लखनऊ के हज़रतगंज स्थित गांधी प्रतिमा के पास मंगलवार को बॉन्ड डॉक्टरों के प्रदर्शन में पुलिस से झड़प हुई। प्रशासन ने डॉक्टरों को गिरफ़्तार करने के लिए बस भेजी, जिसके बाद तनाव बढ़ गया।
पुलिस बस के सामने आई तो महिला डॉक्टरों ने उसे रोकने के लिए अपने हाथों से धक्का दिया। कई डॉक्टर बस के आगे लेट गए और कहा, "ऊपर चढ़ा दो, हम नहीं हटेंगी।" पुलिस उन्हें इको गार्डन ले जाने की कोशिश कर रही थी।
40 दिन का संघर्ष
ये डॉक्टर सरकारी मेडिकल कॉलेजों के 2018, 2019 और 2020 बैच से आते हैं। उन्हें दो साल की अनिवार्य बॉन्ड सेवा देनी पड़ती है गाँव और दूरस्थ जिला स्वास्थ्य केंद्रों में, अन्यथा 10 लाख रुपये का जुर्माना भरना पड़ता है।
डॉक्टरों की माँग समान वेतन और बकाया भत्ते की है। वर्तमान में उन्हें महीने में 50-55 हज़ार रुपये मिलते हैं जबकि उसी MBBS डिग्री वाले अन्य डॉक्टरों को 1.10 लाख रुपये मिलते हैं।
प्रशासन का वादा अधूरा
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने पहले मंगलवार को 24 घंटे के भीतर सभी माँगें पूरी करने का वादा किया था। अगले दिन दोपहर 2 बजे तक आदेश जारी होने वाले थे, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि यह वादा पूरा नहीं हुआ।
डॉक्टरों का आरोप है कि सरकार और प्रशासन उनकी आवाज़ को दबाने की कोशिश कर रहे हैं जबकि वे 40 दिन से संघर्ष कर रहे हैं।