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UP MLC चुनाव में बड़े प्रशासनिक प्रतिबंध, मतदान वाले जिलों में स्कूल बंद और शराब बिक्री पर रोक

23 अक्टूबर को 72 जिलों में मतदान; 11 सीटों के लिए 2,697 मतदान केंद्र तैयार, 14.81 लाख से ज्यादा मतदाता करेंगे मतदान

UP MLC चुनाव में बड़े प्रशासनिक प्रतिबंध, मतदान वाले जिलों में स्कूल बंद और शराब बिक्री पर रोक
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों के लिए मतदान के साथ ही प्रशासन ने चुनावी प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए कई महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं लागू की हैं। शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को प्रदेश के 75 में से 72 जिलों में मतदान हो रहा है। इसी वजह से कई जिलों में स्कूल-कॉलेजों को बंद रखने का आदेश दिया गया है, जबकि शराब की बिक्री पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।

इस चुनाव में 5 स्नातक और 6 शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटों पर मतदान हो रहा है। करीब 14.81 लाख मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। मतदान सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक चलेगा। चुनाव के लिए कुल 2,697 मतदान स्थल बनाए गए हैं।

72 जिलों में मतदान, तीन जिलों में नहीं

एमएलसी चुनाव के लिए प्रदेश के 72 जिलों में मतदान हो रहा है। कानपुर नगर, कानपुर देहात और उन्नाव इस चरण के मतदान से बाहर हैं, क्योंकि इन जिलों में संबंधित चुनाव प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है।

चुनाव को व्यवस्थित तरीके से कराने के लिए प्रशासन ने बड़े स्तर पर अधिकारियों और मतदान कर्मियों की तैनाती की है। रिपोर्टों के अनुसार 1,041 सेक्टर मजिस्ट्रेट और 456 जोनल मजिस्ट्रेट चुनाव व्यवस्था की निगरानी कर रहे हैं। मतदान केंद्रों पर माइक्रो ऑब्जर्वर और वीडियोग्राफी की भी व्यवस्था की गई है।

स्कूल-कॉलेजों पर क्या है आदेश?

मतदान वाले जिलों में चुनाव व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए कई जगह स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। इसका उद्देश्य मतदान केंद्रों के रूप में इस्तेमाल होने वाले परिसरों में चुनावी तैयारियों को आसान बनाना और मतदान के दौरान भीड़ तथा आवाजाही को नियंत्रित रखना है।

हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि पूरे उत्तर प्रदेश में सभी स्कूलों के लिए एक जैसा आदेश नहीं है। अलग-अलग जिलों के जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार आदेश जारी किए हैं।

उदाहरण के लिए लखनऊ में 23 अक्टूबर को स्कूल बंद रखने का आदेश जारी किया गया। वहीं गाजियाबाद में नर्सरी से 12वीं तक के स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। दूसरी तरफ गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) में सभी स्कूलों को बंद करने के बजाय संबंधित निर्वाचन क्षेत्र के पात्र और पंजीकृत मतदाताओं को मतदान के लिए विशेष आकस्मिक अवकाश देने की व्यवस्था बताई गई है।

इसलिए अभिभावकों और विद्यार्थियों के लिए अपने स्कूल की आधिकारिक सूचना देखना जरूरी है।

शराब की बिक्री पर भी पूरी रोक

चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने ड्राई डे घोषित किया है। 23 अक्टूबर को मतदान वाले जिलों में शराब और बीयर की बिक्री पर प्रतिबंध है। यह रोक शराब की दुकानों के साथ लाइसेंस प्राप्त ऐसे प्रतिष्ठानों पर भी लागू होती है जहां शराब की बिक्री या सेवा होती है।

हालांकि कानपुर नगर, कानपुर देहात और उन्नाव को इस विशेष आदेश से बाहर रखा गया है। आबकारी विभाग ने संबंधित जिलाधिकारियों को आदेश का कड़ाई से पालन कराने और उल्लंघन की स्थिति में कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

27 अक्टूबर को भी शराब बंद रहेगी

प्रतिबंध सिर्फ मतदान वाले दिन तक सीमित नहीं है। 27 अक्टूबर को मतगणना के दौरान भी संबंधित जिलों में शराब की बिक्री पर रोक रहेगी। प्रशासन का उद्देश्य मतगणना के दौरान कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक शांति बनाए रखना है।

इसका मतलब है कि शराब कारोबार से जुड़े लोगों को 23 और 27 अक्टूबर की तारीखों को विशेष रूप से ध्यान में रखना होगा।

किन सीटों पर हो रहा है चुनाव?

इस बार विधान परिषद की 11 सीटों पर चुनाव हो रहा है। इनमें:

5 खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र

6 खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र

शामिल हैं।

स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में लखनऊ, आगरा, मेरठ, वाराणसी और इलाहाबाद-झांसी क्षेत्र शामिल हैं। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में लखनऊ, आगरा, मेरठ, वाराणसी, बरेली-मुरादाबाद और गोरखपुर-फैजाबाद क्षेत्र शामिल हैं।

इन सीटों के लिए कुल 152 प्रत्याशी मैदान में हैं।

मतदान व्यवस्था कितनी बड़ी है?

इतने बड़े निर्वाचन क्षेत्र में मतदान कराने के लिए प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। प्रदेश में कुल 2,697 मतदान केंद्र/मतदेय स्थल बनाए गए हैं और हजारों मतदान कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी में लगाया गया है। मतदान प्रक्रिया की निगरानी के लिए सेक्टर और जोनल मजिस्ट्रेटों की तैनाती के साथ-साथ वीडियोग्राफी की व्यवस्था भी की गई है।

प्रशासन की कोशिश है कि मतदान के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था न हो और मतदाता बिना किसी दबाव के अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकें।

स्कूल बंद करने की वजह क्या है?

स्कूलों में छुट्टी का एक बड़ा कारण यह है कि कई शैक्षणिक संस्थानों का इस्तेमाल मतदान केंद्र या चुनावी गतिविधियों के लिए किया जाता है। ऐसे में नियमित कक्षाएं संचालित करने के बजाय परिसर को चुनाव प्रक्रिया के लिए उपलब्ध कराया जाता है।

इसके अलावा मतदान के दौरान बड़ी संख्या में चुनाव कर्मियों, सुरक्षा बलों और मतदाताओं की आवाजाही होती है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन स्कूलों को बंद रखने का फैसला व्यवस्था और सुरक्षा को ध्यान में रखकर करता है।

लेकिन यह फैसला हर जिले में बिल्कुल समान नहीं है। इसलिए किसी भी जिले में स्कूल खुला या बंद होने की स्थिति संबंधित प्रशासन के आदेश पर निर्भर करेगी।

शराब पर रोक क्यों लगाई गई?

चुनाव के दौरान शराब की बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध लगाने का उद्देश्य मतदाताओं को प्रभावित करने की संभावनाओं को रोकना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।

आबकारी विभाग ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि ड्राई डे के दौरान शराब की बिक्री न हो और लाइसेंस शर्तों का पालन सुनिश्चित कराया जाए। उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

मतदान के बाद अब 27 अक्टूबर पर नजर

23 अक्टूबर को मतदान पूरा होने के बाद सभी की नजर 27 अक्टूबर की मतगणना पर होगी। मतगणना के दिन भी प्रशासन ने शराब बिक्री पर प्रतिबंध का प्रावधान रखा है।

चुनाव परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि विधान परिषद की इन सीटों का राजनीतिक महत्व है और अगले कुछ महीनों में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले इसे राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण मुकाबले के रूप में देखा जा रहा है।23 अक्टूबर को मतदान पूरा होने के बाद सभी की नजर 27 अक्टूबर की मतगणना पर होगी। मतगणना के दिन भी प्रशासन ने शराब बिक्री पर प्रतिबंध का प्रावधान रखा है।

चुनाव परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि विधान परिषद की इन सीटों का राजनीतिक महत्व है और अगले कुछ महीनों में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले इसे राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण मुकाबले के रूप में देखा जा रहा है।

आम लोगों के लिए क्या जरूरी है?

मतदान वाले जिलों में रहने वाले लोगों को आज की प्रशासनिक व्यवस्थाओं का ध्यान रखना चाहिए। खासकर स्कूल जाने वाले बच्चों के अभिभावक अपने संस्थान की छुट्टी की पुष्टि कर लें, क्योंकि जिले-दर-जिले आदेश अलग हो सकते हैं।

इसी तरह शराब दुकानों और बार/अन्य लाइसेंसधारी प्रतिष्ठानों को ड्राई डे के नियमों का पालन करना होगा।

मतदाताओं के लिए मतदान का समय सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक है। मतदान केंद्र पर जाने से पहले अपने बूथ और मतदाता विवरण की जानकारी जांच लेना उपयोगी रहेगा।

चुनावी माहौल में प्रशासन की सख्ती

कुल मिलाकर, यूपी एमएलसी चुनाव के दौरान प्रशासन ने स्कूलों की छुट्टी, शराब बिक्री पर रोक, अतिरिक्त मजिस्ट्रेटों की तैनाती और मतदान केंद्रों पर निगरानी जैसे कदम उठाए हैं।

इनका मुख्य उद्देश्य मतदान प्रक्रिया को शांतिपूर्ण रखना और किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना को कम करना है। हालांकि स्कूल बंद होने का फैसला सभी जिलों में एक जैसा नहीं है, इसलिए स्थानीय आदेश को ही अंतिम माना जाना चाहिए।

अब 23 अक्टूबर के मतदान के बाद 27 अक्टूबर को परिणाम सामने आएंगे, जिसके साथ 11 एमएलसी सीटों के इस चुनावी मुकाबले की तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी।