।

खासकर तेजी से विकसित हो रहे NCR और लखनऊ जैसे बाजारों में खरीदारों के लिए नियामकीय जानकारी समझना महत्वपूर्ण हो जाता है।

2026 के आंकड़े क्या संकेत दे रहे हैं?

सितंबर तक के आंकड़ों से स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश में रियल एस्टेट गतिविधि का केंद्र अभी भी पश्चिमी यूपी और NCR है, लेकिन लखनऊ समेत कई अन्य शहरों में भी परियोजनाओं का विस्तार हो रहा है।

217 प्रोजेक्ट्स और ₹46,795 करोड़ की कुल अनुमानित लागत राज्य के रियल एस्टेट बाजार के आकार और गतिविधि का एक महत्वपूर्ण संकेतक है। वहीं 66,158 प्रस्तावित यूनिट्स यह बताती हैं कि आने वाले समय में आवासीय और संबंधित रियल एस्टेट सप्लाई बढ़ सकती है।

हालांकि, इन आंकड़ों को वास्तविक बिक्री या अंतिम निवेश के बराबर नहीं माना जाना चाहिए। परियोजनाओं की प्रगति, निर्माण की गति और खरीदारों की मांग ही आगे बताएगी कि इन पंजीकृत परियोजनाओं में से कितनी योजनाएं समय पर जमीन पर उतरती हैं।

अब आगे क्या?

सितंबर तक सामने आए आंकड़ों के बाद अब नजर इस बात पर रहेगी कि अक्टूबर से दिसंबर 2026 के दौरान कितने नए प्रोजेक्ट RERA में दर्ज होते हैं और साल के अंत तक कुल परियोजना लागत किस स्तर तक पहुंचती है।

अगर NCR के साथ-साथ लखनऊ, वाराणसी, आगरा और दूसरे शहरों में रजिस्ट्रेशन की गति बनी रहती है, तो उत्तर प्रदेश का रियल एस्टेट बाजार और अधिक व्यापक हो सकता है।

फिलहाल सबसे बड़ा संकेत यही है कि UP का रियल एस्टेट सेक्टर सिर्फ नोएडा तक सीमित नहीं रहा है—राजधानी लखनऊ और कई क्षेत्रीय शहर भी नए प्रोजेक्ट्स और आवासीय विकास के नक्शे पर तेजी से उभर रहे हैं।