छोटी बात से शुरू हुआ विवाद बना जानलेवा
लखनऊ के सआदतगंज इलाके के ब्राह्मणी टोला में कार पार्किंग को लेकर शुरू हुआ विवाद सोमवार को बेहद खूनी घटना में बदल गया। पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, दो पड़ोसी परिवारों के बीच पहले से ही लंबे समय से तनाव और झगड़े चल रहे थे। सोमवार सुबह कार खड़ी करने को लेकर हुई कहासुनी के बाद विवाद इतना बढ़ गया कि कथित तौर पर एक पक्ष के युवक ने पिस्टल से फायरिंग कर दी।
इस गोलीबारी में शिवाजी तिवारी, उनके भाई शिवेंद्र तिवारी और शिवाजी के बेटे सुयश तिवारी की मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
पार्किंग विवाद के पीछे पुरानी रंजिश भी
पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दोनों परिवारों के बीच संबंध लंबे समय से खराब थे और छोटी-छोटी बातों को लेकर भी कई बार कहासुनी होती थी।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों परिवारों के बीच पिछले कुछ वर्षों से तनाव था और हाल के दिनों में विवाद फिर बढ़ गया था। पुलिस ने बताया कि स्थानीय स्तर पर दोनों पक्षों के बीच पहले भी हस्तक्षेप किया गया था।
यानी सोमवार की घटना को सिर्फ एक कार पार्क करने का तत्काल विवाद मानना पूरी तस्वीर नहीं बताता। जांच में पुराने मतभेदों और हाल के विवादों को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बरगद के पेड़ के चबूतरे को लेकर भी विवाद
मामले में एक और अहम पहलू बरगद के पेड़ के आसपास चबूतरा बनाने का है।
पुलिस के मुताबिक, पिछले करीब दो महीनों से दोनों परिवारों के बीच इस निर्माण को लेकर भी मतभेद चल रहा था। स्थानीय स्तर पर पेड़ के आसपास पक्का चबूतरा बनाने का काम कराया जा रहा था। एक परिवार इस काम के समर्थन में था, जबकि दूसरा पक्ष इसका विरोध कर रहा था। इसी मुद्दे को लेकर दोनों परिवारों में तनाव और टकराव बढ़ने की बात सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार विवाद के चलते चबूतरे का निर्माण भी कुछ समय के लिए रोक दिया गया था।
सोमवार सुबह फिर भिड़े दोनों पक्ष
घटना सोमवार सुबह करीब 10:30 बजे ब्राह्मणी टोला इलाके में हुई। पुलिस के मुताबिक, कार को एक खाली प्लॉट/स्थल के पास खड़ा करने को लेकर दोनों पक्षों में विवाद शुरू हुआ।
कहासुनी बढ़ने के बाद आरोपी ऋषभ शुक्ला के कथित तौर पर घर के अंदर जाने और पिस्टल लेकर वापस आने की बात जांच में सामने आई है। इसके बाद गोलीबारी हुई।
इंडियन एक्सप्रेस ने एक प्रत्यक्षदर्शी के हवाले से बताया कि बहस बढ़ने के बाद आरोपी कथित तौर पर पिस्टल लेकर लौटा और फायरिंग की।
पुलिस ने आरोपी को मौके से गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से कथित तौर पर वारदात में इस्तेमाल पिस्टल और चार खाली कारतूस बरामद किए गए हैं।
तीनों मृतक एक ही परिवार के
फायरिंग में शिवाजी तिवारी, उनके भाई शिवेंद्र तिवारी और शिवाजी के बेटे सुयश तिवारी को गोली लगी।
घायलों को पुलिस और परिजनों की मदद से KGMU ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, लेकिन तीनों की जान नहीं बच सकी।
सुयश की शादी भी 5 दिसंबर को प्रस्तावित बताई गई थी। परिवार में शादी की तैयारियां चल रही थीं और घटना ने अचानक पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।
आठ लोगों के खिलाफ FIR
मामले में मृतक परिवार की ओर से दी गई शिकायत के आधार पर आठ लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। पुलिस ने हत्या और दंगे से जुड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
मुख्य आरोपी ऋषभ शुक्ला गिरफ्तार है, जबकि अन्य नामजद लोगों से पूछताछ और उनकी भूमिका की जांच की जा रही है।
यहां यह भी महत्वपूर्ण है कि FIR में नाम होना दोष सिद्ध होना नहीं है। बाकी आरोपियों की भूमिका जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
पहले भी पुलिस तक पहुंचा था विवाद
मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि पुलिस की शुरुआती जांच में दोनों परिवारों के बीच पहले भी विवाद होने की बात सामने आई है।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, स्थानीय पुलिस ने दोनों पक्षों के बीच पहले हुए विवाद में हस्तक्षेप किया था और उन्हें चेतावनी भी दी गई थी। इसी वजह से अब यह सवाल भी जांच का हिस्सा है कि क्या पुराने विवाद को समय रहते प्रभावी ढंग से शांत कराया जा सकता था?
इसी पृष्ठभूमि में घटना के बाद सआदतगंज SHO और कश्मीरी मोहल्ला चौकी प्रभारी को निलंबित किया गया है। पुलिस विभाग की यह कार्रवाई घटना से पहले की पुलिस कार्रवाई और संभावित लापरवाही के पहलू को भी जांच के दायरे में लाती है।
इलाके में तनाव, पुलिस का पहरा
तीन लोगों की हत्या के बाद इलाके में तनाव को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में रखने और किसी तरह की दूसरी घटना रोकने के लिए इलाके में निगरानी बढ़ाई है।
मंगलवार को मृतक परिवार की ओर से कड़ी कार्रवाई की मांग भी सामने आई। परिवार ने आरोपियों के खिलाफ सख्त सजा की मांग की है।
अब जांच में किन सवालों के जवाब जरूरी
पुलिस जांच अब सिर्फ गोली चलाने वाले आरोपी तक सीमित नहीं है। जांच में यह पता लगाना भी जरूरी है कि:
दोनों परिवारों के बीच विवाद की शुरुआत कब और किस मुद्दे से हुई?
पहले कितनी बार पुलिस में शिकायत हुई?
बरगद के चबूतरे और पार्किंग विवाद में किस पक्ष की क्या भूमिका थी?
घटना के समय मौके पर मौजूद बाकी आरोपियों की भूमिका क्या थी?
हथियार आरोपी तक कैसे पहुंचा?
क्या पहले के विवाद को लेकर पुलिस की ओर से पर्याप्त कार्रवाई की गई थी?
इन सवालों के जवाब सामने आने के बाद ही इस तिहरे हत्याकांड की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।