निजी अस्पतालों के ICU की होगी जांच
उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में निजी अस्पतालों की ICU व्यवस्था को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने सख्ती की तैयारी शुरू कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत जिले के निजी अस्पतालों में संचालित ICU की सुविधाओं और निर्धारित चिकित्सा मानकों की जांच की जाएगी।
5 नवंबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) भवन में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और निजी चिकित्सकों की बैठक हुई। इसमें मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विश्राम सिंह ने ICU संचालन के लिए निर्धारित मानकों का पालन जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि नियमों पर खरे नहीं उतरने वाले अस्पतालों के खिलाफ पंजीकरण निरस्त करने तक की कार्रवाई हो सकती है।
ICU के लिए लेवल-1 मानक जरूरी
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, ICU संचालित करने वाले निजी अस्पतालों को अब लेवल-1 ICU के मानकों का पालन करना होगा। इसके लिए अस्पतालों को नौ महीने की समय-सीमा दी गई है।
मानकों में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की पर्याप्त उपलब्धता प्रमुख है। रिपोर्ट के अनुसार:
- डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की भर्ती छह महीने के भीतर पूरी करनी होगी।
- प्रत्येक शिफ्ट में डॉक्टर की तैनाती सुनिश्चित करनी होगी।
- नर्स और मरीज का अनुपात लगभग 1:2 से 1:3 के बीच रखना होगा।
- ICU में उपलब्ध बेड और सुविधाओं का सही विवरण देना होगा।
इन शर्तों का उद्देश्य गंभीर मरीजों को समय पर चिकित्सा सहायता और सुरक्षित इलाज उपलब्ध कराना है।
तीन दिन में तैयार होगी निजी अस्पतालों की सूची
स्वास्थ्य विभाग को तीन दिन के भीतर ऐसे निजी अस्पतालों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं, जो किसी भी माध्यम से ICU सुविधा उपलब्ध कराने का दावा करते हैं।
इसमें वे अस्पताल भी शामिल होंगे जो:
- अपने पंजीकरण में ICU सुविधा दर्शाते हैं।
- अस्पताल के साइनबोर्ड या वेबसाइट पर ICU का उल्लेख करते हैं।
- विज्ञापन में ICU सेवा का प्रचार करते हैं।
- आयुष्मान भारत योजना में ICU सुविधा का दावा करते हैं।
- बीमा कंपनियों के पैनल में ICU सेवाएं उपलब्ध कराने की जानकारी देते हैं।
सूची में अस्पतालों के नाम के साथ ICU बेड की संख्या और घोषित सुविधाओं का विवरण भी दर्ज किया जाएगा। निरीक्षण के लिए एसीएमओ को नोडल अधिकारी बनाकर संयुक्त टीमें गठित की जाएंगी।
सिर्फ ICU नहीं, इन सुविधाओं की भी होगी जांच
निरीक्षण टीम अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा से जुड़ी कई व्यवस्थाओं की पड़ताल करेगी। इनमें संक्रमण नियंत्रण, हाथों की स्वच्छता के लिए स्टेशन, जैव चिकित्सा कचरे का निस्तारण, अग्निशमन उपकरण और आपातकालीन निकास की व्यवस्था शामिल है।
इसके अलावा अस्पतालों के मरीज रिकॉर्ड, मेडिकल ऑडिट, फार्मेसी, 24 घंटे ब्लड बैंक और एंबुलेंस की उपलब्धता भी जांची जाएगी।
यदि निरीक्षण के दौरान कमियां मिलती हैं तो अस्पताल प्रबंधन को नोटिस दिया जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, अस्पतालों को सात दिन के भीतर कमियां दूर करने के संबंध में लिखित जवाब और सुधार की जानकारी देनी होगी।
लेवल-2 और लेवल-3 ICU का दावा करने वालों को भी निर्देश
स्वास्थ्य विभाग ने उन अस्पतालों पर भी नजर रखने की बात कही है जो निर्धारित सुविधाएं और मानक पूरे किए बिना खुद को लेवल-2, लेवल-3 ICU, क्रिटिकल केयर सेंटर या सुपर स्पेशियलिटी ICU बताते हैं।
ऐसे अस्पतालों को 15 दिन के भीतर अपने साइनबोर्ड, वेबसाइट और प्रचार सामग्री में जरूरी बदलाव करने होंगे। निर्धारित मानक पूरे नहीं होने पर वे ICU के नाम से इकाई संचालित या उसका प्रचार नहीं कर सकेंगे।
आयुष्मान योजना में सूचीबद्ध अस्पतालों की निरीक्षण रिपोर्ट संबंधित राज्य स्वास्थ्य एजेंसी साचीज (SACHIS) को भी भेजी जाएगी।
निजी अस्पताल संचालकों ने बताईं व्यावहारिक चुनौतियां
IMA की बैठक में निजी चिकित्सकों ने नए मानकों को लागू करने में आने वाली व्यावहारिक परेशानियों का मुद्दा उठाया। IMA अध्यक्ष डॉ. डीपी गंगवार ने कहा कि गाइडलाइंस का उद्देश्य चिकित्सा सेवाओं और मरीजों की सुरक्षा बेहतर करना है, लेकिन इन्हें लागू करते समय अस्पतालों की सुविधाओं और स्थानीय परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना चाहिए।
IMA सचिव डॉ. मोहित अग्रवाल ने भी स्पष्ट दिशा-निर्देश और शंकाओं के समाधान की जरूरत बताई, ताकि अस्पताल नए नियमों का सही तरीके से पालन कर सकें।
मरीजों को क्या होगा फायदा?
इस जांच अभियान का सबसे बड़ा उद्देश्य ICU में भर्ती गंभीर मरीजों को बेहतर और सुरक्षित इलाज उपलब्ध कराना है। पर्याप्त डॉक्टर, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ, संक्रमण नियंत्रण, ऑक्सीजन और आपातकालीन सुविधाएं ICU उपचार के लिए बेहद जरूरी हैं।
यदि अस्पताल तय मानकों का पालन नहीं करते हैं तो उन्हें सुधार का अवसर मिलने के बाद नियमानुसार कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, अभी जिले के अस्पतालों की निरीक्षण रिपोर्ट और किसी अस्पताल का पंजीकरण रद्द किए जाने की नई पुष्टि सामने नहीं आई है।