उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में कथित धर्मांतरण, महिला डॉक्टरों के उत्पीड़न और धार्मिक गतिविधियों से जुड़े मामले में एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की जांच रिपोर्ट के हवाले से सामने आई नई मीडिया रिपोर्टों में आरोपी रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. रमीज के परिवार और कुछ धार्मिक प्रचारकों के बीच संपर्क होने का दावा किया गया है।
5 नवंबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, जांच में आरोप लगाया गया है कि डॉ. रमीज के माता-पिता सलीमुद्दीन और खतिजा कथित तौर पर कुछ मेडिकल छात्रों की मुलाकात लखनऊ के हुसैनाबाद इलाके में स्थित एक फ्लैट पर धार्मिक प्रचारकों से करवाते थे। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
माता-पिता और धार्मिक प्रचारकों के संपर्क की जांच
जांच रिपोर्ट के हवाले से दावा किया गया है कि कुछ मेडिकल छात्रों को धार्मिक गतिविधियों से जोड़ने के प्रयास किए गए। आरोप है कि छात्रों को हिंदू त्योहारों से दूर रहने और इस्लामिक त्योहारों तथा धार्मिक शिक्षाओं की ओर आकर्षित करने की कोशिश की जाती थी।
STF की जांच में इस कथित संपर्क व्यवस्था की भूमिका और उससे जुड़े लोगों के बारे में जानकारी जुटाई गई है। रिपोर्ट में परिवार के सदस्यों और धार्मिक प्रचारकों के बीच मुलाकातों का उल्लेख किया गया है।
2012 के कथित यौन शोषण का भी जिक्र
इस मामले में सामने आए एक अन्य गंभीर आरोप का संबंध वर्ष 2012 से बताया गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, STF दस्तावेज में एक छात्रा के साथ कथित यौन शोषण का उल्लेख है।
आरोप है कि डॉ. रमीज ने डांस प्रैक्टिस के बहाने छात्रा को अपने फ्लैट पर बुलाया और वहां उसके साथ गलत व्यवहार किया। रिपोर्ट में आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो बनाए जाने का भी दावा किया गया है।
इन आरोपों की सत्यता और उनसे संबंधित आपराधिक जिम्मेदारी का निर्धारण जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगा।
डॉ. रमीज की गिरफ्तारी और दूसरे आरोपी की भूमिका
इस पूरे प्रकरण में डॉ. रमीज पहले से ही पुलिस जांच के दायरे में हैं। उन पर KGMU की एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर को कथित रूप से रिश्ते में फंसाने, धर्म परिवर्तन और शादी के लिए दबाव बनाने के आरोप हैं।
इस मामले में लखनऊ के चौक थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था और 9 जनवरी 2026 को डॉ. रमीज की गिरफ्तारी हुई थी।
नई रिपोर्ट में उनके सहयोगी शारिक खान का भी उल्लेख है। आरोप है कि उसने आगरा की एक महिला डॉक्टर से जुड़े विवाह और धर्मांतरण प्रकरण में कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार किए थे। रिपोर्ट के अनुसार, शारिक को गिरफ्तार किया गया है।
KGMU के कई विभाग जांच के दायरे में
यह मामला केवल एक डॉक्टर तक सीमित नहीं है। STF की विस्तृत रिपोर्ट में विश्वविद्यालय के अलग-अलग विभागों से संबंधित शिकायतों और कथित गतिविधियों का उल्लेख किया गया है।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- पैथोलॉजी विभाग
- गांधी वार्ड
- माइक्रोबायोलॉजी विभाग
- रेडियोलॉजी विभाग
- विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़े कुछ अधिकारी और कर्मचारी
रिपोर्ट में महिला डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य महिला कर्मचारियों की शिकायतों का उल्लेख है। इनमें कथित उत्पीड़न, धर्म परिवर्तन के लिए दबाव, शिकायतों को दबाने और आरोपियों को संरक्षण देने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
शासन ने KGMU प्रशासन से मांगी कार्रवाई
STF की रिपोर्ट सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार के चिकित्सा शिक्षा विभाग ने KGMU प्रशासन को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
30 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र में विश्वविद्यालय के कुलसचिव से KGMU अधिनियम, 2002 और विश्वविद्यालय की परिनियमावली, 2011 के तहत संबंधित डॉक्टरों और कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा गया था।
विश्वविद्यालय के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह के अनुसार, प्रशासन मामले की समीक्षा कर रहा है और निर्देशों के अनुसार आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
वहीं, विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने 6 नवंबर को कार्यकारी परिषद (Executive Council) की बैठक बुलाई है, जिसमें STF रिपोर्ट पर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई पर विचार किया जाना है।
अब आगे क्या होगा?
KGMU मामले में अब तीन स्तरों पर कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी:
1. STF रिपोर्ट में दर्ज आरोपों की विभागीय और प्रशासनिक जांच।
2. संबंधित डॉक्टरों और कर्मचारियों की भूमिका की अलग-अलग समीक्षा।
3. आपराधिक मामलों में पुलिस जांच और अदालत की प्रक्रिया।
इस मामले में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि STF रिपोर्ट में दर्ज आरोप अपने आप में दोषसिद्धि नहीं हैं। संबंधित व्यक्तियों को अपना पक्ष रखने और कानूनी प्रक्रिया का अधिकार है।