उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में निवेश के नाम पर कथित धोखाधड़ी के दो मामले सामने आए हैं। शिकायतों के मुताबिक, पांच लोगों से कुल करीब ₹52 लाख की रकम ली गई। एक मामले में शेयर ट्रेडिंग और क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के लिए सॉफ्टवेयर तैयार करने का दावा किया गया, जबकि दूसरे मामले में जमीन दिलाने के नाम पर रकम लेने के बावजूद रजिस्ट्री नहीं कराए जाने का आरोप है।
दोनों मामले अलग-अलग थानों तक पहुंचे हैं। शिकायतकर्ताओं ने रकम वापस न मिलने की बात कही है और पुलिस से कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल आरोपों की जांच जारी है; किसी आरोपी की दोषसिद्धि मानकर चलना उचित नहीं होगा।
पहला मामला: ट्रेडिंग और क्रिप्टो सॉफ्टवेयर के नाम पर ₹30 लाख देने का आरोप
रिपोर्ट के अनुसार, जानकीपुरम सेक्टर-सी निवासी कारोबारी गौतम तिवारी ने शिकायत में आरोप लगाया कि ऐश्वर्य उपाध्याय और उसके परिजनों पुरेंदु तथा निशा ने शेयर ट्रेडिंग और क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के लिए सॉफ्टवेयर तैयार करने तथा उससे मुनाफा दिलाने का दावा किया था।
शिकायत में गौतम तिवारी के साथ उनके परिचित वर्तुल अवस्थी, रामानुज और अमृता के निवेश का भी उल्लेख है। आरोप है कि समूह ने इस प्रस्ताव पर भरोसा करके कुल करीब ₹30 लाख दिए, लेकिन न तो वादा किया गया मुनाफा मिला और न ही मूल रकम वापस हुई।
इस मामले में मुख्य सवाल यह है कि निवेश के लिए रकम किस शर्त पर ली गई, क्या कोई लिखित समझौता या सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराया गया और धन का इस्तेमाल कहां हुआ। इन सवालों का जवाब बैंक लेनदेन, डिजिटल बातचीत, दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के बयानों की जांच से ही सामने आ सकता है।
दूसरा मामला: जमीन खरीदने के लिए दिए ₹22 लाख, रजिस्ट्री नहीं होने का आरोप
दूसरी शिकायत में हसेमऊ निवासी मनोज कुमार मिश्रा ने आरोप लगाया कि उन्होंने 20 मार्च को गोंडा के तीन लोगों को जमीन खरीदने के लिए करीब ₹22 लाख दिए थे। शिकायत के मुताबिक, रकम देने के बावजूद जमीन की रजिस्ट्री पूरी नहीं कराई गई। इस मामले में भी पुलिस से शिकायत की गई है।
जमीन से जुड़े ऐसे विवादों में यह पता लगाना जरूरी होता है कि संबंधित भूखंड का वास्तविक मालिक कौन है, क्या जमीन का कोई वैध बिक्री समझौता हुआ था, भुगतान किस खाते या माध्यम से किया गया और रजिस्ट्री न होने की वजह क्या बताई गई। जांच के दौरान इन दस्तावेजों और लेनदेन की पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।
ध्यान देने वाली बात: रजिस्ट्री न होने का आरोप अपने-आप में धोखाधड़ी साबित नहीं करता। पुलिस को यह जांचना होगा कि शुरुआत से गलत जानकारी देकर रकम लेने का इरादा था या मामला किसी अन्य प्रकार के अनुबंध अथवा संपत्ति विवाद से जुड़ा है।
निवेशकों को कैसे भरोसे में लिया जा सकता है?
शेयर ट्रेडिंग और डिजिटल निवेश से जुड़े कई मामलों में जालसाज आकर्षक मुनाफे, विशेष ट्रेडिंग सॉफ्टवेयर, कथित विशेषज्ञता या क्रिप्टोकरेंसी से कमाई के दावे करते हैं। कुछ मामलों में निवेशक को स्क्रीन पर बढ़ता हुआ बैलेंस दिखाया जाता है, लेकिन रकम निकालने के समय भुगतान रोक दिया जाता है या अतिरिक्त पैसे मांगे जाते हैं। हालांकि, लखनऊ के इस मामले में ऐसे हर तरीके के इस्तेमाल की पुष्टि नहीं हुई है; यहां उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार सॉफ्टवेयर और निवेश के दावों की जांच की जानी है।
जमीन के सौदों में भी खरीदार को भुगतान से पहले स्वामित्व दस्तावेज, खसरा-खतौनी, भार-मुक्ति की स्थिति, बिक्री समझौते और रजिस्ट्री की शर्तें सत्यापित करनी चाहिए। केवल परिचित व्यक्ति की बात या भविष्य में मुनाफे के आश्वासन पर बड़ी रकम देना जोखिम भरा हो सकता है।
पुलिस जांच में किन बातों पर स्पष्टता जरूरी?
इन दोनों मामलों में जांच के लिए कुछ अहम बिंदु सामने आते हैं:
रकम किन बैंक खातों, यूपीआई आईडी या अन्य माध्यमों से भेजी गई?
ट्रेडिंग सॉफ्टवेयर और क्रिप्टो निवेश से जुड़े दावों के समर्थन में क्या दस्तावेज मौजूद हैं?
जमीन के मामले में बिक्री समझौता, स्वामित्व और भुगतान के प्रमाण क्या हैं?
क्या रकम वापस करने के लिए कोई लिखित वादा किया गया था?
शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि डिजिटल रिकॉर्ड और संबंधित पक्षों के बयानों से होती है या नहीं?
इन तथ्यों के आधार पर ही पुलिस यह तय कर सकेगी कि किस तरह की कानूनी कार्रवाई उचित होगी। उपलब्ध रिपोर्ट में दोनों मामलों की जांच का उल्लेख है, लेकिन रकम की बरामदगी या अंतिम पुलिस निष्कर्ष की पुष्टि नहीं हुई है।
साइबर ठगी का शक हो तो तुरंत क्या करें?
यदि किसी व्यक्ति को ऑनलाइन निवेश के नाम पर ठगी का संदेह हो, तो उसे जल्द से जल्द अपने बैंक से संपर्क करके लेनदेन रोकने या खाते पर आवश्यक सुरक्षा कार्रवाई का अनुरोध करना चाहिए। साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में 1930 पर शिकायत की जा सकती है और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। भुगतान की रसीदें, बैंक स्टेटमेंट, फोन नंबर, चैट और निवेश प्लेटफॉर्म के स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखना उपयोगी होगा।
जमीन से संबंधित विवाद में भुगतान के प्रमाण, अनुबंध और संपत्ति के दस्तावेज सुरक्षित रखें तथा जरूरत पड़ने पर पुलिस और योग्य कानूनी सलाहकार से संपर्क करें।