लखनऊ में गुरुवार को 2018 की 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने भाजपा प्रदेश कार्यालय के बाहर हल्ला बोला। अभ्यर्थी लंबे समय से लंबित अपनी मांगों पर फैसला चाहते हैं, इसलिए वे राजधानी की सड़कों पर उतर आए।
पुलिस मौके पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों को कार्यालय परिसर से हटाकर ईको गार्डेन भेज दिया। इससे कुछ देर के लिए वहां माहौल तनावपूर्ण रहा।
आरक्षण में गड़बड़ी दूर करने की मांग
अभ्यर्थियों का कहना है कि ओबीसी, दिव्यांग, भूतपूर्व सैनिक और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्रेणी के उम्मीदवारों को नियमानुसार आरक्षण का लाभ नहीं मिला। उनके बैनरों पर इन्हीं वर्गों को न्याय देने की मांग दर्ज थी।
प्रदर्शनकारियों ने राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की संस्तुति के अनुसार पात्र अभ्यर्थियों की नई सूची जारी करने की मांग रखी। उनका कहना है कि इस सूची के आधार पर ही नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए।
संशोधित परिणाम की मांग
अभ्यर्थियों ने 150 पूर्णांक में 60 अंक यानी 40 प्रतिशत को अर्हता मानते हुए संशोधित परिणाम जारी करने की मांग की। उनका तर्क है कि इस मानक से ही आरक्षित वर्ग के वास्तविक पात्र उम्मीदवारों की पहचान हो सकेगी।
अभ्यर्थियों ने साफ कहा कि पात्र उम्मीदवारों को जल्द नियुक्ति दी जानी चाहिए। कई अभ्यर्थी वर्षों से नियुक्ति के इंतजार में हैं।
कार्यालय परिसर में घुसने का दावा
कुछ अन्य रिपोर्टों के अनुसार करीब 50 अभ्यर्थी भाजपा साफा-पट्टी पहनकर सुरक्षा घेरा पार कर सीधे कार्यालय परिसर में घुस गए। ये अभ्यर्थी परिसर में जमीन पर लेटकर नारेबाजी करते रहे और सीटियां बजाते रहे।
यह घटनाक्रम करीब आधे घंटे तक चला, इसके बाद पुलिस ने उन्हें वहां से हटाया। हालांकि इस दावे की पुष्टि आधिकारिक रूप से नहीं हो सकी है।
आगे की राह
अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर फैसला नहीं लेती, आंदोलन जारी रहेगा। भर्ती से जुड़ा यह विवाद वर्षों से अदालतों और सड़कों पर उलझा हुआ है।