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BRICS मंच से ओम बिरला का सख्त संदेश, आतंकवाद को बताया वैश्विक चुनौती; बोले—साझा जिम्मेदारी से ही मिलेगी बड़ी चुनौतियों से राह

नई दिल्ली में 12वें BRICS Parliamentary Forum का आगाज; बिरला ने क्षेत्रीय संघर्ष, युद्ध, आर्थिक अस्थिरता और आतंकवाद के खिलाफ संवाद व अंतरराष्ट्रीय सहयोग को जरूरी बताया

BRICS मंच से ओम बिरला का सख्त संदेश, आतंकवाद को बताया वैश्विक चुनौती; बोले—साझा जिम्मेदारी से ही मिलेगी बड़ी चुनौतियों से राह
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

BRICS मंच पर आतंकवाद को लेकर भारत का स्पष्ट रुख

नई दिल्ली में सोमवार को शुरू हुए 12वें BRICS Parliamentary Forum 2026 में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आतंकवाद को लेकर भारत का स्पष्ट संदेश सामने रखा। संसद के ऐतिहासिक संविधान सदन में आयोजित फोरम के उद्घाटन के दौरान बिरला ने कहा कि दुनिया इस समय गहरी अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है और इस स्थिति में आतंकवाद, क्षेत्रीय संघर्ष, युद्ध, आर्थिक अस्थिरता, व्यापारिक तनाव और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं।

उन्होंने जोर दिया कि इन चुनौतियों का असर केवल किसी एक देश की सीमाओं तक सीमित नहीं रहता। इसलिए इनके समाधान के लिए साझा जिम्मेदारी, संवाद, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है।

यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत BRICS की संसदीय कूटनीति को आतंकवाद सहित साझा वैश्विक मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में देख रहा है।

12वें BRICS Parliamentary Forum का भारत में आयोजन

भारत की मेजबानी में 26 और 27 अक्टूबर 2026 को 12वां BRICS Parliamentary Forum आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम का आयोजन Samvidhan Sadan के Central Hall में हो रहा है।

इस सम्मेलन में BRICS के सदस्य देशों के साथ-साथ Partner Countries के संसदीय प्रतिनिधि भी हिस्सा ले रहे हैं। भारत की संसद के मुताबिक सम्मेलन में पीठासीन अधिकारी, सांसद, केंद्रीय मंत्री, राज्य विधानसभाओं के पीठासीन अधिकारी और अन्य वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।

फोरम की व्यापक थीम “Strengthening Parliaments for People-Centric Development” रखी गई है। चर्चा के चार प्रमुख आधार हैं—Resilience, Innovation, Cooperation और Sustainability।

आतंकवाद सिर्फ सुरक्षा का मुद्दा नहीं

ओम बिरला ने आतंकवाद को केवल कानून-व्यवस्था या किसी एक देश की सुरक्षा का विषय नहीं माना, बल्कि इसे वैश्विक चुनौती के व्यापक संदर्भ में रखा।

इससे पहले फोरम से पहले दिए गए अपने बयान में भी बिरला ने कहा था कि आतंकवाद दुनिया के लिए गंभीर चुनौती है और भारत लगातार इसके खिलाफ अपना रुख स्पष्ट करता रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई थी कि BRICS Parliamentary Forum में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा होगी।

भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ zero tolerance की नीति और आतंकवादियों तथा उनके समर्थकों के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई की जरूरत पर जोर देता रहा है।

सीमापार चुनौतियों पर सामूहिक प्रतिक्रिया की जरूरत

BRICS फोरम में आतंकवाद को लेकर चर्चा का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि समूह में अलग-अलग क्षेत्रों और राजनीतिक परिस्थितियों वाले देश शामिल हैं।

बिरला ने अपने उद्घाटन संबोधन में कहा कि आज की दुनिया में कई चुनौतियां राष्ट्रीय सीमाओं से आगे निकल जाती हैं। ऐसे में किसी एक देश की कोशिश पर्याप्त नहीं हो सकती।

यही कारण है कि उन्होंने dialogue, diplomacy और cooperation को ज्यादा महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार कठिन वैश्विक परिस्थितियों में देशों के बीच बातचीत और सहयोग का महत्व और बढ़ जाता है।

इस दृष्टिकोण का सीधा संबंध आतंकवाद से भी है, क्योंकि आतंकवादी नेटवर्क अक्सर एक से अधिक देशों में सक्रिय होते हैं और उनकी फंडिंग, भर्ती, डिजिटल नेटवर्क तथा लॉजिस्टिक गतिविधियां सीमा पार तक फैल सकती हैं।

BRICS में भारत आतंकवाद के मुद्दे को क्यों अहम मानता है?

