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UP वोटर लिस्ट में 2.7 करोड़ का अंतर क्यों चर्चा में? 18+ आबादी और Electoral Roll के आंकड़ों ने बढ़ाई Enrolment की रफ्तार

Projected adult population और registered voters के बीच करीब 2.7 करोड़ का gap सामने आया; 24 अक्टूबर तक Form 6 आवेदन पर जोर, लेकिन इसे सीधे “2.7 करोड़ गायब वोटर” मानना सही नहीं

UP वोटर लिस्ट में 2.7 करोड़ का अंतर क्यों चर्चा में? 18+ आबादी और Electoral Roll के आंकड़ों ने बढ़ाई Enrolment की रफ्तार
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

उत्तर प्रदेश में वोटर enrolment को लेकर एक बड़ा आंकड़ा इस समय चर्चा में है। राज्य की अनुमानित वयस्क आबादी और Electoral Roll में दर्ज मतदाताओं की संख्या के बीच करीब 2.7 करोड़ का अंतर सामने आया है। इसी अंतर को देखते हुए चुनावी तंत्र की ओर से पात्र नागरिकों से अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज कराने की अपील तेज हो गई है।

हालांकि, इस आंकड़े को समझना बेहद जरूरी है। 2.7 करोड़ का अंतर यह साबित नहीं करता कि इतने ही पात्र मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से बाहर हैं। यह मुख्य रूप से एक projected population estimate और registered electors की संख्या के बीच का statistical gap है। पात्रता, नागरिकता, सामान्य निवास, migration और population projection की सीमाएं इस तुलना को प्रभावित कर सकती हैं।

16.17 करोड़ projected adults बनाम 13.47 करोड़ registered voters

ताजा उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 7 अक्टूबर 2026 तक उत्तर प्रदेश की Electoral Roll में करीब 13,46,77,027 मतदाता दर्ज थे। इसके मुकाबले 2026 के लिए राज्य की 18 वर्ष और उससे अधिक आयु की projected population करीब 16.17 करोड़ आंकी गई है।

दोनों आंकड़ों के बीच अंतर लगभग 2.70 करोड़ बैठता है। यानी registered electorate projected adult population का करीब 83.3% है।

यही आंकड़ा अब voter enrolment को लेकर चर्चा का केंद्र बन गया है, खासकर ऐसे समय में जब उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावी प्रक्रिया को देखते हुए Electoral Roll को अपडेट करने का काम चल रहा है।

24 अक्टूबर क्यों महत्वपूर्ण है?

चुनाव अधिकारियों के मुताबिक 24 अक्टूबर 2026 तक Form 6 के जरिए आवेदन करने वाले पात्र नागरिकों को 12 नवंबर को प्रकाशित होने वाले draft electoral roll में शामिल किए जाने के लिए विचार किया जाएगा, बशर्ते निर्धारित verification और अन्य प्रक्रिया पूरी हो।

Form 6 उन लोगों के लिए है जो मतदाता सूची में नया नाम जुड़वाना चाहते हैं। अधिकारियों ने बूथ स्तर पर विशेष enrolment अभियान चलाने और Booth Level Officers (BLOs) के जरिए लोगों की मदद करने की बात कही है।

इस deadline का महत्व इसलिए भी है क्योंकि किसी आवेदन को सिर्फ जमा करना पर्याप्त नहीं होता। उसकी जांच, विवरण का सार्वजनिक प्रदर्शन और अन्य प्रक्रियाओं में समय लगता है।

युवाओं की enrolment सबसे बड़ी चुनौती

आंकड़ों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा 18–19 वर्ष के नए मतदाताओं से जुड़ा है।

2026 में उत्तर प्रदेश में 18–19 वर्ष की projected population करीब 84.47 लाख बताई गई है। इसके मुकाबले 7 अक्टूबर तक इस आयु वर्ग में लगभग 19.62 लाख registered electors थे।

यानी इस age group में projected population और registered voters के बीच अंतर काफी बड़ा दिखाई देता है। यही वजह है कि पहली बार वोट देने वाले युवाओं को voter registration के लिए विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है।

हालांकि यहां भी यही सावधानी जरूरी है कि projected population और electoral roll को सीधे बराबर मानना सही नहीं है। Population projection अनुमान होता है, जबकि Electoral Roll में केवल वे लोग शामिल होते हैं जो कानूनी रूप से eligible हैं और जिनका registration निर्धारित प्रक्रिया के तहत पूरा हुआ है।

