उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में महिला डॉक्टरों और कर्मचारियों के कथित उत्पीड़न तथा धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने से जुड़े मामलों में अब शासन स्तर पर कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की जांच रिपोर्ट के आधार पर राज्य के चिकित्सा शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालय प्रशासन को रिपोर्ट में चिह्नित डॉक्टरों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
शासन ने KGMU प्रशासन से यह भी कहा है कि संबंधित लोगों के खिलाफ की गई कार्रवाई का विस्तृत ब्योरा सरकार को उपलब्ध कराया जाए। यह निर्देश 30 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र के माध्यम से दिया गया। मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय परिसर में प्रशासनिक जवाबदेही और महिला कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
STF की रिपोर्ट के बाद शासन का कदम
मामले की जांच उत्तर प्रदेश STF ने की थी। एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट 25 अगस्त 2026 को शासन को सौंपी थी। इसके बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग ने KGMU के कुलसचिव को पत्र भेजकर रिपोर्ट में नामित कर्मचारियों के खिलाफ KGMU अधिनियम, 2002 और KGMU परिनियमावली, 2011 के तहत आवश्यक कार्रवाई शुरू करने को कहा।
शासन ने केवल कार्रवाई के निर्देश ही नहीं दिए, बल्कि विश्वविद्यालय से इस पूरे मामले में की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है। इस पत्र की एक प्रति KGMU के कुलपति को भी भेजी गई है।
किन विभागों से जुड़े मामलों की जांच हुई?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, STF की जांच में KGMU के कई विभागों से जुड़ी शिकायतों का उल्लेख किया गया है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- पैथोलॉजी विभाग
- गांधी वार्ड
- माइक्रोबायोलॉजी विभाग
- रेडियोलॉजी विभाग
रिपोर्ट में महिला रेजिडेंट डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य महिला कर्मचारियों की ओर से लगाए गए उत्पीड़न, अनुचित व्यवहार तथा धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने के आरोपों का जिक्र है।
कुछ मामलों में शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई नहीं करने और कथित तौर पर आरोपित कर्मचारियों को संरक्षण देने के आरोप भी जांच रिपोर्ट में दर्ज बताए गए हैं। हालांकि, रिपोर्ट में जिन लोगों का नाम आया है, उनकी व्यक्तिगत भूमिका और आरोपों की सत्यता का निर्धारण अलग-अलग जांच और कानूनी प्रक्रिया से होगा।
रेजिडेंट डॉक्टर रमीज का मामला भी रिपोर्ट में शामिल
इस प्रकरण में पैथोलॉजी विभाग के रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. रमीज से जुड़ा मामला भी प्रमुखता से सामने आया है।
रिपोर्टों के अनुसार, एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर ने उन पर संबंध में फंसाने, धर्म परिवर्तन और शादी के लिए दबाव बनाने तथा उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। इस मामले में 23 दिसंबर 2025 को लखनऊ के चौक थाने में मुकदमा दर्ज होने की जानकारी दी गई है।
डॉ. रमीज को 9 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ दर्ज मामले की जांच जारी होने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है। आरोपों के संबंध में अंतिम निर्णय अदालत की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगा।
महिला कर्मचारियों की शिकायतों पर भी उठे सवाल
STF की रिपोर्ट में केवल डॉक्टरों से जुड़े मामलों का ही उल्लेख नहीं है। इसमें नर्सिंग स्टाफ और अन्य महिला कर्मचारियों की शिकायतों को भी शामिल किए जाने की जानकारी सामने आई है।
रिपोर्टों के अनुसार, कुछ शिकायतकर्ताओं ने सहकर्मियों पर अनुचित व्यवहार, मानसिक उत्पीड़न और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने के आरोप लगाए थे। माइक्रोबायोलॉजी विभाग में संविदा पर कार्यरत एक महिला कर्मचारी की शिकायत और उसके बाद गठित जांच समिति का भी उल्लेख किया गया है।
कुछ मामलों में शिकायत करने वाली महिलाओं को ही परेशानी उठानी पड़ी और शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के आरोप लगाए गए हैं। STF ने इन शिकायतों के निपटारे और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों और विभागीय जिम्मेदारी की भी जांच
इस पूरे प्रकरण में जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि शिकायतें सामने आने के बाद विश्वविद्यालय के संबंधित अधिकारियों ने क्या कदम उठाए थे।
STF रिपोर्ट में कुछ वरिष्ठ डॉक्टरों और विभागीय जिम्मेदार पदों पर तैनात कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठाए जाने की खबरें हैं। आरोप है कि कुछ शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई में देरी हुई।
अब शासन के निर्देश के बाद KGMU प्रशासन को यह देखना होगा कि किन कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की जाए, किन मामलों में पहले से कार्रवाई हुई है और किन शिकायतों पर आगे कानूनी कदम उठाने की जरूरत है।
KGMU प्रशासन ने क्या कहा?
KGMU के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. केके सिंह ने PTI को बताया कि संस्थान इस मामले की समीक्षा कर रहा है और शासन के निर्देशों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
इस बयान से स्पष्ट है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को शासन का पत्र मिल चुका है और मामले पर समीक्षा की जा रही है। हालांकि, 31 अक्टूबर तक उपलब्ध रिपोर्टों में सभी संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ अंतिम विभागीय कार्रवाई पूरी होने की पुष्टि नहीं हुई है।
अब आगे क्या होगा?
शासन के निर्देश के बाद KGMU प्रशासन के सामने कई अहम कदम होंगे:
1. STF रिपोर्ट में नामित प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका की समीक्षा।
2. संबंधित डॉक्टरों और कर्मचारियों से जवाब तलब करना।
3. जरूरत के अनुसार विभागीय जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करना।
4. महिला शिकायतकर्ताओं की शिकायतों और पहले हुई जांच की स्थिति की समीक्षा।
5. शासन को कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट सौंपना।
इस मामले में आगे की कार्रवाई यह तय करेगी कि किन लोगों के खिलाफ विभागीय स्तर पर कदम उठाए जाते हैं और किन मामलों में पुलिस जांच या अदालत की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।