कचहरी रोड पर सुबह से शुरू हुआ बड़ा अभियान
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कचहरी के आसपास अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई ने रविवार को नया मोड़ ले लिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में लखनऊ नगर निगम की टीम भारी पुलिस और पीएसी बल के साथ कचहरी रोड पहुंची और चिह्नित अवैध चैंबरों, दुकानों तथा अन्य अतिक्रमण को हटाने का अभियान शुरू किया।
26 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार को लगभग साढ़े सात घंटे चली कार्रवाई में करीब 100 अवैध कब्जे ढहाए गए, जिनमें अधिकांश वकीलों के चैंबर बताए गए हैं। कार्रवाई सुबह करीब 10 बजे शुरू हुई और शाम तक चली। मौके से मलबा हटाने का काम भी किया गया।
यह कार्रवाई इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि चैंबरों में लंबे समय से वकालत कर रहे अधिवक्ताओं ने इसे लेकर कड़ा विरोध जताया।
कितने चैंबर कार्रवाई के दायरे में हैं?
इस मामले में चिह्नित निर्माणों की संख्या को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अलग आंकड़े सामने आए हैं। कुछ रिपोर्टों में 245 चैंबर, जबकि अन्य में पहले से चिह्नित 241 निर्माण या 211 बचे हुए चैंबरों का उल्लेख है।
नगर निगम की कार्रवाई के चरणों और अलग-अलग तारीखों में हटाए गए निर्माणों की वजह से ये आंकड़े अलग हो सकते हैं। इसलिए यह कहना अधिक सटीक है कि 200 से अधिक अवैध निर्माण/चैंबर अभियान के दायरे में हैं, जिनमें एक चरण में करीब 100 को ध्वस्त किए जाने की रिपोर्ट है।
नगर निगम ने इन चैंबरों पर पहले ही लाल निशान और नंबर लगाए थे तथा संबंधित लोगों को नोटिस दिए जाने की बात रिपोर्टों में सामने आई है।
बुलडोजर के सामने लेट गए वकील
कार्रवाई शुरू होते ही बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौके पर पहुंच गए। उन्होंने नगर निगम की कार्रवाई का विरोध करते हुए धरना और नारेबाजी शुरू कर दी।
स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई जब कुछ वकील कार्रवाई रोकने के लिए बुलडोजर पर चढ़ गए और उसके आगे लेट गए। पुलिस और पीएसी की मौजूदगी में अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को हटाकर कार्रवाई आगे बढ़ाई। कुछ समय के लिए मशीनों को रोकना भी पड़ा।
रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ अधिवक्ता भावुक भी हो गए। एक महिला वकील के रोने की तस्वीरें और वीडियो भी सामने आए।
वकीलों की सबसे बड़ी मांग—वैकल्पिक जगह
अधिवक्ताओं का कहना है कि वे इन चैंबरों में 15 से 20 वर्षों से बैठकर वकालत कर रहे हैं। उनका तर्क है कि अगर अदालत के आदेश के अनुसार निर्माण हटाया जाना है तो वे कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करते हैं, लेकिन प्रशासन को उनके लिए वैकल्पिक बैठने और प्रैक्टिस करने की व्यवस्था भी करनी चाहिए।
वकीलों का कहना है कि चैंबर उनके लिए केवल एक निर्माण नहीं, बल्कि उनके रोजमर्रा के पेशे का महत्वपूर्ण आधार हैं। अचानक इन्हें हटाने से दस्तावेज, केस फाइल और क्लाइंट मीटिंग जैसी गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।
दूसरी तरफ नगर निगम का पक्ष यह है कि कार्रवाई हाईकोर्ट के निर्देश के अनुपालन में की जा रही है और जिन निर्माणों को अवैध/अतिक्रमण के रूप में चिह्नित किया गया है, उन्हें हटाना जरूरी है।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
यह पहली बार नहीं है जब लखनऊ कचहरी के आसपास अवैध चैंबरों के खिलाफ अभियान चलाया गया है। जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, हाईकोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम ने कचहरी के बाहर 241 अवैध निर्माण चिह्नित किए थे और इससे पहले 17 मई तथा 30 अगस्त को भी कार्रवाई की जा चुकी थी। रविवार को बचे हुए निर्माणों के एक हिस्से पर कार्रवाई की गई।
इससे स्पष्ट है कि यह अभियान अचानक शुरू नहीं हुआ, बल्कि पहले से चल रही कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया का अगला चरण है।
भारी पुलिस और पीएसी की तैनाती
वकीलों के विरोध को देखते हुए प्रशासन ने मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल और पीएसी तैनात की थी। रिपोर्टों में वजीरगंज, कैसरबाग समेत आसपास के कई थानों की पुलिस की मौजूदगी का उल्लेख है।
प्रशासन की कोशिश थी कि कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था न बिगड़े और चिन्हित क्षेत्र को खाली कराकर ध्वस्तीकरण किया जा सके।
अन्य दुकानों और अतिक्रमण पर भी नजर
अभियान के दौरान नगर निगम ने कुछ अन्य दुकानों और निर्माणों पर भी लाल निशान लगाए। एक रिपोर्ट के मुताबिक कुछ दुकानदारों पर निशान मिटाने और नोटिस हटाने के आरोप भी सामने आए हैं। नगर निगम ने ऐसे निर्माणों पर भी आगे कार्रवाई की बात कही है।
वहीं कुछ स्थानीय लोगों ने कार्रवाई की सीमा को लेकर सवाल भी उठाए। एक परिवार ने अपनी झोपड़ी हटाए जाने का आरोप लगाया, जबकि पुलिस अधिकारी ने किसी मकान पर कार्रवाई से इनकार करते हुए कहा कि अभियान चिह्नित अवैध चैंबरों तक सीमित था। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग स्रोतों से नहीं हुई है।
अब आगे क्या होगा?
रिपोर्टों के अनुसार, चिह्नित अवैध निर्माणों में से कुछ पर कार्रवाई अभी बाकी है। नगर निगम को अभियान की रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करनी है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मामला फिर अदालत में चर्चा का विषय बन सकता है।
दूसरी ओर, अधिवक्ता वैकल्पिक व्यवस्था और अपने पेशे से जुड़े हितों को लेकर प्रशासन के सामने अपनी मांग रख रहे हैं। इससे आगे कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर दोनों पक्षों के बीच बातचीत की संभावना बनी हुई है।
मामला सिर्फ बुलडोजर कार्रवाई का नहीं
लखनऊ का यह मामला अब केवल अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है। एक तरफ सार्वजनिक सड़क और सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे हटाने का न्यायिक आदेश है, तो दूसरी तरफ वर्षों से वहां काम कर रहे अधिवक्ताओं की आजीविका और वैकल्पिक कार्यस्थल की मांग है।
यही वजह है कि कचहरी रोड की यह कार्रवाई प्रशासन, अधिवक्ता समुदाय और अदालत—तीनों के लिए महत्वपूर्ण बन गई है। फिलहाल नगर निगम ने हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में कार्रवाई जारी रखी है और आगे बचे हुए चिह्नित निर्माणों पर क्या कदम उठाया जाता है, इस पर नजर बनी हुई है।