ग्रामीण भारत में स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) फेज-II को मार्च 2028 तक आगे बढ़ाने का फैसला किया है। इस विस्तार से देश के उन गांवों को स्वच्छता के अगले स्तर तक पहुंचाने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा, जहां अभी तक ODF प्लस (Open Defecation Free Plus) के सभी मानक पूरे नहीं हो पाए हैं।
ध्यान देने वाली बात: उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, इस विस्तार को वित्त मंत्रालय की मंजूरी मिली है। इसे केंद्रीय मंत्रिमंडल का नया फैसला बताने की पुष्टि नहीं हुई है।
मार्च 2028 तक पूरा करना होगा लक्ष्य
मिशन के तहत शेष गांवों को 31 मार्च 2028 तक ODF प्लस प्रमाणन दिलाने का लक्ष्य रखा गया है। वित्त मंत्रालय के आदेश के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तारीख के बाद योजना को आगे बढ़ाने पर विचार नहीं किया जाएगा।
इसका मतलब है कि संबंधित विभागों और राज्य सरकारों को तय समय-सीमा के भीतर स्वच्छता से जुड़े अधूरे काम पूरे करने होंगे।
ODF प्लस का मतलब सिर्फ शौचालय नहीं
स्वच्छ भारत मिशन का दूसरा चरण केवल शौचालय निर्माण तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य गांवों में पहले से हासिल खुले में शौच मुक्त स्थिति को बनाए रखना और स्वच्छता की स्थायी व्यवस्था तैयार करना है।
ODF प्लस गांव के प्रमुख मानक हैं:
- गांव में खुले में शौच मुक्त स्थिति बरकरार रहे।
- ठोस कचरे के संग्रह और प्रबंधन की व्यवस्था हो।
- तरल कचरे और गंदे पानी के निस्तारण की उचित व्यवस्था हो।
- गांव का सार्वजनिक वातावरण और गलियां साफ-सुथरी रहें।
इसमें कचरा प्रबंधन, प्लास्टिक कचरे का निस्तारण, ग्रे-वॉटर प्रबंधन और गोबर से उपयोगी संसाधन तैयार करने जैसी गतिविधियां भी शामिल हैं।
अब तक कितने गांव ODF प्लस घोषित?
द इंडियन एक्सप्रेस की 4 नवंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, मिशन के डैशबोर्ड पर देश के 5.86 लाख गांवों में से 5.70 लाख गांव ODF प्लस घोषित किए जा चुके थे। यानी प्रकाशित आंकड़ों के हिसाब से लगभग 16 हजार गांवों को अभी यह दर्जा मिलना बाकी था।
बजट में भी मिलेगी अतिरिक्त गुंजाइश
रिपोर्ट के मुताबिक, इस विस्तार से केंद्र सरकार को वित्त वर्ष 2027-28 के केंद्रीय बजट में करीब 7,000 करोड़ रुपये का प्रावधान करने की गुंजाइश मिलेगी।
यहां दो आंकड़ों में अंतर समझना जरूरी है: वित्त वर्ष 2026-27 के लिए योजना के तहत 7,192 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जबकि करीब 7,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा 2027-28 के संभावित बजट प्रावधान से जुड़ा है। इसे पहले से खर्च हो चुकी राशि नहीं समझना चाहिए।
गांवों और पंचायतों की भूमिका अहम
योजना को जमीन पर लागू करने में ग्राम पंचायतों, जिला प्रशासन और राज्य सरकारों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। गांवों में कचरा संग्रह, निस्तारण, सामुदायिक स्वच्छता परिसरों के रखरखाव और लोगों की भागीदारी पर जोर रहेगा।
अब सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि केवल प्रमाणन हासिल करने के बजाय गांवों में स्वच्छता की व्यवस्था लंबे समय तक कायम रखी जाए। मार्च 2028 की समय-सीमा इसी दिशा में प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण लक्ष्य तय करती है।