लखनऊ में आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने, रेबीज के खतरे को कम करने और पशु कल्याण के मानकों को मजबूत करने की दिशा में एक नई पहल की गई है। इंदिरानगर के जरहरा स्थित पशु चिकित्सालय परिसर में देश का पहला व्यापक सार्वजनिक एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) प्रशिक्षण केंद्र शुरू किया गया है। इस केंद्र का उद्घाटन 28 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश के नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा ने किया।
इस सुविधा का उद्देश्य सिर्फ लखनऊ में कुत्तों की नसबंदी कराना नहीं, बल्कि देशभर के नगर निकायों और पशु कल्याण से जुड़ी संस्थाओं के कर्मचारियों को वैज्ञानिक तथा मानवीय तरीके से काम करने का प्रशिक्षण देना भी है। केंद्र में पशु चिकित्सकों, पैरा-वेटरिनरी कर्मचारियों, हाल में पशु चिकित्सा की पढ़ाई पूरी करने वाले युवाओं और कुत्तों को पकड़ने तथा उनकी देखभाल करने वाले कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
उद्घाटन कार्यक्रम में क्या कहा गया?
केंद्र का उद्घाटन नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा ने किया, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल ने की। कार्यक्रम में नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी, पशु चिकित्सक और पशु कल्याण क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
मंत्री ने कहा कि पशु कल्याण और नागरिक सुरक्षा को साथ लेकर चलना जरूरी है। उनके अनुसार, प्रशिक्षित कर्मचारियों और वैज्ञानिक प्रक्रियाओं से कुत्तों की आबादी के प्रबंधन, नसबंदी और टीकाकरण के काम को बेहतर बनाया जा सकता है।
यह केंद्र लखनऊ नगर निगम, Animal Welfare Board of India (AWBI) और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच हुए त्रिपक्षीय समझौते के तहत स्थापित किया गया है। प्रशिक्षण का संचालन Humane World for Animals India करेगा, जो सितंबर 2019 से लखनऊ के कुत्ता जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रम में नगर निगम के साथ काम कर रहा है।
केंद्र में क्या-क्या सुविधाएं होंगी?
प्रशिक्षण केंद्र को इस तरह तैयार किया गया है कि कर्मचारियों को कक्षा में सैद्धांतिक जानकारी देने के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा सके।
इसमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
दो ऑपरेशन टेबल वाला ऑपरेशन थिएटर, जहां नसबंदी प्रक्रिया से संबंधित प्रशिक्षण दिया जा सकेगा।
ऑपरेशन से पहले की तैयारी के लिए अलग कमरा।
प्रशिक्षण और कक्षाओं के लिए दो क्लासरूम।
बैठकों, चर्चा और अनुभव साझा करने के लिए कॉन्फ्रेंस रूम।
एक बार में लगभग 30 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण देने की क्षमता।
इन सुविधाओं का उद्देश्य प्रशिक्षण को नियमित और व्यवस्थित बनाना है, ताकि अलग-अलग नगर निकायों के कर्मचारी एक समान मानकों के अनुसार काम कर सकें।
15 दिन की ट्रेनिंग में क्या सिखाया जाएगा?
