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दिल्ली की वोटर लिस्ट पर बड़ा अपडेट, Form-6 के 4.56 लाख आवेदन पहुंचे; 1.15 लाख निपटाए गए

SIR के तहत नए नाम जोड़ने और छूटे मतदाताओं के लिए बड़ी संख्या में दावे मिले हैं; 20 अक्टूबर तक 4,56,913 Form-6 आवेदन दर्ज हुए, जबकि अंतिम वोटर लिस्ट 4 दिसंबर को जारी होनी है।

दिल्ली की वोटर लिस्ट पर बड़ा अपडेट, Form-6 के 4.56 लाख आवेदन पहुंचे; 1.15 लाख निपटाए गए
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

दिल्ली की वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनावी प्रक्रिया अब अहम चरण में पहुंच गई है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, 20 अक्टूबर तक Form-6 के कुल 4,56,913 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें ऐसे पात्र नागरिक शामिल हैं जो पहली बार मतदाता के रूप में नाम जुड़वाना चाहते हैं या जिनका नाम मौजूदा ड्राफ्ट मतदाता सूची में नहीं है।

इन कुल आवेदनों में 2,12,400 आवेदन 30 अगस्त तक प्राप्त हुए थे, जबकि 2,44,513 आवेदन 31 अगस्त से 20 अक्टूबर के बीच आए। यानी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद भी बड़ी संख्या में लोगों ने मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए Form-6 दाखिल किया है।

हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि 4.56 लाख आवेदन मिलने का मतलब 4.56 लाख नाम वोटर लिस्ट में जुड़ जाना नहीं है। चुनाव अधिकारियों के मुताबिक, 31 अगस्त से 20 अक्टूबर के बीच करीब 1.15 लाख Form-6 आवेदनों का निपटारा किया गया था। अधिकारियों ने यह भी बताया कि ये आंकड़े अभी provisional हैं, क्योंकि सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों का डेटा एक साथ अपडेट नहीं हुआ है।

Form-6 आखिर किसके लिए है?

Form-6 का इस्तेमाल पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए किया जाता है। इसमें पहली बार वोटर बनने वाले लोग और ऐसे पात्र नागरिक भी आवेदन कर सकते हैं जिनका नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में मौजूद नहीं है। चुनाव आयोग के नागरिक सेवा पोर्टल पर भी Form-6 को नए मतदाता के पंजीकरण के लिए निर्धारित किया गया है।

दिल्ली में चल रही SIR प्रक्रिया के दौरान यह फॉर्म उन लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण हो गया है जिनके नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं दिखाई दिए। ऐसे पात्र नागरिक निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना दावा दाखिल कर सकते हैं और जरूरी दस्तावेजों के सत्यापन के बाद उनका नाम अंतिम सूची में शामिल किया जा सकता है।

ड्राफ्ट लिस्ट में 47.5 लाख नाम क्यों हटे?

दिल्ली की SIR प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण और विवादित हिस्सा ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से करीब 47.5 लाख नामों का बाहर होना रहा है। 31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट सूची में कुल 97.53 लाख मतदाता दर्ज थे, जबकि पुनरीक्षण शुरू होने से पहले यह संख्या करीब 1.45 करोड़ थी।

चुनाव अधिकारियों के मुताबिक, बाहर किए गए नामों को Absent, Shifted, Dead और Duplicate (ASDD) जैसी श्रेणियों में रखा गया। इनमें करीब 43.3 लाख लोग अनुपस्थित या स्थायी रूप से स्थानांतरित, करीब 2.82 लाख मृत और करीब 1.41 लाख नाम duplicate श्रेणी में बताए गए हैं।

हालांकि, किसी नाम का ड्राफ्ट सूची में नहीं होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि संबंधित व्यक्ति हमेशा के लिए मतदाता सूची से बाहर हो गया है। पात्र व्यक्ति तय प्रक्रिया के तहत Form-6 के जरिए अपना नाम शामिल कराने का दावा कर सकता है।

छूटे हुए मतदाताओं की दोबारा जांच भी जारी

बड़ी संख्या में नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर होने के बाद दिल्ली के चुनाव अधिकारियों ने door-to-door verification पर भी जोर दिया है। Booth Level Officers यानी BLOs को ऐसे मामलों की दोबारा जांच करने और पात्र लेकिन छूटे हुए लोगों की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं।

हालिया निर्देशों के अनुसार BLOs को अपने क्षेत्र में ऐसे पात्र लोगों की पहचान करने और जरूरत पड़ने पर Form-6 के जरिए उनके नामांकन में मदद करने को कहा गया है। अधिकारियों ने यह भी निर्देश दिया है कि भौतिक रूप से जमा किए गए Form-6 आवेदन को स्वीकार करने से इनकार न किया जाए और उन्हें समय पर digitise किया जाए।

इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई पात्र मतदाता केवल प्रशासनिक या दस्तावेजी समस्या के कारण अंतिम मतदाता सूची से बाहर न रह जाए।

33.12 लाख मामलों पर भी चल रही कार्रवाई

SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के रिकॉर्ड में non-mapping या logical discrepancies भी सामने आई हैं। ऐसे मामलों में चुनाव अधिकारियों की ओर से करीब 33.12 लाख notices जारी किए गए थे।

अधिकारियों के अनुसार, इनमें से 80 फीसदी से ज्यादा मामलों का समाधान किया जा चुका है। जिन मामलों में अतिरिक्त दस्तावेजों या जानकारी की जरूरत है, वहां BLOs घर-घर जाकर संबंधित मतदाताओं से दस्तावेज जुटा रहे हैं।

इस पूरी प्रक्रिया का सीधा संबंध अंतिम वोटर लिस्ट से है, क्योंकि किसी मतदाता का नाम अंतिम सूची में तभी शामिल होगा जब उसके दावे और दस्तावेजों की आवश्यक जांच पूरी हो जाए।

Form-7 और Form-8 के आवेदन भी मिले

मतदाता सूची में सिर्फ नए नाम जोड़ने के आवेदन ही नहीं आए हैं। 31 अगस्त से 20 अक्टूबर के बीच 14,911 Form-7 आवेदन भी प्राप्त हुए, जिनका इस्तेमाल किसी नाम को हटाने पर आपत्ति दर्ज कराने या मौजूदा नाम हटाने के लिए किया जाता है।

इसी अवधि में 93,036 Form-8 आवेदन भी आए। Form-8 का इस्तेमाल मतदाता सूची में सुधार और अन्य अनुमत बदलावों के लिए किया जाता है। इससे पता चलता है कि SIR के दौरान दिल्ली में मतदाता सूची से जुड़े नाम जोड़ने, हटाने और सुधार—तीनों तरह के आवेदन बड़ी संख्या में सामने आ रहे हैं।

30 अक्टूबर तक दावा करने का मौका

चुनाव अधिकारियों ने पात्र नागरिकों से समय रहते आवेदन करने की अपील की है। मौजूदा प्रक्रिया में 30 अक्टूबर तक आवेदन और दावे लिए जाने हैं। इसके बाद 31 अक्टूबर से 30 नवंबर तक प्राप्त दावों और आवेदनों के निपटारे पर मुख्य रूप से ध्यान दिया जाएगा।

इसका मतलब है कि जिन पात्र नागरिकों को लगता है कि उनका नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं है, उनके लिए समय बेहद महत्वपूर्ण है। आवेदन दाखिल करने के साथ जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराना भी प्रक्रिया का अहम हिस्सा है।

अंतिम वोटर लिस्ट कब आएगी?

दिल्ली की final electoral roll 4 दिसंबर 2026 को प्रकाशित होने वाली है। इसलिए आने वाले हफ्तों में Form-6 आवेदनों की जांच, दस्तावेजों का सत्यापन और लंबित मामलों का निपटारा चुनाव अधिकारियों के लिए सबसे बड़ा काम होगा।

अंतिम सूची आने से पहले यह भी महत्वपूर्ण होगा कि कितने आवेदनों को मंजूरी मिलती है, कितने मामलों में अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जाते हैं और कितने आवेदन नियमों के तहत खारिज होते हैं।

अब सबसे ज्यादा नजर किस पर रहेगी?

अब दिल्ली की चुनावी प्रक्रिया में सबसे ज्यादा नजर Form-6 आवेदनों के निपटारे, ASDD श्रेणी में बाहर किए गए नामों की दोबारा जांच और 33.12 लाख notice मामलों के समाधान पर रहेगी।

एक तरफ चुनाव अधिकारी यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि पात्र नागरिकों का नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल हो, वहीं दूसरी तरफ SIR का उद्देश्य अपात्र, मृत, स्थानांतरित या duplicate entries को हटाकर मतदाता सूची को अपडेट करना है। चुनाव आयोग ने SIR का व्यापक उद्देश्य ही यह बताया है कि कोई पात्र नागरिक छूटे नहीं और कोई अपात्र व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल न रहे।

कुल मिलाकर, दिल्ली की वोटर लिस्ट को लेकर सामने आए 4.56 लाख Form-6 आवेदन इस समय पूरी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन इन आंकड़ों को सीधे नए मतदाताओं की संख्या नहीं माना जा सकता। असली तस्वीर दिसंबर में जारी होने वाली अंतिम मतदाता सूची से साफ होगी। तब पता चलेगा कि कितने दावों को मंजूरी मिली, कितने नाम वापस जोड़े गए और SIR के बाद दिल्ली की मतदाता सूची का अंतिम आकार क्या रहा।