32 घंटे बाद खत्म हुआ किसान पथ पर केमिकल रिसाव का संकट
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के किसान पथ पर फॉर्मेलिन से भरे टैंकर के पलटने के बाद शुरू हुआ राहत और बचाव अभियान करीब 32 घंटे बाद बुधवार, 28 अक्टूबर की तड़के समाप्ति के अहम पड़ाव पर पहुंचा। अधिकारियों के मुताबिक, सड़क पर फैले रसायन को करीब सुबह 3 बजे निष्क्रिय कर दिया गया। इसके बाद प्रभावित मिट्टी को सुरक्षित तरीके से हटाने और निस्तारित करने की प्रक्रिया पर ध्यान दिया गया।
यह हादसा बख्शी का तालाब (BKT) क्षेत्र में मानपुर-बाना अंडरपास के पास हुआ था। टैंकर पलटने के बाद फॉर्मेलिन सड़क पर फैल गया, जिसके प्रभाव से आसपास के लोगों और वहां से गुजरने वाले यात्रियों ने आंखों में जलन तथा सांस लेने में परेशानी की शिकायत की। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस, दमकल विभाग, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और स्थानीय लोगों ने मिलकर लगातार अभियान चलाया।
कैसे पलटा टैंकर और सड़क पर फैल गया रसायन?
प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, सोमवार, 26 अक्टूबर की शाम किसान पथ पर मानपुर-बाना अंडरपास के पास फॉर्मेलिन से भरा टैंकर पलट गया। शुरुआती जानकारी में टायर फटने को दुर्घटना की वजह बताया गया। टैंकर हरदोई के संडीला से लखनऊ के गुडंबा स्थित एक प्लाईवुड फैक्ट्री की ओर जा रहा था।
टैंकर पलटने के बाद उसमें भरा रसायन सड़क पर फैलने लगा। फॉर्मेलिन, फॉर्मल्डिहाइड का जलीय घोल है, जिसका इस्तेमाल औद्योगिक प्रक्रियाओं और अन्य कार्यों में किया जाता है। इसके संपर्क या वाष्प के कारण आंखों, नाक और गले में जलन हो सकती है। अधिक संपर्क होने पर खांसी, मतली और सांस लेने में परेशानी भी हो सकती है।
रसायन फैलने की सूचना मिलने के बाद आपातकालीन टीमें मौके पर पहुंचीं। प्रभावित सड़क पर बैरिकेडिंग की गई और यातायात को दूसरे रास्तों से निकालने की व्यवस्था की गई, ताकि लोग अनजाने में रसायन के संपर्क में न आएं।
मिट्टी डालने के बाद भी क्यों जारी रखना पड़ा अभियान?
रिसाव के बाद सड़क पर फैले रसायन को नियंत्रित करना आसान नहीं था। शुरुआती चरण में रसायन को ढकने और उसके प्रभाव को कम करने के लिए प्रभावित हिस्से पर मिट्टी डाली गई। टैंकर में बचे रसायन को दूसरे टैंकर में स्थानांतरित करने और दुर्घटनाग्रस्त वाहन को हटाने का काम भी किया गया।
लेकिन समस्या यह थी कि जब रसायन से प्रभावित मिट्टी को हटाया या हिलाया जाता, तो उसकी गंध और जलन पैदा करने वाला प्रभाव फिर महसूस होने लगता था। इसी वजह से अभियान को सावधानीपूर्वक आगे बढ़ाना पड़ा। राहत कार्य में लगे कर्मियों को पूरे चेहरे को ढकने वाले मास्क जैसे सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करना पड़ा।
अधिकारियों ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) से वैज्ञानिक सहायता ली, ताकि रसायन को निष्क्रिय करने और प्रभावित सामग्री के सुरक्षित निस्तारण की प्रक्रिया उचित तरीके से पूरी की जा सके।
NDRF, SDRF और स्थानीय लोगों ने मिलकर संभाला मोर्चा
इस अभियान में पुलिस और स्थानीय प्रशासन के साथ NDRF तथा SDRF की टीमें भी शामिल रहीं। प्रभावित हिस्से को सुरक्षित रखने, लोगों की आवाजाही नियंत्रित करने और सड़क पर फैले रसायन के असर को कम करने के लिए लगातार काम किया गया।
