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यूपी में बेमौसम बारिश ने किसानों की बढ़ाई टेंशन! खेतों में भीगा धान, आलू की बुवाई पर संकट; CM योगी ने मांगी नुकसान की रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश और तेज हवाओं से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। खेतों में खड़ी और कटी हुई धान की फसल खराब होने का खतरा है, वहीं आलू की बुवाई भी प्रभावित हो रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को फसल नुकसान का तत्काल आकलन कर प्रभावित किसानों को मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं।

यूपी में बेमौसम बारिश ने किसानों की बढ़ाई टेंशन! खेतों में भीगा धान, आलू की बुवाई पर संकट; CM योगी ने मांगी नुकसान की रिपोर्ट
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

उत्तर प्रदेश में बेमौसम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। अक्टूबर के आखिरी दिनों में हुई लगातार बारिश और तेज हवाओं का असर अब खेतों में दिखाई देने लगा है। कहीं पककर तैयार धान की फसल खेतों में गिर रही है, तो कहीं कटाई के बाद खलिहानों में रखी फसल बारिश के पानी में भीग गई है।

सबसे ज्यादा परेशानी उन किसानों को हो रही है, जिन्होंने धान की कटाई कर ली थी या जिनकी फसल कटाई के लिए तैयार थी। दूसरी तरफ रबी सीजन की तैयारियों के बीच आलू की बुवाई पर भी बारिश का असर पड़ने की आशंका है।

धान की फसल पर बारिश की मार, भीग गई किसानों की मेहनत
प्रदेश के कई इलाकों में धान की फसल पककर तैयार है। किसान कटाई और फसल को मंडियों तक पहुंचाने में जुटे हुए हैं। लेकिन लगातार बारिश ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

बारिश के कारण:
- खेतों में खड़ी पकी धान की फसल गिरने का खतरा है।
- कटी हुई फसल खलिहानों में भीग रही है।
- धान के दानों की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
- लंबे समय तक नमी रहने पर फसल खराब होने और दाने अंकुरित होने का खतरा है।
- खेतों में पानी भरने से कटाई का काम रुक सकता है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश के वाराणसी, गाजीपुर, सोनभद्र और भदोही जैसे जिलों में भी किसानों ने फसल को लेकर चिंता जताई है। वाराणसी क्षेत्र में शुक्रवार को लगभग 40 मिलीमीटर बारिश दर्ज होने की रिपोर्ट है।

आलू की बुवाई पर भी पड़ सकता है असर
धान के बाद अब किसानों के लिए आलू की खेती का समय बेहद महत्वपूर्ण है। अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में बड़ी संख्या में किसान खेत तैयार करके आलू की बुवाई में जुटे हैं।

लेकिन लगातार बारिश से खेतों में अतिरिक्त नमी और जलभराव की समस्या पैदा हो सकती है।

इससे:
- आलू की बुवाई में देरी हो सकती है।
- खेतों में बोए गए बीज सड़ने का खतरा बढ़ सकता है।
- मिट्टी में जरूरत से ज्यादा नमी खेती की तैयारी प्रभावित कर सकती है।
- किसानों की लागत और उत्पादन दोनों पर असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि बारिश जल्दी रुक जाती है तो नुकसान सीमित रह सकता है, लेकिन लगातार जलभराव रहने पर किसानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिए तत्काल सर्वे के निर्देश
किसानों की परेशानी को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को बारिश से प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि बारिश और अतिवृष्टि के कारण फसलों को हुए नुकसान का आकलन किया जाए और प्रभावित किसानों को नियमानुसार जल्द मुआवजा उपलब्ध कराया जाए।

उन्होंने अधिकारियों को ये निर्देश भी दिए हैं:
1. प्रभावित जिलों में फसल नुकसान का तत्काल सर्वे कराया जाए।
2. बारिश से हुई पशुहानि का आकलन किया जाए।
3. मकान गिरने से प्रभावित परिवारों को अनुमन्य मुआवजा दिया जाए।
4. बेघर लोगों को राहत और शरणालय केंद्रों तक पहुंचाया जाए।
5. अधिकारी प्रभावित क्षेत्रों में जाकर लोगों की समस्याएं सुनें।
6. राहत कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संकट की इस घड़ी में सरकार किसानों और प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है।

किसानों को कब मिलेगा मुआवजा?
फिलहाल ताजा बारिश से प्रदेश में कुल कितने हेक्टेयर फसल क्षेत्र को नुकसान हुआ है, इसका समेकित आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है।

प्रशासन की ओर से नुकसान का आकलन किए जाने के बाद ही प्रभावित किसानों और मुआवजे की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

किसानों के लिए जरूरी है कि वे अपनी प्रभावित फसल की तस्वीरें और अन्य जरूरी प्रमाण सुरक्षित रखें तथा स्थानीय राजस्व और कृषि विभाग के अधिकारियों को नुकसान की जानकारी दें।

बारिश थमने के बाद भी किसानों की बढ़ सकती है परेशानी
बारिश रुकने के बाद भी खेतों में जमा पानी और फसल में बनी नमी किसानों के लिए चुनौती होगी। धान को समय पर सुखाना, खराब हुई उपज को अलग करना और आलू की बुवाई के लिए खेतों को दोबारा तैयार करना जरूरी होगा।

अब किसानों की निगाहें प्रशासनिक सर्वे और सरकार की ओर से मिलने वाली आर्थिक सहायता पर टिकी हैं।