महिला मतदाताओं का gap भी बड़ा

उपलब्ध आंकड़ों में महिला मतदाताओं के मामले में भी बड़ा अंतर दिखाई देता है।

2026 के लिए projected adult female population करीब 7.84 करोड़ बताई गई है, जबकि Electoral Roll में लगभग 6.13 करोड़ महिला मतदाता दर्ज थे। इससे करीब 1.71 करोड़ का अंतर बनता है।

पुरुषों के मामले में projected adult population लगभग 8.33 करोड़ और registered male electors करीब 7.34 करोड़ थे, जिससे लगभग 99 लाख का अंतर सामने आता है।

यह आंकड़े बताते हैं कि केवल नए मतदाताओं का registration ही नहीं, बल्कि eligible citizens के बीच electoral enrolment awareness और verification भी महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है।

2.7 करोड़ को “गायब वोटर” कहना क्यों सही नहीं?

इस पूरे विवाद में सबसे महत्वपूर्ण बात यही है।

Projected adult population – registered voters = 2.7 करोड़ का calculation यह नहीं बताता कि 2.7 करोड़ eligible citizens के नाम जानबूझकर वोटर लिस्ट से बाहर रखे गए हैं।

Population projection में migration, demographic changes और अनुमान से जुड़ी सीमाएं हो सकती हैं। दूसरी ओर voter registration में citizenship, ordinary residence और statutory eligibility जैसी शर्तें लागू होती हैं।

इसलिए दोनों आंकड़ों के बीच अंतर को सीधे “missing voters” कहना उचित नहीं होगा।

हालांकि, इतना बड़ा gap यह जरूर संकेत देता है कि eligible citizens का enrolment सुनिश्चित करने की जरूरत गंभीरता से देखी जानी चाहिए।

SIR के बाद Electoral Roll पहले ही बड़े बदलाव से गुजर चुकी है

उत्तर प्रदेश की voter list में 2025–26 के Special Intensive Revision यानी SIR के दौरान भी बड़े पैमाने पर बदलाव हुए थे।

अप्रैल 2026 में प्रकाशित final electoral roll में राज्य में करीब 13.39 करोड़ electors दर्ज हुए थे, जबकि SIR से पहले संख्या लगभग 15.44 करोड़ थी। यानी करीब 2.04 करोड़ नाम final roll से हटे।

चुनाव अधिकारियों के अनुसार draft stage पर हटाए गए नामों में मृत्यु, migration और multiple registration जैसे कारण शामिल थे। Claims और objections की प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में नाम दोबारा जोड़े भी गए।

इस पृष्ठभूमि में 2.7 करोड़ का नया population-versus-elector gap राजनीतिक और चुनावी दोनों स्तरों पर खास महत्व रखता है।

अब आगे क्या होगा?

24 अक्टूबर के enrolment cut-off के बाद draft electoral roll 12 नवंबर 2026 को प्रकाशित होने का कार्यक्रम है। इसके बाद claims और objections की प्रक्रिया चलेगी।

जानकारी के अनुसार 12 नवंबर से 11 दिसंबर तक दावे और आपत्तियां दर्ज की जा सकेंगी। इसके बाद verification और disposal की प्रक्रिया के बाद 4 जनवरी 2027 को final electoral roll प्रकाशित किया जाना प्रस्तावित है।

इस दौरान जिन eligible citizens का नाम सूची में नहीं है, उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम होगा कि वे अपना नाम verify करें और जरूरत पड़ने पर Form 6 के जरिए enrolment के लिए आवेदन करें।

2027 चुनाव से पहले क्यों अहम है यह कवायद?

उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा विधानसभा वाला राज्य है और यहां करीब 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में Electoral Roll की accuracy सीधे चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़ जाती है।

एक तरफ चुनाव आयोग के सामने चुनौती है कि dead, shifted और duplicate entries को हटाकर सूची को साफ रखा जाए। दूसरी तरफ यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि कोई eligible citizen गलती, migration, documentation या verification की समस्या के कारण मतदान के अधिकार से वंचित न रह जाए।

यही संतुलन आने वाले महीनों में voter-list revision का सबसे बड़ा मुद्दा रहने वाला है।