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उत्तर प्रदेश में तीन महीने में पंचायत चुनाव कराने का हाईकोर्ट आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक रखने के राज्य सरकार के फैसले को वैध ठहराया है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ का कक्ष जहाँ पंचायत चुनाव को लेकर आदेश सुनाया गया।
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने बुधवार, 14 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश में तीन महीने के भीतर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने 11 याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया, जिनमें छह जनहित याचिकाएं शामिल थीं।

याचिकाओं में राज्य सरकार के 25 मई के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद निवर्तमान प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किया गया था। अदालत ने इस नियुक्ति को वैध ठहराया है और कहा है कि ये प्रशासक चुनावों तक अपने पद पर बने रहेंगे।

हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि चुनावें मौजूदा नियमों के तहत कराए जाएंगे और आरक्षण से जुड़े 27 प्रतिशत के प्रावधान का सख्ती से पालन किया जाएगा। राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को निर्धारित अवधि में चुनाव प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

प्रयागराज के वकील इम्तियाज हुसैन समेत अन्य याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर समय पर पंचायत चुनाव कराने की मांग की थी। हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, अन्य आयोगों के काम से चुनावों की प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी।