जालौन/कालपी। उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में कालपी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता गयादीन अहिरवार (67) की हत्या के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक, इस हत्याकांड की वजह करीब 32 बीघा जमीन का पुराना विवाद था। आरोप है कि कानपुर के ठेकेदार इंद्रजीत सिंह यादव ने अधिवक्ता की हत्या कराने के लिए 10 लाख रुपये की सुपारी दी थी।
पुलिस ने इस मामले में इंद्रजीत यादव सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वहीं, सुपारी लेने और हत्या की साजिश में प्रमुख भूमिका निभाने का आरोपी मोनू यादव अभी फरार है। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है।
32 बीघा जमीन से शुरू हुआ विवाद
पुलिस की जांच के अनुसार, गयादीन अहिरवार और इंद्रजीत यादव के बीच कदौरा क्षेत्र की करीब 32 बीघा जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद और मुकदमेबाजी चल रही थी। दोनों पक्ष इस जमीन पर अपना दावा कर रहे थे। इसी रंजिश को हत्या की साजिश की वजह बताया जा रहा है।
मीडिया रिपोर्टों में सामने आए घटनाक्रम के मुताबिक, जमीन से जुड़ा विवाद कई दशक पुराना था। समय के साथ संपत्ति के दावे और कानूनी लड़ाई आगे बढ़ती रही। पुलिस का आरोप है कि इसी विवाद के चलते अधिवक्ता को रास्ते से हटाने की योजना बनाई गई।
फाइल पर चर्चा के बहाने बुलाया, फिर कार में किया अगवा
रिपोर्टों के अनुसार, 31 अक्टूबर 2026 को गयादीन अहिरवार मुकदमे की सुनवाई के सिलसिले में उरई गए थे। इसके बाद वह कालपी लौटे। रास्ते में उन्हें फाइल और दस्तावेजों पर चर्चा करने तथा चाय पीने के बहाने कार में बैठाया गया।
पुलिस के मुताबिक, कार में पहले से कुछ लोग मौजूद थे। अधिवक्ता को उनके बेटे से अलग कर अगवा कर लिया गया। बाद में उन्हें कानपुर ले जाया गया, जहां उनकी हत्या कर शव नहर के पास फेंक दिया गया। शव कानपुर के सचेंडी क्षेत्र में मिलने की खबर सामने आई।
10 लाख की सुपारी और चार गिरफ्तारियां
पुलिस का दावा है कि इस हत्या को कॉन्ट्रैक्ट किलिंग के तौर पर अंजाम दिया गया। कथित तौर पर इंद्रजीत यादव ने मोनू यादव को 10 लाख रुपये में हत्या की सुपारी दी थी। मोनू ने अपने साथियों के साथ मिलकर वारदात को अंजाम देने की योजना बनाई।
अब तक गिरफ्तार किए गए आरोपियों में कथित साजिशकर्ता इंद्रजीत यादव, तथा हत्या में शामिल बताए जा रहे सर्वेश शुक्ला उर्फ सब्बू, आशीष विश्वकर्मा और केशव कटियार शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, सर्वेश और आशीष को मुठभेड़ के दौरान पैर में गोली लगी थी। कथित मुख्य शूटर मोनू यादव की तलाश जारी है।
मोबाइल चैट और कार से मिले अहम सुराग
पुलिस के अनुसार, आरोपियों के मोबाइल फोन से घटना से पहले और बाद की व्हाट्सऐप चैट मिली हैं। जांच एजेंसियां इन डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर कथित साजिश, आरोपियों के आपसी संपर्क और सुपारी के लेनदेन की कड़ियां जोड़ रही हैं।
पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल बताई गई स्विफ्ट डिजायर कार और खून से सना पाना/रिंच सहित कुछ सामान बरामद करने की बात कही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के संबंध में प्रकाशित जानकारी के मुताबिक, गयादीन अहिरवार के सिर पर गंभीर चोटें थीं और शरीर पर कई गहरे घाव मिले थे।
हत्या के खुलासे के बाद भी उठ रहे सवाल
पुलिस ने साजिश का खुलासा करने का दावा किया है, लेकिन घटना की पूरी कड़ी को लेकर कुछ सवाल अभी बाकी हैं। मीडिया रिपोर्टों में उल्लेख है कि अपहरण कालपी से हुआ, शव कानपुर में मिला और हत्या में इस्तेमाल कार कालपी के जंगल से बरामद हुई। ऐसे में पुलिस को कार की आवाजाही, सीसीटीवी फुटेज, टोल रिकॉर्ड और मोबाइल लोकेशन के जरिए यह स्पष्ट करना होगा कि शव को कहां और किस वाहन से ले जाया गया।
फरार आरोपी मोनू यादव की गिरफ्तारी और डिजिटल साक्ष्यों की जांच से इन सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है।
अधिवक्ताओं में आक्रोश, मुआवजे और सुरक्षा की मांग
बार एसोसिएशन अध्यक्ष की हत्या से अधिवक्ता समुदाय में नाराजगी है। रिपोर्टों के मुताबिक, कानपुर के वकीलों ने विरोध में न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय लिया और मृतक के परिवार को पांच करोड़ रुपये मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी तथा मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक अदालत में कराने जैसी मांगें उठाईं।
फिलहाल पुलिस फरार आरोपी की तलाश और मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। यह भी महत्वपूर्ण है कि सुपारी, साजिश और आरोपियों की भूमिका से जुड़े विवरण अभी पुलिस जांच के दावे हैं; अंतिम निष्कर्ष अदालत में साक्ष्यों और सुनवाई के बाद ही तय होंगे।