भारत के लिए आतंकवाद लंबे समय से एक प्रमुख राष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दा रहा है। BRICS जैसे बहुपक्षीय मंच पर इस मुद्दे को उठाने से भारत का उद्देश्य केवल अपने अनुभव साझा करना नहीं, बल्कि सदस्य देशों के बीच व्यापक सहयोग को बढ़ावा देना भी है।

2025 में ब्राजील में हुए 11वें BRICS Parliamentary Forum के दौरान भी BRICS देशों की संसदों ने पहलगाम आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की थी और आतंकवाद के खिलाफ zero-tolerance approach के साथ सहयोग की बात कही थी।

इस पृष्ठभूमि में 2026 के फोरम में आतंकवाद पर जोर भारत की निरंतर संसदीय और कूटनीतिक प्राथमिकता को दर्शाता है।

बिरला ने संसदों की भूमिका पर भी दिया जोर

लोकसभा अध्यक्ष ने केवल सरकारों के स्तर पर सहयोग की बात नहीं की, बल्कि संसदों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया।

उनके अनुसार संसदीय संस्थाएं कानून बनाने, बजट प्रक्रिया, चर्चा और सरकारी कामकाज की निगरानी के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को वास्तविक कार्रवाई में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

उन्होंने कहा कि BRICS देशों के बीच संसदीय सहयोग से विभिन्न देशों को एक-दूसरे की व्यवस्थाओं और अनुभवों से सीखने का अवसर मिलेगा। इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है।

आतंकवाद के साथ कई और वैश्विक मुद्दे एजेंडे में

BRICS Parliamentary Forum का एजेंडा केवल आतंकवाद तक सीमित नहीं है।

फोरम में संस्थागत मजबूती, डिजिटल तकनीक, Artificial Intelligence, वैश्विक शासन में संसदीय सहयोग, टिकाऊ विकास और समावेशी विकास जैसे विषयों पर भी चर्चा होनी है।

यानी आतंकवाद को व्यापक वैश्विक चुनौतियों के एक हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। भारत का जोर इस बात पर है कि BRICS देश अलग-अलग क्षेत्रों में अपने अनुभव साझा करके साझा समस्याओं के समाधान की दिशा में आगे बढ़ें।

संयुक्त बयान पर भी नजर

BRICS Parliamentary Forum के दौरान Joint Statement पर भी सहमति बनाने की कोशिश हो रही है।

फोरम से पहले ओम बिरला ने उम्मीद जताई थी कि सदस्य देश सहमति के आधार पर संयुक्त घोषणा तक पहुंच सकते हैं। उन्होंने कहा था कि भारत की संसद भी अलग-अलग देशों के साथ संवाद के जरिए साझा मुद्दों पर consensus बनाने की कोशिश करती है।

यदि संयुक्त बयान में आतंकवाद पर मजबूत भाषा शामिल होती है, तो यह BRICS संसदीय सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण संकेत माना जा सकता है।

रूस के साथ भी आतंकवाद पर चर्चा

BRICS Forum से पहले ओम बिरला ने रूस की State Duma के Chairman Vyacheslav Volodin के साथ भी बातचीत की। दोनों पक्षों ने संसदीय सहयोग और भारत-रूस संबंधों के साथ-साथ आतंकवाद से निपटने में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और concerted efforts की जरूरत पर चर्चा की।

बिरला ने आतंकवाद के मुद्दे पर रूस के समर्थन की भी सराहना की।

इससे संकेत मिलता है कि भारत BRICS के व्यापक संसदीय संवाद के साथ-साथ अलग-अलग सदस्य देशों के साथ द्विपक्षीय स्तर पर भी आतंकवाद विरोधी सहयोग को महत्व दे रहा है।

भारत का संदेश: आतंकवाद के खिलाफ सहयोग जरूरी

ओम बिरला का BRICS मंच से दिया गया संदेश भारत के उस व्यापक रुख के अनुरूप है जिसमें आतंकवाद को किसी एक क्षेत्र या देश की समस्या मानने के बजाय साझा वैश्विक चुनौती के रूप में देखा जाता है।

आज आतंकवाद का स्वरूप भी बदल रहा है। पारंपरिक आतंकी नेटवर्क के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन कट्टरपंथ, अवैध वित्तीय नेटवर्क और सीमा पार सहयोग जैसी चुनौतियां सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई समस्याएं पैदा कर रही हैं।

ऐसे में संसदीय स्तर पर देशों के बीच कानून, संस्थागत व्यवस्थाओं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर चर्चा का महत्व बढ़ जाता है।

अब आगे क्या?

12वें BRICS Parliamentary Forum की चर्चा 27 अक्टूबर तक जारी रहेगी। अब नजर इस बात पर है कि सदस्य और partner countries के प्रतिनिधि आतंकवाद समेत साझा वैश्विक चुनौतियों पर किस तरह की सहमति बनाते हैं और अंतिम Joint Statement में किन मुद्दों को जगह मिलती है।

फिलहाल ओम बिरला का संदेश स्पष्ट है—वैश्विक चुनौतियों का समाधान अकेले नहीं, बल्कि संवाद, कूटनीति और सामूहिक सहयोग से तलाशना होगा। आतंकवाद इसी साझा वैश्विक जिम्मेदारी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।