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वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने का एक और मौका! दिल्ली समेत 6 राज्यों में SIR की डेडलाइन बढ़ी, नई तारीखें जारी

चुनाव आयोग ने दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और नागालैंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का कार्यक्रम बदला। दिल्ली में आवेदन के लिए 25 नवंबर तक समय, पांच राज्यों की अंतिम वोटर लिस्ट 30 नवंबर को जारी होगी।

वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने का एक और मौका! दिल्ली समेत 6 राज्यों में SIR की डेडलाइन बढ़ी, नई तारीखें जारी
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

मतदाता सूची में नाम जुड़वाने, गलत प्रविष्टियों में सुधार कराने या किसी नाम को लेकर आपत्ति दर्ज कराने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए राहत की खबर है। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) की समयसीमा में बदलाव किया है। आयोग ने दिल्ली समेत पांच राज्यों में मतदाता सूची से जुड़ी विभिन्न प्रक्रियाओं के लिए अतिरिक्त समय दिया है।

29 अक्टूबर 2026 को जारी संशोधित कार्यक्रम के तहत दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और नागालैंड में समयसीमाएं बदली गई हैं। हालांकि, सभी राज्यों के लिए एक जैसी तारीख लागू नहीं होगी। कहीं मतदाताओं को दावे और आपत्तियां दाखिल करने का अतिरिक्त समय मिला है, तो कहीं केवल नोटिस और सत्यापन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है।

दिल्ली में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की आखिरी तारीख अब 25 नवंबर 2026 होगी। वहीं, महाराष्ट्र में यह समयसीमा 13 नवंबर तक बढ़ाई गई है। पांच राज्यों की अंतिम मतदाता सूची 30 नवंबर को और दिल्ली की अंतिम सूची 22 दिसंबर को प्रकाशित की जाएगी।

दिल्ली के मतदाताओं को सबसे बड़ी राहत

दिल्ली में SIR के तहत दावे और आपत्तियां दाखिल करने की पहले निर्धारित अंतिम तारीख 30 अक्टूबर 2026 थी। चुनाव आयोग ने इसे बढ़ाकर 25 नवंबर 2026 कर दिया है। यानी मतदाताओं को अपने नाम की जांच करने और जरूरी आवेदन जमा करने के लिए करीब 26 दिन का अतिरिक्त समय मिल गया है।

इसके साथ ही दावों और आपत्तियों के निपटारे की अवधि भी बढ़ाई गई है। पहले यह प्रक्रिया 30 नवंबर तक पूरी होनी थी, लेकिन अब इसे 15 दिसंबर 2026 तक जारी रखा जाएगा।

दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची अब 22 दिसंबर 2026 को प्रकाशित होगी। इससे उन लोगों को अतिरिक्त अवसर मिलेगा जिनका नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं है या जिनकी प्रविष्टियों में सुधार की जरूरत है। 

छह राज्यों की नई समयसीमा: किसे कब तक मिलेगा मौका?

चुनाव आयोग ने अलग-अलग राज्यों के लिए संशोधित तारीखें तय की हैं। प्रमुख बदलाव इस प्रकार हैं:

राज्य

दावे और आपत्तियां दाखिल करने की तारीख

निपटारे की अंतिम तारीख

अंतिम मतदाता सूची

दिल्ली

25 नवंबर तक

15 दिसंबर

22 दिसंबर

महाराष्ट्र

13 नवंबर तक

25 नवंबर

30 नवंबर

हरियाणा

आवेदन की अवधि पहले बंद

20 नवंबर

30 नवंबर

आंध्र प्रदेश

आवेदन की अवधि पहले बंद

20 नवंबर

30 नवंबर

नागालैंड

आवेदन की अवधि पहले बंद

25 नवंबर

30 नवंबर

तेलंगाना

आवेदन की अवधि पहले बंद

26 नवंबर

30 नवंबर

इसका मतलब है कि हर राज्य के मतदाताओं को नया आवेदन करने का समान अवसर नहीं मिला है। दिल्ली और महाराष्ट्र में दावे-आपत्तियां दाखिल करने की अवधि बढ़ाई गई है, जबकि हरियाणा, आंध्र प्रदेश, नागालैंड और तेलंगाना में मुख्य रूप से पहले से दाखिल मामलों के नोटिस, जांच और निपटारे की समयसीमा बदली गई है। 

महाराष्ट्र में 13 नवंबर तक दाखिल कर सकेंगे दावे

महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अवधि पहले 26 अक्टूबर को समाप्त हो गई थी। अब चुनाव आयोग ने इसे बढ़ाकर 13 नवंबर 2026 कर दिया है।

इसके अलावा, नोटिस जारी करने और दावों-आपत्तियों के निपटारे की अंतिम तारीख 10 नवंबर से बढ़ाकर 25 नवंबर कर दी गई है।

इस बदलाव से उन मतदाताओं को राहत मिलेगी जो निर्धारित अवधि में अपने नाम या मतदाता सूची की प्रविष्टियों से जुड़ी शिकायतें दर्ज नहीं करा पाए थे। 

हरियाणा और आंध्र प्रदेश में 20 नवंबर तक सत्यापन

हरियाणा और आंध्र प्रदेश में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अवधि पहले ही समाप्त हो चुकी है। आयोग ने यहां नोटिस जारी करने और दावों-आपत्तियों के निपटारे की समयसीमा को 20 नवंबर 2026 तक बढ़ा दिया है।

दोनों राज्यों की अंतिम मतदाता सूची 30 नवंबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी।

इन राज्यों में अब मुख्य रूप से पहले से प्राप्त आवेदनों और आपत्तियों की जांच तथा उनके निपटारे पर ध्यान रहेगा। 

नागालैंड और तेलंगाना में भी बढ़ी समयसीमा

नागालैंड में दावों और आपत्तियों के निपटारे की अंतिम तारीख बढ़ाकर 25 नवंबर 2026 कर दी गई है।

वहीं, तेलंगाना में यह अवधि बढ़ाकर 26 नवंबर 2026 कर दी गई है। दोनों राज्यों की अंतिम मतदाता सूची 30 नवंबर को प्रकाशित होगी।

इस तरह आयोग ने छहों राज्यों में अंतिम प्रक्रिया पूरी करने के लिए अलग-अलग समयसीमाएं निर्धारित की हैं। 

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद दिल्ली में बढ़ी समयसीमा

दिल्ली में समयसीमा बढ़ाने का फैसला सुप्रीम कोर्ट की एक अहम टिप्पणी के एक दिन बाद आया। 28 अक्टूबर को अदालत ने चुनाव आयोग से कहा था कि दिल्ली के मतदाताओं के दावे और आवेदन स्वीकार करने के लिए किसी कठोर कट-ऑफ तारीख पर जोर न दिया जाए और संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन करते हुए आवेदन स्वीकार किए जाते रहें।

इसके बाद आयोग ने 29 अक्टूबर को दिल्ली के SIR कार्यक्रम में संशोधन किया। दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अवधि 30 अक्टूबर से बढ़ाकर 25 नवंबर कर दी गई। 

दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 47.56 लाख नाम बाहर

दिल्ली में SIR की प्रक्रिया के दौरान 31 अगस्त को प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब 47.56 लाख मतदाताओं के नाम शामिल नहीं थे। इसके बाद नाम जुड़वाने और रिकॉर्ड में सुधार के लिए बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए।

The Tribune की रिपोर्ट के मुताबिक, 28 अक्टूबर तक दिल्ली में नाम शामिल कराने के लिए Form-6 के कुल आवेदन लगभग 4.88 लाख पहुंच चुके थे। इसके अलावा नामों पर आपत्ति के लिए Form-7 और विवरण में बदलाव या पता स्थानांतरण के लिए Form-8 के आवेदन भी मिले।

यह आंकड़े इस बात को दिखाते हैं कि दिल्ली में मतदाता सूची की जांच और सुधार की प्रक्रिया को लेकर बड़ी संख्या में लोग आवेदन कर रहे हैं। हालांकि, ड्राफ्ट सूची से नाम बाहर होना अपने आप में किसी व्यक्ति को स्थायी रूप से मतदान के अधिकार से वंचित किए जाने का अंतिम निर्णय नहीं है; संबंधित व्यक्ति निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना दावा पेश कर सकता है।

मतदाता अपना नाम कैसे जुड़वाएं या सुधार कराएं?

मतदाता अपनी जरूरत के अनुसार चुनाव आयोग के निर्धारित फॉर्म का इस्तेमाल कर सकते हैं:

Form-6: मतदाता सूची में नया नाम शामिल कराने के लिए।

Form-7: किसी नाम को लेकर आपत्ति या नाम हटाने का अनुरोध दर्ज कराने के लिए।

Form-8: नाम, पता या अन्य विवरण में सुधार और पते के स्थानांतरण के लिए।

आवेदन करने से पहले मतदाताओं को अपनी विधानसभा क्षेत्र की ड्राफ्ट मतदाता सूची में नाम जरूर जांचना चाहिए। इसके लिए चुनाव आयोग के मतदाता सेवा पोर्टल और संबंधित राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट का इस्तेमाल किया जा सकता है।

दिल्ली के मतदाता आधिकारिक पोर्टल https://voters.eci.gov.in/ पर जाकर उपलब्ध सेवाओं के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की स्थिति और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी भी आधिकारिक पोर्टल पर जांची जा सकती है।

SIR की समयसीमा बढ़ाने के पीछे क्या उद्देश्य?

विशेष गहन पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना है, ताकि पात्र नागरिकों के नाम शामिल हों और अपात्र या गलत प्रविष्टियों की पहचान की जा सके।

समयसीमा बढ़ने से मतदाताओं को अपने रिकॉर्ड की जांच करने, जरूरी दस्तावेज जमा करने और आपत्तियों पर जवाब देने का अतिरिक्त अवसर मिलेगा। दूसरी ओर, निर्वाचन अधिकारियों को प्राप्त आवेदनों का सत्यापन और निपटारा करने के लिए भी अधिक समय मिलेगा।

हालांकि, SIR को लेकर राजनीतिक दलों के बीच विवाद और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के आरोप भी चर्चा में हैं। इसलिए इस प्रक्रिया में पारदर्शिता, सही सत्यापन और पात्र मतदाताओं को पर्याप्त अवसर देना महत्वपूर्ण रहेगा।

निष्कर्ष: चुनाव आयोग के नए फैसले से दिल्ली समेत पांच राज्यों के मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्यक्रम में बदलाव हुआ है। दिल्ली में नाम जुड़वाने और आपत्तियां दाखिल करने के लिए 25 नवंबर तक समय मिलेगा, जबकि महाराष्ट्र में यह तारीख 13 नवंबर है। हरियाणा, आंध्र प्रदेश, नागालैंड और तेलंगाना में निपटारे की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया है। मतदाताओं के लिए जरूरी है कि वे अपनी सूची में नाम जांचें और निर्धारित फॉर्म के जरिए समय रहते आवेदन करें।