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लखनऊ ट्रिपल मर्डर के बाद पुलिस पर गिरी गाज, SHO और चौकी प्रभारी सस्पेंड; पार्किंग विवाद में 3 की हुई थी हत्या

सआदतगंज के ब्राह्मणी टोला में तिहरे हत्याकांड के बाद पुलिस कमिश्नर तरुण गाबा का एक्शन; संतोष कुमार आर्य और अजय कुमार चौरसिया तत्काल प्रभाव से निलंबित

लखनऊ ट्रिपल मर्डर के बाद पुलिस पर गिरी गाज, SHO और चौकी प्रभारी सस्पेंड; पार्किंग विवाद में 3 की हुई थी हत्या
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

तीन हत्याओं के बाद पुलिस पर बड़ा एक्शन

लखनऊ के सआदतगंज इलाके में हुए ट्रिपल मर्डर के बाद पुलिस विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। सोमवार को पार्किंग विवाद के दौरान एक ही परिवार के तीन लोगों की गोली मारकर हत्या के मामले में सआदतगंज थाना प्रभारी संतोष कुमार आर्य और कश्मीरी मोहल्ला चौकी प्रभारी अजय कुमार चौरसिया को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

लखनऊ पुलिस के मुताबिक, यह कार्रवाई पुलिस कमिश्नर तरुण गाबा ने घटना की गंभीरता को देखते हुए की। दोनों अधिकारियों पर कार्रवाई के पीछे पुलिस की कार्यप्रणाली और कथित लापरवाही को लेकर उठे सवाल अहम माने जा रहे हैं।

पार्किंग विवाद ने ले ली तीन जानें

यह सनसनीखेज वारदात 26 अक्टूबर को सआदतगंज थाना क्षेत्र के नौबस्ता स्थित ब्राह्मणी टोला में हुई थी। यहां एक खाली प्लॉट और बरगद के पेड़ के नीचे कार खड़ी करने तथा चबूतरे के निर्माण को लेकर दो पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था।

सोमवार सुबह विवाद फिर बढ़ा और देखते ही देखते गोलीबारी शुरू हो गई। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ऋषभ शुक्ला, उम्र करीब 30 वर्ष, ने कथित तौर पर पिस्टल से फायरिंग कर दी।

गोली लगने से शिवाजी तिवारी (62), शिवेंद्र तिवारी (55) और सुयश तिवारी (30) गंभीर रूप से घायल हो गए। तीनों को इलाज के लिए KGMU ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई।

आरोपी गिरफ्तार, पिस्टल और खोखे बरामद

पुलिस ने मुख्य आरोपी ऋषभ शुक्ला को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार उसके पास से कथित तौर पर वारदात में इस्तेमाल की गई पिस्टल और चार खाली कारतूस के खोखे बरामद किए गए हैं।

मामले में आठ लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। पुलिस ने हत्या और दंगा समेत भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू की है। आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया भी शुरू की गई।

पुलिस की भूमिका पर क्यों उठे सवाल?

हत्याकांड के बाद मृतकों के परिजनों और स्थानीय लोगों ने पुलिस के खिलाफ भी नाराजगी जताई। उनका आरोप है कि दोनों परिवारों के बीच पहले से विवाद और शिकायतों का सिलसिला चल रहा था और पुलिस को तनाव की जानकारी थी।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, परिजनों और स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने पहले की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया। इसी के बाद पुलिस की भूमिका को लेकर सवाल उठे और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज हुई।

हालांकि, इन आरोपों को अभी जांच के निष्कर्ष के तौर पर नहीं माना जा सकता। पुलिस अधिकारियों का निलंबन विभागीय कार्रवाई है और इससे यह स्वतः साबित नहीं होता कि उनकी वजह से हत्या हुई या वे किसी अपराध में दोषी हैं।

एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत

मृतकों की पहचान शिवाजी तिवारी, उनके भाई शिवेंद्र तिवारी और शिवाजी के बेटे सुयश तिवारी के रूप में हुई है।

परिवार के अनुसार, सुयश की शादी दिसंबर में प्रस्तावित थी। घटना के बाद परिवार में मातम का माहौल है और स्थानीय लोगों में भी काफी आक्रोश देखा गया।

एक परिवार के तीन सदस्यों की एक साथ हत्या ने इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और स्थानीय विवादों को समय रहते नियंत्रित करने की पुलिस क्षमता पर भी सवाल खड़े किए हैं।

विवाद की जड़ में सिर्फ पार्किंग नहीं?

जांच में सामने आए प्रारंभिक विवरण के मुताबिक विवाद केवल कार पार्क करने तक सीमित नहीं था। दोनों परिवारों के बीच बरगद के पेड़ के नीचे चबूतरे के निर्माण और स्थानीय कामों को लेकर भी मतभेद थे।

मृतक परिवार की ओर से दर्ज शिकायत में लंबे समय से विवाद और कथित उत्पीड़न के आरोप लगाए गए हैं। वहीं पुलिस ने बताया कि मामले की सभी परिस्थितियों और आरोपों की जांच की जा रही है।

इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि गोलीबारी का एकमात्र कारण पार्किंग था। पुरानी रंजिश, स्थानीय विवाद और घटना से ठीक पहले हुई कहासुनी—सभी पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण होगी।

इलाके में भारी पुलिस बल तैनात

घटना के बाद सआदतगंज और आसपास के इलाके में तनाव को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। अधिकारियों ने कानून-व्यवस्था पर नजर बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।

पुलिस का कहना है कि इलाके की स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

निलंबन के बाद अब आगे क्या?

दो पुलिस अधिकारियों के निलंबन के बाद अब सबसे अहम सवाल यह है कि क्या पहले की शिकायतों और विवाद की सूचना पर पुलिस ने पर्याप्त कार्रवाई की थी?

यदि विभागीय जांच में किसी तरह की लापरवाही सामने आती है तो आगे और कार्रवाई हो सकती है। दूसरी तरफ हत्या के आपराधिक मामले में पुलिस को यह भी पता लगाना होगा कि घटना में नामजद बाकी लोगों की क्या भूमिका थी।

फिलहाल मुख्य आरोपी गिरफ्तार है, हथियार बरामद होने का पुलिस का दावा है और बाकी आरोपियों से पूछताछ/जांच जारी है।

मामले में अब दो मोर्चों पर जांच

लखनऊ पुलिस के सामने अब दो अलग-अलग स्तर की जिम्मेदारी है—पहली, तीन हत्याओं की पूरी आपराधिक साजिश और सभी आरोपियों की भूमिका सामने लाना; दूसरी, घटना से पहले पुलिस के पास मौजूद शिकायतों और सूचना पर हुई कार्रवाई की जांच करना।

दो अधिकारियों का निलंबन इसी दूसरे पहलू पर विभाग की शुरुआती कार्रवाई को दर्शाता है।