लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची की शुद्धता और निर्वाचन संबंधी डिजिटल रिकॉर्ड की सुरक्षा को लेकर चुनाव विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों में तैनात 806 कंप्यूटर सहायकों की ECINET पोर्टल लॉगिन ID निष्क्रिय करने के निर्देश जारी किए गए हैं। यह कार्रवाई पीलीभीत और आजमगढ़ सहित कुछ जिलों में मतदाता सूची से जुड़ी प्रविष्टियों और लॉगिन क्रेडेंशियल के कथित दुरुपयोग की शिकायतों के बाद की जा रही है।
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने 31 अक्टूबर 2026 को सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) को निर्देश दिया कि वे अपने जिलों के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) कार्यालयों में मतदाता पंजीकरण केंद्रों पर कार्यरत कंप्यूटर सहायकों की लॉगिन ID तत्काल प्रभाव से बंद कराएं। संबंधित ERO को निष्क्रिय की गई ID की पुष्टि करनी होगी और जिला निर्वाचन अधिकारियों को कार्रवाई की रिपोर्ट मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय भेजनी होगी।
806 कंप्यूटर सहायकों की ID क्यों बंद की जा रही हैं?
निर्वाचन विभाग के अनुसार, कंप्यूटर सहायकों को पहले ECINET पोर्टल तक पहुंच इसलिए दी गई थी, क्योंकि कई बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को BLO ऐप पर काम करने का पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं था। कंप्यूटर सहायक मतदाता पंजीकरण केंद्रों पर ऑपरेटर के रूप में काम करते थे।
अब जब अधिकतर BLO को ऐप के इस्तेमाल का प्रशिक्षण मिल चुका है, तो मतदाता संबंधी फॉर्मों की प्रविष्टि और सत्यापन की जिम्मेदारी सीधे संबंधित BLO तथा अधिकृत निर्वाचन अधिकारियों के माध्यम से तय करने की व्यवस्था की जा रही है।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर मतदाता प्रविष्टि के लिए जिम्मेदार अधिकारी की पहचान स्पष्ट हो और अनधिकृत स्तर पर डेटा में बदलाव की आशंका कम की जा सके।
पीलीभीत में 13,779 फॉर्मों में मिलीं त्रुटियां
इस कार्रवाई के पीछे सबसे अहम मामला पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र संख्या 127 का है। प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, 31 मई से 29 अगस्त के बीच मतदाता सूची से जुड़े 13,779 फॉर्मों में त्रुटिपूर्ण प्रविष्टियां दर्ज की गईं। इनमें से 10,470 फॉर्म स्वीकृत भी कर दिए गए।
जांच में मतदाताओं और उनके पिता के नाम में बदलाव तथा EPIC नंबर से जुड़े विवरण में विसंगतियों की शिकायतें सामने आईं। एक ही मतदाता पहचान संख्या पर किसी दूसरे व्यक्ति का विवरण दिखाई देने की शिकायत भी जांच का विषय बनी।
पीलीभीत के कंप्यूटर सहायक पर भी कार्रवाई
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के निर्देश के मुताबिक, पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र के मामले में कथित रूप से शामिल आउटसोर्सिंग पर तैनात कंप्यूटर सहायक की सेवाएं तत्काल समाप्त करने के लिए संबंधित एजेंसी को कहा गया है।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि प्रदेश के सभी 806 कंप्यूटर सहायकों की लॉगिन ID बंद करने का आदेश है, सभी की नौकरी समाप्त करने का नहीं। सेवा समाप्ति का निर्देश पीलीभीत के मामले में संलिप्त बताए गए कंप्यूटर सहायक के लिए दिया गया है।
आजमगढ़ में भी सामने आईं संदिग्ध प्रविष्टियां
मतदाता सूची की जांच के दौरान आजमगढ़ में भी कथित विसंगतियों का मामला सामने आया है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, जांच में पांच मतदान केंद्रों पर 10 अलग-अलग मतदाताओं के नाम के सामने विकास यादव का नाम दर्ज होने की बात सामने आई। इस मामले को भी मतदाता रिकॉर्ड की शुद्धता से जुड़ी जांच के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
अब BLO के माध्यम से होंगे मतदाता फॉर्म से जुड़े काम
नई व्यवस्था के तहत संबंधित मतदान केंद्र का BLO ही अपने क्षेत्र के मतदाता पंजीकरण से जुड़े फॉर्म जमा करेगा। फॉर्म ऑनलाइन ECINET/BLO ऐप के माध्यम से या भौतिक रूप से प्राप्त किए जा सकते हैं। ERO अपने लॉगिन से पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे।
इस बदलाव से चुनावी रिकॉर्ड में जवाबदेही तय करने और डेटा में अनधिकृत बदलाव की संभावना कम करने की कोशिश की जा रही है। जिला निर्वाचन अधिकारियों को सभी विधानसभा क्षेत्रों में लॉगिन बंद होने की पुष्टि और अनुपालन रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
मतदाता सूची की पारदर्शिता पर बढ़ा प्रशासनिक जोर
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से जुड़ी त्रुटियों के मामले सामने आने के बाद निर्वाचन विभाग ने डिजिटल सुरक्षा और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने पर जोर बढ़ाया है। इस कार्रवाई का असर केवल कंप्यूटर सहायकों की पोर्टल पहुंच तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य मतदाता पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना भी है।
आने वाले दिनों में पीलीभीत सहित अन्य जिलों में संदिग्ध प्रविष्टियों की जांच और जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट होने के बाद आगे की कार्रवाई तय हो सकती है।