उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (UPSRLM) से जुड़ी समूह सखियों ने अपनी मांगों को लेकर मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को प्रदर्शन किया। महिलाओं का एक समूह इलाहाबाद हाईकोर्ट के गेट नंबर-6 तक पहुंचा और वहां अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की। इसके बाद विभूति खंड स्थित मिशन कार्यालय के बाहर भी प्रदर्शन किया गया।
समूह सखियों की प्रमुख मांगों में मानदेय बढ़ाना, भुगतान सीधे बैंक खातों में करना, मोबाइल और टैबलेट उपलब्ध कराना तथा पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा देना शामिल है।
हाईकोर्ट के गेट नंबर-6 तक पहुंचीं महिलाएं
रिपोर्ट के अनुसार, समूह सखियां पहले से ही मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर ईको गार्डन में धरना देती रही हैं। मंगलवार को प्रदर्शन कर रहीं महिलाओं का एक समूह हाईकोर्ट के गेट नंबर-6 तक पहुंच गया। वहां नारेबाजी के बाद पुलिस ने उन्हें समझाकर विभूति खंड के आईजीपी के पास स्थित शालीमार गार्डेन में बैठाया।
समूह सखी महिला कल्याण समिति की प्रदेश अध्यक्ष नीतू सिंह ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान चार से पांच महिलाओं की तबीयत भी बिगड़ गई। इसके बाद पुलिस ने प्रतिनिधिमंडल की मिशन निदेशक से बातचीत कराई।
क्या हैं समूह सखियों की प्रमुख मांगें?
समूह सखियों ने अधिकारियों के सामने कई मांगें रखीं। इनमें शामिल हैं:
- मानदेय में बढ़ोतरी: मौजूदा भुगतान बढ़ाकर सम्मानजनक मासिक मानदेय निर्धारित किया जाए।
- सीधे बैंक खाते में भुगतान: मानदेय का भुगतान नियमित तारीख पर सीधे बैंक खातों में किया जाए।
- मोबाइल और टैबलेट: सरकारी काम, सर्वे और डिजिटल रिकॉर्ड के लिए उपकरण उपलब्ध कराए जाएं।
- स्वास्थ्य सुरक्षा: पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा दी जाए।
- कर्मचारी का दर्जा: काम के अनुरूप औपचारिक कर्मचारी का दर्जा और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
- यात्रा भत्ता: गांवों और दूरदराज के इलाकों में काम करने के लिए यात्रा खर्च दिया जाए।
- दुर्घटना बीमा और अन्य सुविधाएं: फील्ड में काम के दौरान जोखिम को देखते हुए बीमा और जरूरी सुरक्षा सुविधाएं दी जाएं।
मिशन निदेशक से वार्ता, 15 दिसंबर तक का अल्टीमेटम
प्रदर्शन के बाद समिति की प्रदेश अध्यक्ष नीतू सिंह के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मिशन निदेशक से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में मीनू मौर्य, भानु प्रिया, मंजू सहित अन्य महिलाएं शामिल थीं।
समूह सखियों का कहना है कि अधिकारियों ने उनकी मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया है। हालांकि, उनकी मांगों को स्वीकार किए जाने या लागू करने का कोई अंतिम सरकारी आदेश सामने नहीं आया है।
समिति ने चेतावनी दी है कि 15 दिसंबर 2026 तक सकारात्मक फैसला नहीं हुआ तो वे दोबारा आंदोलन करेंगी। वार्ता के बाद प्रदर्शनकारी महिलाओं को वाहनों से ईको गार्डन भेजा गया।