राहत अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह सुनिश्चित करना था कि रसायन केवल एक जगह से हटाकर किसी दूसरे क्षेत्र में नया खतरा न पैदा करे। इसके लिए दूषित मिट्टी को खुले में छोड़ने के बजाय बंद वाहन में भरकर सुरक्षित निस्तारण के लिए भेजने की व्यवस्था की गई।
हिन्दुस्तान टाइम्स और टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, दूषित मिट्टी को कानपुर देहात स्थित एक अधिकृत अपशिष्ट उपचार, भंडारण और निस्तारण सुविधा तक ले जाने की योजना बनाई गई। इस व्यवस्था का उद्देश्य रसायन से प्रभावित सामग्री का सुरक्षित तरीके से निपटान करना था।
आसपास के गांवों में लोगों को हुई परेशानी
रिसाव का प्रभाव केवल दुर्घटनास्थल तक सीमित नहीं रहा। आसपास के गांवों और BKT क्षेत्र के कुछ लोगों ने आंखों में जलन, पानी आने, अजीब गंध महसूस होने और सांस लेने में परेशानी की शिकायत की।
मंगलवार को भी दुर्घटनास्थल से करीब 500 मीटर के दायरे में कुछ लोगों ने आंखों में जलन महसूस होने की बात कही, हालांकि पहले दिन के मुकाबले प्रभाव कम होने की सूचना थी। इससे स्पष्ट हुआ कि रसायन को निष्क्रिय करने के साथ-साथ प्रभावित इलाके की निगरानी बनाए रखना भी जरूरी था।
स्वास्थ्य संबंधी परेशानी महसूस करने वाले लोगों को चिकित्सा सहायता लेने की सलाह दी गई। ऐसे रसायनों के संपर्क में आने पर आंखों या त्वचा में जलन अथवा सांस लेने में परेशानी हो तो प्रभावित स्थान से दूर जाना और चिकित्सकीय सलाह लेना महत्वपूर्ण है।
किसान पथ की सड़क कब खुलेगी?
रिसाव निष्क्रिय होने के बाद भी यातायात व्यवस्था से जुड़ा सवाल बना रहा। राहत अभियान के दौरान किसान पथ की एक लेन और उससे जुड़ी सर्विस रोड को बंद रखा गया था। इसका उद्देश्य वाहन चालकों को प्रभावित क्षेत्र से दूर रखना और बचाव दलों को काम करने के लिए सुरक्षित जगह देना था।
29 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्ट में सड़क का बंद हिस्सा पूरी तरह खोलने के समय की पुष्टि नहीं की गई थी। इसलिए यह मान लेना सही नहीं होगा कि रसायन निष्क्रिय होते ही पूरा मार्ग सामान्य यातायात के लिए खोल दिया गया।
सड़क को पूरी तरह खोलने से पहले प्रभावित हिस्से की सुरक्षा, दूषित मिट्टी को हटाने और आवश्यक जांच पूरी करना जरूरी है। यात्रियों को यात्रा से पहले स्थानीय प्रशासन या यातायात पुलिस की ताजा सूचना देखनी चाहिए।
अब आगे क्या होगा?
करीब 32 घंटे तक चले अभियान के बाद फॉर्मेलिन को निष्क्रिय किया जाना राहत की बड़ी खबर है। लेकिन इस घटना का अंतिम चरण दूषित मिट्टी का सुरक्षित निस्तारण, प्रभावित क्षेत्र की निगरानी और यातायात को सामान्य बनाने से जुड़ा है।
प्रशासन के सामने यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है कि सड़क पर बचा हुआ रसायन या दूषित सामग्री दोबारा लोगों के संपर्क में न आए। साथ ही, टैंकर पलटने के कारण और परिवहन से जुड़े सुरक्षा मानकों की जांच भी महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल राहत यह है कि फैले हुए रसायन को निष्क्रिय करने का अभियान पूरा हो चुका है। हालांकि, सड़क कब पूरी तरह खुलेगी और दुर्घटना से जुड़ी जांच में क्या निष्कर्ष निकलेंगे, इसकी पुष्टि संबंधित अधिकारियों के आगे के अपडेट से ही होगी।