वाराणसी में MLC चुनाव की मतगणना शुरू होने से ठीक पहले पहड़िया मंडी स्थित स्ट्रॉन्ग रूम की CCTV निगरानी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने प्रशासन के सामने शिकायत दर्ज कराई। सपा प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा ने भी स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक, स्ट्रॉन्ग रूम की निगरानी कर रहे कुछ CCTV कैमरों के कुछ समय के लिए बंद रहने का दावा किया गया है। एक रिपोर्ट में यह अवधि करीब 10 मिनट बताई गई है, जबकि आशुतोष सिन्हा की ओर से देर रात एक अन्य अवधि में निगरानी बाधित रहने का दावा भी किया गया है। हालांकि, इन दावों की पूरी अवधि और तकनीकी कारण की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
वीडियो वायरल होने के बाद बढ़ा विवाद
CCTV कैमरों के बंद होने का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आया। सपा कार्यकर्ताओं ने इसे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा से जोड़ते हुए प्रशासन के सामने अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
सपा प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए निगरानी व्यवस्था की जांच की मांग की। उनका कहना है कि चुनावी मतपेटियां स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षित रखी गई हैं, इसलिए वहां लगे CCTV कैमरों का लगातार काम करना बेहद महत्वपूर्ण है।
प्रशासन ने क्या भरोसा दिया?
विवाद के बाद प्रशासन की ओर से सपा पक्ष को आश्वासन दिए जाने की बात सामने आई है। आशुतोष सिन्हा के अनुसार, प्रशासन ने खराब कैमरों को ठीक कराने के साथ-साथ जरूरत के मुताबिक अतिरिक्त CCTV कैमरे लगाने का भरोसा दिया है।
इससे संकेत मिलता है कि प्रशासन निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में कदम उठा रहा है। हालांकि, कैमरे आखिर किस वजह से बंद हुए और कितने समय तक उनकी निगरानी बाधित रही, इसका स्पष्ट जवाब तकनीकी जांच या प्रशासनिक रिपोर्ट के बाद ही सामने आ सकेगा।
मतगणना आज, सुरक्षा के कड़े इंतजाम
वाराणसी खंड के स्नातक और शिक्षक MLC चुनाव की मतगणना 27 अक्टूबर की सुबह 8 बजे पहड़िया मंडी स्थित FCI के दो गोदामों में शुरू होने की तैयारी है। दोनों निर्वाचन क्षेत्रों के लिए 15-15 टेबल लगाए गए हैं और करीब 1.20 लाख मतपत्रों की गणना होनी है। मतगणना के दौरान CCTV निगरानी की व्यवस्था भी रखी गई है।
पुलिस प्रशासन ने भी मतगणना स्थल पर त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की है। स्थल की करीब एक किलोमीटर की परिधि में जांच के बाद केवल अधिकृत पासधारकों को प्रवेश की अनुमति होगी। प्रवेश द्वारों पर DFMD जांच, पुलिस बल, PAC और QRT की तैनाती की गई है।
पहले भी स्ट्रॉन्ग रूम को लेकर उठ चुके हैं सवाल
CCTV विवाद से पहले भी पहड़िया मंडी के स्ट्रॉन्ग रूम में मतपेटियों को लेकर सपा प्रत्याशी की ओर से आपत्ति जताई गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, चंदौली से आई एक मतपेटी के ऊपर बंधे कपड़े की गांठ खुली और एक पर्ची गायब मिलने पर आशुतोष सिन्हा ने आपत्ति दर्ज कराई थी। इसके बाद संबंधित मतपेटी को अलग रखा गया और सभी मतपेटियां प्रत्याशियों की मौजूदगी में स्ट्रॉन्ग रूम में रखकर सील किया गया था।
23 अक्टूबर को भी आशुतोष सिन्हा के स्ट्रॉन्ग रूम में जाने को लेकर अधिकारियों के साथ स्थिति बनी थी। उन्हें अंदर जाने से रोक दिया गया था।
इन घटनाओं के बाद अब CCTV को लेकर सामने आया विवाद चुनावी प्रक्रिया में निगरानी और पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर रहा है।
क्या कैमरा बंद होने से मतपेटियों की सुरक्षा प्रभावित हुई?
फिलहाल इस सवाल का कोई अंतिम आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है। केवल CCTV कैमरे के कुछ समय के लिए बंद रहने की घटना अपने आप में मतपेटियों के साथ किसी छेड़छाड़ को साबित नहीं करती।
यही वजह है कि पूरे मामले में आरोप और तथ्य को अलग-अलग रखना जरूरी है। CCTV बंद होने की वजह तकनीकी खराबी थी, बिजली या नेटवर्क से जुड़ी समस्या थी अथवा कोई अन्य कारण—यह जांच के बाद स्पष्ट हो सकता है।
स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा में तैनात पुलिस बल, सीलिंग प्रक्रिया, प्रवेश नियंत्रण और अन्य सुरक्षा प्रोटोकॉल भी पूरे मामले का हिस्सा हैं। इसलिए CCTV फुटेज के साथ-साथ संबंधित तकनीकी लॉग और ड्यूटी रिकॉर्ड की जांच से स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।
चुनावी नतीजों पर भी नजर
वाराणसी खंड की शिक्षक और स्नातक MLC सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था। शिक्षक सीट पर मतदान प्रतिशत स्नातक सीट की तुलना में काफी अधिक रहा था। दोनों सीटों के नतीजों को लेकर राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों की नजर अब मतगणना पर है।
ऐसे में मतगणना स्थल की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर उठने वाला कोई भी सवाल राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है। प्रशासन के सामने अब चुनौती सिर्फ मतगणना को शांतिपूर्ण तरीके से पूरा कराने की नहीं, बल्कि हर स्तर पर निगरानी व्यवस्था को भरोसेमंद बनाए रखने की भी है।
अब आगे क्या होगा?
प्रशासन के सामने फिलहाल तीन अहम काम हैं—CCTV व्यवस्था को पूरी तरह दुरुस्त करना, जरूरत के अनुसार अतिरिक्त कैमरे लगाना और कैमरे बंद रहने की घटना के तकनीकी कारण को स्पष्ट करना।
यदि प्रशासन CCTV रिकॉर्ड और तकनीकी लॉग से यह स्पष्ट कर देता है कि कैमरे क्यों बंद हुए और उस दौरान स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा किस तरह सुनिश्चित की गई, तो विवाद को काफी हद तक शांत किया जा सकता है।
फिलहाल किसी तरह की मतपेटी से छेड़छाड़ या चुनावी सामग्री के साथ गड़बड़ी की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए मामले को लेकर सामने आए दावों को जांच पूरी होने तक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।