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असम में म्यूल अकाउंट के जरिए साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क बेनकाब, छह गिरफ्तार; विदेशी कनेक्शन की जांच तेज

असम STF ने कथित तौर पर साइबर अपराध से जुटाई गई रकम को बैंक खातों के जरिए आगे पहुंचाने वाले नेटवर्क के छह सदस्यों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी अब खातों के इस्तेमाल, पैसों के लेन-देन और संभावित विदेशी संपर्कों की कड़ियां जोड़ रही है।

असम में म्यूल अकाउंट के जरिए साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क बेनकाब, छह गिरफ्तार; विदेशी कनेक्शन की जांच तेज
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

म्यूल अकाउंट के जरिए साइबर ठगी की रकम ठिकाने लगाने का आरोप
असम में साइबर अपराध से जुड़े कथित म्यूल बैंक अकाउंट नेटवर्क के खिलाफ स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने कार्रवाई करते हुए छह लोगों को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच के अनुसार, आरोपियों पर ऐसे बैंक खातों का इस्तेमाल करने का संदेह है, जिनके जरिए ऑनलाइन ठगी से हासिल रकम को एक खाते से दूसरे खाते में भेजा जाता था।

जांच एजेंसियों के लिए यह नेटवर्क इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि साइबर ठगी करने वाले कई गिरोह सीधे अपने नाम के बैंक खातों में पैसा नहीं लेते। इसके बजाय वे दूसरे लोगों के बैंक खाते, डिजिटल भुगतान सुविधाएं और फर्जी या किराये पर लिए गए वित्तीय माध्यम इस्तेमाल करते हैं। इस तरह ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में भेजकर उसके असली स्रोत और लाभार्थी तक पहुंचना मुश्किल बनाया जाता है।

क्या होता है म्यूल अकाउंट?
म्यूल अकाउंट (Mule Account) ऐसा बैंक खाता होता है, जिसका इस्तेमाल किसी अन्य व्यक्ति या गिरोह की ओर से अवैध धन प्राप्त करने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है।

कई मामलों में खाताधारक को कमीशन या पैसों का लालच देकर अपना खाता इस्तेमाल करने की अनुमति देने के लिए तैयार किया जाता है। कुछ मामलों में लोगों को नौकरी, ऑनलाइन कारोबार या आसान कमाई का झांसा देकर उनके बैंक दस्तावेज और खाते हासिल किए जाते हैं।

ऐसे खातों के जरिए साइबर ठगी की रकम कई स्तरों पर भेजी जा सकती है। इससे जांच एजेंसियों को यह पता लगाने में मुश्किल होती है कि पैसा किस अपराध से आया और आखिरकार किस व्यक्ति तक पहुंचा।

STF की जांच में विदेशी संपर्कों का पहलू
इस मामले में STF कथित विदेशी संपर्कों की भी पड़ताल कर रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि गिरफ्तार आरोपियों का संपर्क किसी अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध गिरोह से था या वे केवल स्थानीय स्तर पर बैंक खातों की व्यवस्था और रकम ट्रांसफर करने का काम कर रहे थे।

जांच एजेंसी के सामने कई अहम सवाल हैं:
- गिरफ्तार लोगों ने कितने बैंक खाते उपलब्ध कराए थे?
- इन खातों में कितनी संदिग्ध रकम जमा हुई?
- पैसा किन खातों और डिजिटल वॉलेट तक पहुंचाया गया?
- खाताधारकों को इसके बदले कितना कमीशन मिलता था?
- क्या नेटवर्क के तार विदेश में बैठे साइबर अपराधियों से जुड़े हैं?
इन सवालों के जवाब बैंकिंग रिकॉर्ड, डिजिटल लेन-देन और आरोपियों से पूछताछ के जरिए तलाशे जा रहे हैं।

छह गिरफ्तारियां, गुवाहाटी के अलग-अलग इलाकों में छापेमारी
STF ने इस मामले में कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में एक महिला भी शामिल है। उनकी पहचान इस प्रकार बताई गई है:
आरोपी उम्र गिरफ्तारी की जानकारी
मर्जिना बेगम 28 वर्ष 28 अक्टूबर
मोफिजुल हक 22 वर्ष 28 अक्टूबर
हिमांशु दास 19 वर्ष 28 अक्टूबर
रकीब हुसैन 34 वर्ष 29 अक्टूबर
इफ्तार हुसैन 25 वर्ष 30 अक्टूबर
अरमान अज़ुज़ हक 20 वर्ष 30 अक्टूबर

पुलिस के अनुसार, शुरुआती पूछताछ में मोफिजुल हक और हिमांशु दास से मिली जानकारी के आधार पर अन्य आरोपियों तक पहुंच बनाई गई। छापेमारी के दौरान मोबाइल फोन, लैपटॉप, अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड और कई दस्तावेज जब्त किए गए।

47 दिनों में SBI खाते में लाखों का संदिग्ध लेन-देन
जांच में गुवाहाटी निवासी मर्जिना बेगम के स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) खाते पर विशेष ध्यान गया। पुलिस के मुताबिक, 22 जून से 5 अगस्त 2026 के बीच यानी लगभग 47 दिनों में इस खाते में कई लाख रुपये जमा हुए।

जांचकर्ताओं को संदेह हुआ क्योंकि जमा की गई रकम कथित तौर पर थोड़े ही समय बाद निकाल ली जाती थी। इसी लेन-देन की पड़ताल से दूसरे आरोपियों और कथित नेटवर्क की जानकारी सामने आई। हालांकि, इस खाते में आई पूरी रकम का स्रोत और उससे जुड़े सभी लेन-देन अभी जांच का विषय हैं।

पाकिस्तान की खुफिया गतिविधियों से संभावित संबंधों की जांच
इस मामले का सबसे संवेदनशील पहलू कथित पाकिस्तान इंटेलिजेंस ऑपरेटिव्स (PIOs) से संभावित संबंध है। STF को केंद्रीय एजेंसियों और मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI), गजराज, तेजपुर से मिले इनपुट के बाद मामले की जांच सौंपी गई थी।

पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि संदिग्ध वित्तीय लेन-देन का संबंध किसी पाकिस्तान-आधारित खुफिया ऑपरेटिव से था या नहीं। साथ ही यह भी जांचा जा रहा है कि कहीं इस नेटवर्क का इस्तेमाल अन्य राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के लिए तो नहीं किया गया।

अभी यह केवल जांच का विषय है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों की भूमिका या किसी विदेशी ऑपरेटिव की संलिप्तता को साबित तथ्य के रूप में पेश करना सही नहीं होगा।

नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड असम से बाहर
STF की शुरुआती जांच में आशंका जताई गई है कि इस नेटवर्क का मुख्य संचालक असम से बाहर बैठकर दूसरे सदस्यों को निर्देश देता था। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह करीब दो वर्षों से देश के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय हो सकता है।

जांच एजेंसी अब अतिरिक्त बैंक खातों की पहचान, संदिग्ध रकम के प्रवाह और नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है। प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक, इस नेटवर्क से जुड़ी धोखाधड़ी की रकम कई करोड़ रुपये तक हो सकती है, लेकिन अभी तक कुल नुकसान का अंतिम आंकड़ा सामने नहीं आया है।