उत्तर प्रदेश विधान परिषद की वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन सीट पर शुक्रवार को मतदान पूरा हो गया। चुनाव में शिक्षकों ने स्नातक सीट की तुलना में कहीं ज्यादा उत्साह दिखाया। वाराणसी खंड के आठ जिलों में शिक्षक सीट पर कुल 69.87% मतदान दर्ज किया गया। कुल 34,900 पंजीकृत शिक्षक मतदाताओं में से 24,384 ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। अब सभी की नजर 27 अक्टूबर को होने वाली मतगणना पर है।
यह चुनाव केवल एक MLC सीट का मुकाबला नहीं माना जा रहा। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले BJP और SP के बीच राजनीतिक ताकत की परीक्षा के तौर पर भी इसे देखा जा रहा है। हालांकि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता आधार सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग है, लेकिन इस चुनाव से दोनों दलों के स्थानीय संगठन, उम्मीदवारों की पकड़ और शिक्षक समुदाय के बीच राजनीतिक प्रभाव के संकेत जरूर मिल सकते हैं।
तीन प्रमुख चेहरों के बीच मुकाबला
वाराणसी खंड शिक्षक सीट पर कुल 10 उम्मीदवार मैदान में थे, लेकिन मुख्य मुकाबला तीन प्रमुख चेहरों के बीच माना गया।
समाजवादी पार्टी के निवर्तमान MLC लाल बिहारी यादव दोबारा अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश में हैं। दूसरी ओर BJP ने डॉ. प्रमोद कुमार मिश्र को मैदान में उतारा है। इनके अलावा पूर्व MLC चेतनारायण सिंह भी मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने वाले प्रमुख उम्मीदवारों में शामिल हैं।
इस वजह से परिणाम केवल BJP बनाम SP की सीधी लड़ाई से तय होगा या किसी तीसरे उम्मीदवार का प्रभाव निर्णायक साबित होगा—इस पर भी राजनीतिक नजरें टिकी हैं।
शिक्षक सीट पर 69.87% मतदान
पूरे वाराणसी खंड में शिक्षक सीट पर 69.87% वोटिंग हुई। आठ जिलों में भदोही 77.34% मतदान के साथ सबसे आगे रहा।
इसके बाद:
सोनभद्र — 75.49%
जौनपुर — 71.98%
मिर्जापुर — 71.70%
चंदौली — 71.68%
गाजीपुर — 69.50%
बलिया — 66.06%
वाराणसी — 66.72%
इन आंकड़ों से साफ है कि शिक्षक सीट पर लगभग हर जिले में मतदाताओं की भागीदारी मजबूत रही।
वाराणसी में भी शिक्षकों ने दिखाया उत्साह
वाराणसी जिले में शिक्षक सीट के लिए 7,888 मतदाता पंजीकृत थे। इनमें से 5,263 शिक्षकों ने मतदान किया, जिससे जिले में turnout 66.72% रहा। जिले में शिक्षक सीट के लिए 21 मतदान केंद्र बनाए गए थे।
दिलचस्प बात यह रही कि मतदान के दौरान शिक्षक सीट की भागीदारी लगातार स्नातक सीट से आगे रही। दोपहर 12 बजे तक शिक्षक सीट पर 28.44% मतदान हो चुका था, जबकि स्नातक सीट पर यह आंकड़ा 13.31% था। शाम तक यह अंतर और स्पष्ट हो गया।
क्यों महत्वपूर्ण है शिक्षक वोट?
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या सामान्य चुनाव की तुलना में छोटी होती है, लेकिन यहां मतदाता विशिष्ट और संगठित वर्ग से आते हैं। इसलिए उम्मीदवारों की व्यक्तिगत पहुंच, शिक्षक संगठनों से संबंध, स्थानीय मुद्दों और लंबे समय से बनी राजनीतिक पकड़ का प्रभाव महत्वपूर्ण हो सकता है।
इस चुनाव में शिक्षकों से जुड़े मुद्दे, सेवा संबंधी सवाल, पेंशन, शिक्षा व्यवस्था और शिक्षक हित प्रमुख राजनीतिक विषयों में रहे। BJP और SP दोनों ने अपने उम्मीदवारों के पक्ष में संगठनात्मक ताकत लगाने की कोशिश की।
BJP-SP के लिए क्या संकेत?
BJP के लिए यह चुनाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले अपने संगठन और चुनावी मशीनरी की ताकत का परीक्षण कर रही है। दूसरी ओर SP के लिए वाराणसी जैसे महत्वपूर्ण पूर्वांचली क्षेत्र में अपनी पकड़ बनाए रखना अहम है।
हालांकि MLC चुनाव के परिणाम को सीधे विधानसभा चुनाव का भविष्य बताना सही नहीं होगा। Teacher electorate बहुत छोटा और अलग प्रकृति का है, इसलिए यहां की जीत-हार को 2027 के विधानसभा चुनाव के साथ सीधे जोड़ना राजनीतिक विश्लेषण में अतिशयोक्ति हो सकती है।
फिर भी परिणाम से यह संकेत जरूर मिलेगा कि संबंधित शिक्षक मतदाता वर्ग में किस उम्मीदवार की व्यक्तिगत और राजनीतिक पकड़ मजबूत रही।
मतपत्र से हुआ मतदान, अब वरीयता की गिनती
इन चुनावों में सामान्य EVM की जगह बैलेट पेपर का इस्तेमाल हुआ। शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता उम्मीदवारों को अपनी पसंद के क्रम में वरीयता देते हैं। इसलिए 27 अक्टूबर की मतगणना सामान्य विधानसभा चुनाव की तरह केवल सीधे वोट जोड़ने की प्रक्रिया नहीं होगी।
यही कारण है कि मतदान प्रतिशत और शुरुआती रुझानों के आधार पर विजेता का अनुमान लगाना आसान नहीं होगा।
27 अक्टूबर को खुलेगा परिणाम का पत्ता
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि लाल बिहारी यादव अपनी सीट बचा पाएंगे या BJP के डॉ. प्रमोद कुमार मिश्र नया समीकरण बनाएंगे? साथ ही चेतनारायण सिंह कितने वोट हासिल करते हैं, यह भी परिणाम की दिशा को प्रभावित कर सकता है।
वाराणसी खंड की शिक्षक और स्नातक दोनों सीटों की मतगणना 27 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से वाराणसी के पहाड़ी मंडी में प्रस्तावित है। मतपेटियों को स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षित रखा गया है और मतगणना स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है।
अब चुनावी मैदान में प्रचार और मतदान का दौर खत्म हो चुका है। अगले कुछ दिन उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों के लिए गणित, बूथवार आंकड़ों और वरीयता वोटों के आकलन के होंगे।