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क्या गोमती की तेज धारा में बह गए दो दोस्त? 16 गोताखोरों की तलाश के बावजूद जुहैब और हुसैन का सुराग नहीं

लखनऊ के गोसाईंगंज क्षेत्र के गौरिया खुर्द में नाव डगमगाने के बाद नदी में गिरे थे तीन युवक। एक सुरक्षित बाहर निकल आया, जबकि दो दोस्तों की तलाश दूसरे दिन भी जारी रही।

क्या गोमती की तेज धारा में बह गए दो दोस्त? 16 गोताखोरों की तलाश के बावजूद जुहैब और हुसैन का सुराग नहीं
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

लखनऊ में गोमती नदी में डूबे दो युवकों की तलाश को लेकर परिवारों की चिंता बढ़ती जा रही है। गोसाईंगंज थाना क्षेत्र के गौरिया खुर्द में नदी के भीतर लापता हुए जुहैब और हुसैन का 29 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, हादसे के दूसरे दिन बुधवार तक कोई सुराग नहीं मिल सका था। उनकी तलाश के लिए राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीम और 16 गोताखोरों ने अभियान चलाया, लेकिन दिनभर की कोशिशों के बावजूद सफलता नहीं मिली।

कैसे हुआ हादसा?

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, घटना मंगलवार, 27 अक्टूबर को हुई। पुराना हैदरगंज निवासी युवक अपने रिश्तेदार के घर गौरिया कला आया हुआ था। इसी दौरान उसके दोस्त भी उससे मिलने पहुंचे। बाद में सभी गोमती नदी की ओर चले गए।

बताया गया कि नदी के पास तीन युवक छोटी नाव पर बैठकर सेल्फी लेने लगे। इसी दौरान नाव का संतुलन बिगड़ गया और तीनों नदी में गिर गए। इनमें से एक युवक किसी तरह तैरकर बाहर निकल आया, लेकिन जुहैब और हुसैन नदी में डूब गए। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस और बचाव दल ने तलाश शुरू की। 

16 गोताखोरों ने किन इलाकों में तलाश की?

लापता युवकों को खोजने के लिए एसडीआरएफ और गोताखोरों ने नदी के अलग-अलग हिस्सों में अभियान चलाया। रिपोर्ट के अनुसार, तलाशी का दायरा गौरिया खुर्द से तीरगांव, धौरहरा, सलेमपुर और जौरस तक बढ़ाया गया।

बचाव दल ने संभावित स्थानों पर तलाश की, लेकिन दोनों युवकों का पता नहीं चल सका। स्थानीय लोगों और परिजनों को उनके मिलने की उम्मीद बनी हुई थी। 

पहले दिन अंधेरा होने पर रोकना पड़ा था अभियान

रिपोर्ट के अनुसार, घटना वाले दिन भी शाम तक तलाश जारी रही। स्थानीय निवासी समरपाल सिंह यादव ने बताया कि मंगलवार शाम करीब 7:50 बजे तक खोजबीन की गई। अंधेरा होने और ठंड बढ़ने के कारण अभियान रोकना पड़ा।

इसके बाद बुधवार को फिर से बड़े स्तर पर तलाशी की गई। गोसाईंगंज के एसीपी ऋषभ यादव के मुताबिक, बचाव दल ने पूरे दिन प्रयास किए, लेकिन दोनों युवकों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी।

नदी में सुरक्षा को लेकर फिर उठे सवाल

इस घटना ने नदी के पास नाव पर बैठने और पानी के नजदीक सेल्फी लेने के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत को एक बार फिर सामने रखा है। नाव का संतुलन बिगड़ने पर कुछ ही क्षणों में स्थिति गंभीर हो सकती है, खासकर जब आसपास पानी गहरा हो या नदी का बहाव तेज हो।

नदी के किनारे जाने वाले लोगों को स्थानीय सुरक्षा निर्देशों का पालन करना चाहिए और असुरक्षित नाव पर बैठने या जोखिम भरी सेल्फी लेने से बचना चाहिए। पानी में किसी व्यक्ति के गिरने पर बिना प्रशिक्षण के खुद नदी में कूदने के बजाय तुरंत पुलिस और प्रशिक्षित बचाव दल को सूचना देना अधिक सुरक्षित है।

अब आगे क्या?

29 अक्टूबर को उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, तलाशी अभियान के दूसरे दिन तक जुहैब और हुसैन का पता नहीं चला था। उनके मिलने या अभियान के आगे के परिणाम के बारे में कोई बाद की पुष्टि उपलब्ध हुए बिना यह दावा नहीं किया जा सकता कि उन्हें बरामद कर लिया गया है।

फिलहाल इस खबर का सबसे अहम अपडेट यही है कि 16 गोताखोरों और एसडीआरएफ की टीम की कोशिशों के बावजूद दोनों युवकों का सुराग नहीं मिला था। आगे की स्थिति के लिए पुलिस या प्रशासन की आधिकारिक जानकारी की पुष्टि जरूरी होगी।