पटना/नई दिल्ली। नकली भारतीय करेंसी नोटों की तस्करी के कथित नेटवर्क के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने तीन राज्यों में एक साथ बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के आठ ठिकानों पर छापेमारी कर डिजिटल उपकरण, संदिग्ध दस्तावेज और बांग्लादेशी मुद्रा समेत कई सामान जब्त किए हैं।
यह कार्रवाई बिहार के औरंगाबाद जिले में नकली भारतीय नोट बरामद होने के मामले में की गई। NIA अब जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की जांच के जरिए कथित तस्करी नेटवर्क के अन्य सदस्यों और उसके संभावित संपर्कों का पता लगाने में जुटी है।
तीन राज्यों में कहां-कहां हुई छापेमारी?
NIA ने 4 नवंबर 2026 को अलग-अलग टीमों के जरिए आठ स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। स्थानों का विवरण इस प्रकार है:
राज्य जिला ठिकानों की संख्या
बिहार औरंगाबाद 2
बिहार गया 3
झारखंड हजारीबाग 2
पश्चिम बंगाल मालदा 1
कुल 3 राज्य 8
इन ठिकानों पर तलाशी का उद्देश्य नकली नोटों की बरामदगी से जुड़े लोगों, संपर्कों और कथित तस्करी के रास्तों के बारे में सबूत जुटाना था।
औरंगाबाद से मिले थे ₹2.48 लाख के नकली नोट
यह मामला बिहार के औरंगाबाद जिले के मदनपुर थाना क्षेत्र में नकली भारतीय करेंसी नोट मिलने के बाद शुरू हुआ था। वहां से कुल ₹2,48,500 अंकित मूल्य के जाली नोट बरामद किए गए थे।
इस बरामदगी के बाद 15 अगस्त 2026 को मदनपुर थाने में FIR दर्ज की गई। शुरुआती मामले में चार लोगों को आरोपी बनाया गया:
- सुरेंद्र कुमार
- विजय यादव
- रंजन
- प्रदीप साव उर्फ प्रदीप कुमार साव
बाद में मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश पर NIA ने जांच अपने हाथ में ले ली।
18 अक्टूबर को NIA ने अपने हाथ में ली जांच
NIA ने 18 अक्टूबर 2026 को इस मामले को दोबारा दर्ज कर जांच शुरू की। एजेंसी के अनुसार, शुरुआती जांच में आरोपियों की कथित तौर पर जाली भारतीय करेंसी नोटों की तस्करी में संलिप्तता सामने आई है।
अब जांच का दायरा केवल नकली नोट बरामद होने तक सीमित नहीं है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि नोट कहां से आए, किन लोगों के जरिए इनकी आपूर्ति की जा रही थी और क्या इस नेटवर्क के तार दूसरे राज्यों या सीमा पार के संपर्कों से जुड़े हैं।
छापेमारी में क्या-क्या मिला?
तलाशी के दौरान NIA ने कई महत्वपूर्ण सामान जब्त किए हैं:
- मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरण।
- आपत्तिजनक दस्तावेज।
- बांग्लादेशी मुद्रा।
- जांच से संबंधित अन्य सामग्री।
इन उपकरणों और दस्तावेजों की फॉरेंसिक तथा डिजिटल जांच की जाएगी। इससे कथित नेटवर्क के संपर्कों, लेनदेन और गतिविधियों से जुड़ी जानकारी मिलने की संभावना है।
हालांकि, बांग्लादेशी मुद्रा की बरामदगी अपने आप में सीमा पार तस्करी का प्रमाण नहीं है। इस मुद्रा का नकली नोटों के नेटवर्क से क्या संबंध है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
अब NIA की जांच में क्या होगा?
एजेंसी की अगली प्राथमिकता कथित नेटवर्क के पूरे ढांचे का पता लगाना है। इसमें नकली नोटों के स्रोत, उनकी छपाई या आपूर्ति, परिवहन और वितरण से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच शामिल हो सकती है।
फिलहाल NIA ने छापेमारी के बाद किसी नए बड़े नेटवर्क का पूरा विवरण या सभी संदिग्धों की गिरफ्तारी की घोषणा नहीं की है। इसलिए इस कार्रवाई को जांच का महत्वपूर्ण चरण माना जा सकता है, लेकिन नेटवर्क का पूरा खुलासा अभी बाकी है।