भारतीय वायुसेना की सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम ने शनिवार को मेरठ के आसमान को अपने साहस और कौशल से जगमगा दिया। नौ हॉक विमानों ने हजारों दर्शकों के सामने अपना जादू दिखाया।
मेरठ के दो सपूत स्क्वाड्रन लीडर अमन गोयल और स्क्वाड्रन लीडर राहुल सिंह ने इस प्रदर्शन का नेतृत्व किया। उन्होंने आसमान में एक दिल की आकृति बनाकर अपने शहर और यहां के लोगों को सलामी दी।
स्क्वाड्रन लीडर अमन गोयल ने फाइटर जेट को उल्टा करके सिर जमीन की ओर करते हुए देशवासियों को सम्मानित किया। विमान एक-दूसरे के मात्र पांच मीटर की दूरी पर उड़े और तरह-तरह की फॉर्मेशन बनाते रहे।
मोहिउद्दीन पुर में प्रस्तावित न्यूटीग्रेटेड टाउनशिप स्थल पर यह प्रदर्शन हुआ। विमान 100 से 150 फीट की ऊंचाई पर उड़ते हुए लूप्स, बैरल रोल्स और DNA मनूवर दिखाते रहे।
भीड़ का उमड़ता सैलाब
दूसरे दिन भीड़ पहले दिन से दोगुने से ज्यादा थी। मैदान के अलावा आसपास की सड़कों, खुली जगहों और ऊंचे स्थानों पर हजारों लोग खड़े रहे।
बच्चों से लेकर बुजुर्गों सभी ने मोबाइल से इन पलों को कैमरे में कैद किया। कई लोग आंखों पर हाथ रखकर तेज धूप के बीच आसमान में विमानों को देखते रहे।
फिल्म के गीतों ने भरा जोश
वायु सेना पर बनी फिल्म फाइटर का गीत 'जमीं वालों को समझ नहीं आनी, मेरी हीर आसमानी' आयोजन स्थल पर दो दिनों में ट्रेंड रहा। यह गीत फाइटर पायलटों को समर्पित है।
फिल्म धुरंधर के गीतों ने जमा हुए लोगों में इतना जोश भरा कि आधा घंटा जमीन पर संगीत चला। इसके बीच आसमान पर सूर्यकिरण टीम के करतब लोगों को कुर्सियों पर बैठने नहीं दिए। सभी खड़े होकर आसमान की ओर देखते रहे।
अधिकारियों के साथ सेल्फी
युवाओं, बच्चों और बड़ों में सूर्यकिरण टीम के अधिकारियों के साथ सेल्फी लेने की भीड़ देखी गई। स्क्वाड्रन लीडर तुषार शर्मा, स्क्वाड्रन लीडर संजीश सिंह और विक्रम वेंकटेशन सहित वायु सेना के अधिकारियों ने सभी को तस्वीर लेने का पूरा अवसर दिया।
वायु सेना ने सूर्यकिरण के निशान और अन्य सामग्री का एक स्टाल लगाया था। वहां पहुंचे लोगों ने बड़ी संख्या में सामग्री खरीदी। युवाओं ने फाइटर प्लेनों के पोस्टर लेने की होड़ मचाई।
टीम का इतिहास
सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम वायुसेना की 52 स्क्वाड्रन का हिस्सा है। इसकी स्थापना 1996 में हुई थी। टीम में 13 पायलट हैं, जिनमें से नौ प्रदर्शन के दौरान उड़ते हैं।
राजया सभा सदस्य लक्ष्मीकांत वाजपेयी के अनुसार, मेरठ में एयर शो का प्रस्ताव 13 मई को भेजा गया था और 8 सितंबर को अनुमति मिली। विमान हिंडन एयरफोर्स स्टेशन से उड़कर करीब 10:25 पर मेरठ पहुंचे थे।