Skip to content
24/7 News Uttar Pradesh
Breaking

ओडिशा में चक्रवात ‘अर्नब’ के बाद जलप्रलय! 9 जिलों में 59 हजार से ज्यादा लोग सुरक्षित ठिकानों पर शिफ्ट

चक्रवात अर्नब कमजोर पड़ने के बाद ओडिशा के दक्षिणी इलाकों में भारी बारिश ने बाढ़ का संकट पैदा कर दिया है। गंजाम और गजपति सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। प्रशासन ने 59,028 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है, जिनमें 3,001 गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं। राहत और बचाव के लिए 313 टीमें तैनात की गई हैं।

ओडिशा में चक्रवात ‘अर्नब’ के बाद जलप्रलय! 9 जिलों में 59 हजार से ज्यादा लोग सुरक्षित ठिकानों पर शिफ्ट
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

ओडिशा में चक्रवात ‘अर्नब’ का असर अब भीषण बाढ़ के रूप में सामने आ रहा है। तूफान कमजोर पड़ने के बाद भी लगातार मूसलाधार बारिश ने राज्य के कई जिलों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। नदियां उफान पर हैं, गांवों में पानी घुस गया है और कई इलाकों का सड़क संपर्क टूट गया है।

हालात की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान शुरू किया है। अब तक नौ जिलों से 59,028 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। इनमें 3,001 गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं।

गंजाम और गजपति में सबसे ज्यादा तबाही
चक्रवात के बाद दक्षिणी ओडिशा के गंजाम और गजपति जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार:
- गंजाम: 11,882 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
- गजपति: 17,441 लोगों को निकाला गया।
- मलकानगिरी: 15,477 लोगों को सुरक्षित किया गया।
- नबरंगपुर: 10,519 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
इसके अलावा कोरापुट, रायगढ़ा, कालाहांडी, नुआपाड़ा और कंधमाल जिलों में भी भारी बारिश और बाढ़ का असर देखने को मिला है।

300 से ज्यादा गांव बाढ़ की चपेट में, कई इलाके बने टापू
गंजाम जिले में करीब 300 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इनमें लगभग 70 गांव ऐसे बताए गए हैं, जहां पानी भरने के कारण संपर्क पूरी तरह बाधित हो गया।

गजपति जिले में भी 711 गांवों में भारी बारिश और बाढ़ का असर सामने आया है। कई जगहों पर सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे राहत सामग्री पहुंचाना मुश्किल हो गया है।

कुछ इलाकों में हालात इतने खराब हैं कि बचाव दल नावों के जरिए भी लोगों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। ऐसे स्थानों पर हेलिकॉप्टर से लोगों को निकालने की व्यवस्था की गई है।

313 बचाव टीमें तैनात, NDRF और ODRAF संभाल रहे मोर्चा
बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए ओडिशा सरकार ने अलग-अलग आपदा प्रतिक्रिया एजेंसियों की 313 टीमें तैनात की हैं।

इनमें शामिल हैं:
- 9 टीमें: राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF)
- 60 टीमें: ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ODRAF)
- 244 टीमें: अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विभाग
इसके अलावा राज्य में लोगों को सुरक्षित रखने के लिए 830 राहत शिविरों की व्यवस्था की गई है। यहां विस्थापित लोगों को भोजन, पीने का पानी और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

गर्भवती महिलाओं को भी सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया
इस आपदा में सबसे ज्यादा चिंता गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर है। अधिकारियों के मुताबिक, सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए लोगों में 3,001 गर्भवती महिलाएं शामिल हैं।

प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं को सक्रिय रखा है, ताकि जरूरत पड़ने पर महिलाओं को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जा सके।

546 मिमी बारिश से बिगड़े हालात, नदियां खतरे के निशान से ऊपर
चक्रवात के प्रभाव से ओडिशा के कुछ इलाकों में रिकॉर्ड स्तर की बारिश दर्ज की गई है।
- पत्रापुर (गंजाम): 546 मिमी बारिश।
- जी. उदयगिरि (कंधमाल): 462.4 मिमी बारिश।
- सनाखेमुंडी: 388 मिमी बारिश।
- रायिकिया: 384.8 मिमी बारिश।
- सोरोड़ा: 375 मिमी बारिश।
लगातार बारिश के कारण रुशिकुल्या नदी का जलस्तर पुरुषोत्तमपुर में 19 मीटर तक पहुंच गया, जबकि यहां खतरे का निशान 16.8 मीटर है। इससे आसपास के इलाकों में बाढ़ का खतरा और बढ़ गया है।

रेलवे और नेशनल हाईवे पर भी बाढ़ का असर
बाढ़ ने केवल गांवों और खेतों को ही प्रभावित नहीं किया, बल्कि परिवहन व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हुई है।
- 36 ट्रेनें रद्द की गईं।
- करीब 30 ट्रेनों के मार्ग बदले गए।
- नेशनल हाईवे-16 के एक हिस्से पर बाढ़ का पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ।
- गजपति जिले के मोहना ब्लॉक में नेशनल हाईवे-326 का करीब 300 मीटर हिस्सा बह गया।
इससे कई इलाकों में आवागमन और राहत सामग्री पहुंचाने में मुश्किलें पैदा हुई हैं।

फंसे लोगों को हेलिकॉप्टर से निकालने का अभियान
कुछ गांवों में पानी का स्तर इतना बढ़ गया है कि सड़क और नाव के रास्ते बचाव अभियान चलाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में भारतीय तटरक्षक बल के हेलिकॉप्टर की मदद ली जा रही है।

गंजाम जिले के 70 ऐसे गांवों से करीब 2,328 लोगों को एयरलिफ्ट करने की योजना शुरू की गई है, जो बाढ़ के कारण दूसरे इलाकों से कट गए हैं। तटरक्षक बल के हेलिकॉप्टर ने बचाव अभियान की पहली उड़ान भी पूरी की।

मुख्यमंत्री ने अमित शाह से मांगी मदद
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बातचीत कर राज्य में बाढ़ और चक्रवात के बाद पैदा हुए हालात की जानकारी दी।

अमित शाह ने केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहायता का भरोसा दिया है। केंद्र की ओर से प्रभावित इलाकों में नुकसान का आकलन करने के लिए केंद्रीय टीम भेजने की भी जानकारी सामने आई है। राज्य सरकार राहत, पुनर्वास और सड़क-बिजली जैसी आवश्यक सेवाओं को बहाल करने में जुटी है।

आगे क्या है चुनौती?
चक्रवात कमजोर पड़ चुका है, लेकिन भारी बारिश से पैदा हुआ बाढ़ का संकट अभी गंभीर बना हुआ है। नदियों का बढ़ता जलस्तर, गांवों का संपर्क टूटना, फसलों का नुकसान और बिजली-पानी की आपूर्ति बहाल करना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौतियां हैं।

फिलहाल प्राथमिकता फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने, राहत शिविरों में सुविधाएं उपलब्ध कराने और प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य स्थिति बहाल करने की है।