उत्तर प्रदेश के कानपुर में दिव्यांग किशोरी से दुष्कर्म के करीब आठ साल पुराने मामले में अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। कानपुर देहात की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक) अदालत ने आरोपी दिनेश शर्मा को दोषी ठहराते हुए आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
यह मामला कानपुर नगर के शिवराजपुर थाना क्षेत्र के एक गांव का है। घटना मई 2018 की बताई गई है। अदालत ने पीड़िता के बयान, गवाहों की गवाही, पुलिस विवेचना और मेडिकल रिपोर्ट सहित अभियोजन पक्ष की ओर से पेश साक्ष्यों पर विचार करने के बाद फैसला सुनाया।
मई 2018 में हुई थी घटना
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मई 2018 में पीड़िता के परिजन घर से बाहर गए हुए थे। इसी दौरान गांव का रहने वाला दिनेश शर्मा कथित तौर पर घर में घुसा और किशोरी के साथ दुष्कर्म किया।
पीड़िता बोलने और सुनने में असमर्थ थी। परिजनों के घर लौटने पर उसने इशारों के माध्यम से अपनी मां को घटना की जानकारी दी। इसके बाद परिवार ने पुलिस से शिकायत की।
पीड़िता के चाचा की तहरीर पर 15 मई 2018 को शिवराजपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने आरोपी दिनेश शर्मा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बाद में विवेचना पूरी कर अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया गया।
गवाही और साक्ष्यों के आधार पर दोषी करार
मामले की सुनवाई कानपुर देहात की फास्ट ट्रैक अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष ने अपनी-अपनी दलीलें रखीं।
अदालत ने पीड़िता के बयान, गवाहों की गवाही, पुलिस की जांच और मेडिकल रिपोर्ट का परीक्षण किया। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, विशेष लोक अभियोजक अमर सिंह भदौरिया ने अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी की।
साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर विचार करने के बाद अदालत ने दिनेश शर्मा को दोषी ठहराया और उसे आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई।
एक लाख रुपये जुर्माना, नहीं देने पर अतिरिक्त जेल
अदालत ने दोषी को उम्रकैद के साथ ₹1 लाख का अर्थदंड भी लगाया है। आदेश के अनुसार, जुर्माना जमा नहीं करने की स्थिति में उसे एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
फैसला सुनाए जाने के बाद दोषी को न्यायिक अभिरक्षा में माती जेल भेज दिया गया।
पीड़िता को मुआवजा दिलाने के लिए भी आदेश
अदालत ने पीड़िता को क्षतिपूर्ति दिलाने के लिए संबंधित आदेश जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजने का निर्देश दिया है।
इसका उद्देश्य पीड़िता को नियमानुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाना है। मुआवजे की अंतिम राशि और भुगतान की स्थिति के बारे में उपलब्ध रिपोर्टों में विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है।
आठ साल बाद आया अदालत का फैसला
यह मामला मई 2018 में दर्ज हुआ था और अब अक्टूबर 2026 में अदालत ने दोषसिद्धि के बाद सजा सुनाई है। लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले में अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहियों को महत्वपूर्ण माना।
मामले में उम्रकैद की सजा के साथ आर्थिक दंड और पीड़िता को क्षतिपूर्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का आदेश भी दिया गया है।