लखनऊ में गोमती नदी का पानी उतरने के बाद नगर निगम ने बाढ़ से प्रभावित इलाकों की सफाई के लिए तैयारी शुरू कर दी है। नदी का जलस्तर पिछले दिन 13 सेंटीमीटर घट गया है।
फैजुल्लागंज और मिल्लतनगर जैसे इलाकों में 15 दिन से ज़्यादा समय तक पानी भरा रहा। निकली हुई गंदगी और संक्रमण के ख़तरे को देखते हुए नगर निगम की टीमें पानी घटते इलाकों में एंटी-लार्वा रसायन और ब्लीचिंग पाउडर छिड़कने लगी हैं।
घरों को साफ़ करने की चुनौती
सीतापुर से फैजुल्लागंज के मिल्लतनगर में आई नई दुल्हन रुबीना अंसारी सहित कई परिवार अब अपने घरों की सफाई और क्षति का आकलन कर रहे हैं। रोज़मर्रा की मज़दूरी करने वाले लोग और छोटे व्यापारी आय के नुक़सान और अस्थायी आश्रय के ख़र्च से जूझ रहे हैं।
कई परिवारों को पक्का नहीं है कि वे अपने घरों में कब वापस जा सकेंगे। पिछले हफ़्ते 35 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया था, जिनमें से 26 लोग अभी अस्थायी आश्रय में हैं।
नगर निगम की योजना
नगर निगम आयुक्त गौरव कुमार ने प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया और सफ़ाई, कोहरा छिड़काव और लार्वा नियंत्रण के उपायों की समीक्षा की। बरेज के दरवाज़े तब तक खुले रहेंगे जब तक नदी का जलस्तर 105.60 मीटर से नीचे न आ जाए।
सिंचाई विभाग फैजुल्लागंज से निमिषारण्य तक तटबंधों का सर्वेक्षण करने की योजना बना रहा है ताकि भविष्य में बाढ़ से बचा जा सके। कुछ ढलवां इलाकों में अभी भी जलभराव है।