लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट में जनशिकायतों को गंभीरता से न लेने और उनके निस्तारण में लापरवाही बरतने के मामलों पर कार्रवाई जारी है। बुधवार, 4 नवंबर 2026 को पुलिस आयुक्त तरुण गाबा ने तीन दरोगाओं को लाइन हाजिर कर दिया। यह कार्रवाई ग्रामीण क्षेत्र के तीन अलग-अलग थानों और पुलिस चौकी में तैनात अधिकारियों पर की गई है।
किन तीन दरोगाओं पर हुई कार्रवाई?
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, कार्रवाई की जद में आए तीन उपनिरीक्षकों के नाम हैं:
1. प्रकाश सिंह — मलिहाबाद की मिर्जागंज पुलिस चौकी प्रभारी।
2. करन सिंह — रहीमाबाद थाने में तैनात दरोगा।
3. गिरीशदत्त पांडेय — माल थाने में तैनात दरोगा।
इन तीनों को जनशिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतने के आरोपों के बाद लाइन हाजिर किया गया है। पुलिस आयुक्त ने इनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के भी निर्देश दिए हैं।
IGRS और जनसुनवाई पर पुलिस प्रशासन का सख्त रुख
IGRS यानी Integrated Grievance Redressal System वह ऑनलाइन व्यवस्था है, जिसके जरिए नागरिक सरकारी विभागों और अधिकारियों से जुड़ी शिकायतें दर्ज कराते हैं। पुलिस विभाग में इन शिकायतों का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करना अधिकारियों की जिम्मेदारी है।
पुलिस प्रशासन का जोर है कि शिकायतकर्ता को थाने या चौकी के चक्कर न लगाने पड़ें और उसकी समस्या पर तय समय में कार्रवाई हो। इसी जिम्मेदारी में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्रशासनिक कदम उठाए जा रहे हैं।
पहले भी 12 दरोगाओं पर हुई थी कार्रवाई
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब लखनऊ पुलिस आयुक्त ने 31 अक्टूबर 2026 को 12 अन्य दरोगाओं को भी जनशिकायतों और IGRS मामलों के निस्तारण में लापरवाही के आरोपों पर लाइन हाजिर किया था। उस कार्रवाई में गोमतीनगर, चिनहट, गुडंबा, आलमबाग, मड़ियांव और अन्य क्षेत्रों के पुलिसकर्मी शामिल थे।
इस तरह कुछ ही दिनों के भीतर जनशिकायतों से जुड़े मामलों में कुल 15 दरोगाओं पर कार्रवाई की खबर सामने आई है। हालांकि, दोनों कार्रवाइयां अलग-अलग आदेशों के तहत हुई हैं।