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KGMU में STF रिपोर्ट पर बड़ा कदम: 13 डॉक्टरों के नाम जांच के दायरे में, छह सदस्यीय अनुशासनात्मक समिति गठित

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी की कार्यपरिषद ने कथित उत्पीड़न और धर्मांतरण के दबाव से जुड़े आरोपों की जांच के लिए छह सदस्यीय समिति बनाने का फैसला किया है। समिति STF की रिपोर्ट, दस्तावेजों और संबंधित डॉक्टरों-कर्मचारियों के पक्ष की जांच करेगी।

KGMU में STF रिपोर्ट पर बड़ा कदम: 13 डॉक्टरों के नाम जांच के दायरे में, छह सदस्यीय अनुशासनात्मक समिति गठित

कार्यपरिषद की बैठक में लिया गया फैसला
लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में कर्मचारियों और डॉक्टरों पर लगे गंभीर आरोपों को लेकर प्रशासन ने कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है। शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद की अध्यक्षता में हुई कार्यपरिषद की बैठक में उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की जांच रिपोर्ट पर चर्चा की गई।

बैठक के बाद रिपोर्ट की जांच और संभावित अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश के लिए छह सदस्यीय डिसिप्लिनरी एक्शन कमेटी गठित करने का निर्णय लिया गया।

समिति में कौन-कौन होगा शामिल?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, समिति में ये सदस्य होंगे:
- KGMU की कुलपति
- विश्वविद्यालय के कुलसचिव
- विश्वविद्यालय के दो वरिष्ठ शिक्षक
- दो स्वतंत्र वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी
स्वतंत्र सदस्यों के लिए वरिष्ठ पदों से सेवानिवृत्त IPS अधिकारियों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया है। समिति STF रिपोर्ट में दर्ज तथ्यों, दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा करेगी।

13 डॉक्टरों के नाम रिपोर्ट में, छह पर कार्रवाई की चर्चा
अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, STF रिपोर्ट में 13 डॉक्टरों के नाम शामिल हैं। वहीं दैनिक जागरण ने सूत्रों के हवाले से बताया कि जांच के दायरे में कुल 13 लोग हैं और इनमें से छह के खिलाफ महत्वपूर्ण साक्ष्य मिलने की बात कही गई है। इनमें पैथोलॉजी विभाग के अध्यक्ष और दो डॉक्टरों के नाम भी चर्चा में हैं। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निर्णय समिति की जांच के बाद ही होगा।

STF रिपोर्ट में क्या आरोप लगाए गए?
STF की रिपोर्ट में KGMU के कुछ विभागों में महिला जूनियर डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों के कथित उत्पीड़न, अनुचित व्यवहार और धर्मांतरण के दबाव से जुड़ी शिकायतों का उल्लेख है। रिपोर्ट में यह आरोप भी बताया गया है कि कुछ वरिष्ठ कर्मचारियों ने शिकायतों पर कार्रवाई करने के बजाय आरोपितों को संरक्षण दिया और शिकायतकर्ताओं को चुप कराने की कोशिश की।

ये जांच रिपोर्ट में दर्ज आरोप और निष्कर्ष हैं, अदालत से साबित हुए तथ्य नहीं।

संबंधित पक्षों को भी रखा जाएगा अपनी बात रखने का मौका
कार्यपरिषद की बैठक में कुछ शिक्षकों और कर्मचारियों की ओर से दिए गए प्रत्यावेदन भी रखे गए। उन्होंने रिपोर्ट में नाम शामिल किए जाने और कुछ टिप्पणियों की सत्यता पर सवाल उठाए हैं। विश्वविद्यालय ने इन आपत्तियों को संबंधित विभागीय समितियों के सामने रखने का निर्णय लिया है।

KGMU प्रशासन के अनुसार, अनुशासनात्मक समिति संबंधित लोगों का पक्ष सुनने के साथ दस्तावेजों और साक्ष्यों की स्वतंत्र समीक्षा करेगी। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, समिति को सात दिन के भीतर जांच पूरी कर शासन को रिपोर्ट भेजने की जिम्मेदारी दी गई है।

सरकार ने भी मांगी है कार्रवाई की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश सरकार ने 30 अक्टूबर को KGMU प्रशासन को STF रिपोर्ट में नामित लोगों के संबंध में KGMU अधिनियम, 2002 और विश्वविद्यालय के नियमों के तहत कार्रवाई करने और कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। अब समिति की जांच के बाद तय होगा कि किन लोगों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की जाती है।