केंद्र में प्रशिक्षण कार्यक्रम 15 दिनों का होगा। इसमें कक्षा आधारित शिक्षा के साथ व्यावहारिक अभ्यास भी शामिल रहेगा। प्रशिक्षण को Animal Birth Control Rules, 2023 के अनुरूप तैयार किया गया है।
इस दौरान प्रतिभागियों को कई महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी जाएगी:
कुत्तों को सुरक्षित और मानवीय तरीके से पकड़ना तथा संभालना।
नसबंदी से पहले पशु की स्वास्थ्य जांच और ऑपरेशन की तैयारी।
एनेस्थीसिया तथा नसबंदी की मानक प्रक्रियाएं।
ऑपरेशन के बाद देखभाल और रिकवरी के दौरान निगरानी।
एंटी-रेबीज टीकाकरण और पशु स्वास्थ्य प्रबंधन।
केनेल प्रबंधन, रिकॉर्ड रखना और डेटा प्रबंधन।
पशु जन्म नियंत्रण नियमों का अनुपालन और समुदाय के साथ समन्वय।
इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य यह है कि नसबंदी और टीकाकरण के दौरान पशुओं को अनावश्यक तकलीफ न हो तथा पूरी प्रक्रिया निर्धारित मानकों के अनुसार की जाए।
प्रशिक्षण के लिए कितना शुल्क देना होगा?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रशिक्षण के लिए प्रतिभागियों की श्रेणी के हिसाब से शुल्क निर्धारित किया गया है।
प्रतिभागी की श्रेणी
प्रशिक्षण शुल्क
पशु चिकित्सक
₹5,000
पैरा-वेटरिनरी कर्मचारी
₹1,500
एनिमल हैंडलर
₹1,000
इच्छुक अभ्यर्थी आवेदन पत्र लखनऊ नगर निगम की आधिकारिक वेबसाइट lmc.up.nic.in से डाउनलोड कर सकते हैं। आवेदन करने से पहले संबंधित प्रशिक्षण बैच, पात्रता, उपलब्ध सीटों और फीस से जुड़ी ताजा जानकारी की पुष्टि करना उचित होगा।
लखनऊ में अब तक कितने कुत्तों की नसबंदी हुई?
लखनऊ नगर निगम और Humane World for Animals India सितंबर 2019 से कुत्तों की आबादी नियंत्रित करने के कार्यक्रम पर काम कर रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस कार्यक्रम के तहत अब तक 1.08 लाख से अधिक कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है।
दिसंबर 2025 में किए गए शहरव्यापी सर्वे के मुताबिक, लखनऊ के अनुमानित सड़क पर रहने वाले कुत्तों में से लगभग 80.5 प्रतिशत की नसबंदी और टीकाकरण किया जा चुका था। संस्था ने इस आंकड़े को अपने कार्यक्रम की प्रगति के रूप में प्रस्तुत किया है।
इसके अतिरिक्त, लखनऊ नगर निगम ने जून 2026 से कुत्तों की माइक्रोचिपिंग भी शुरू की थी। माइक्रोचिप के जरिए पशुओं की पहचान और संबंधित रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखने में सहायता मिल सकती है। इससे कार्यक्रम की निगरानी और डेटा प्रबंधन को बेहतर बनाने का उद्देश्य है।
आवारा कुत्तों की समस्या के लिए नसबंदी क्यों महत्वपूर्ण है?
शहरों में सड़क पर रहने वाले कुत्तों की आबादी का प्रबंधन सार्वजनिक स्वास्थ्य और पशु कल्याण, दोनों से जुड़ा मुद्दा है। बिना योजना के कार्रवाई करने के बजाय वैज्ञानिक तरीके से नसबंदी, टीकाकरण, रिकॉर्ड प्रबंधन और समुदाय के साथ समन्वय करना अधिक व्यवस्थित दृष्टिकोण माना जाता है।
नसबंदी से कुत्तों की संख्या में समय के साथ बढ़ोतरी को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है, जबकि एंटी-रेबीज टीकाकरण रेबीज नियंत्रण की रणनीति का अहम हिस्सा है। हालांकि, किसी एक केंद्र के खुलने से तुरंत पूरे शहर में समस्या खत्म नहीं हो जाएगी। इसके लिए लगातार अभियान, प्रशिक्षित कर्मियों की उपलब्धता, पशु चिकित्सा सुविधाएं और नियमित निगरानी आवश्यक हैं।
प्रशिक्षण केंद्र का एक बड़ा उद्देश्य यही है कि कर्मचारियों को केवल प्रक्रियाओं की जानकारी ही न हो, बल्कि पशुओं को सुरक्षित तरीके से संभालने, ऑपरेशन के बाद देखभाल करने और नियमों का पालन करने का व्यावहारिक अनुभव भी मिले।
क्या दूसरे शहरों को भी मिलेगा फायदा?
इस केंद्र को राष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षण सुविधा के रूप में विकसित करने की योजना है। दूसरे राज्यों और नगर निकायों से जुड़े पशु चिकित्सक तथा कर्मचारी यहां आकर प्रशिक्षण ले सकते हैं। इससे उन शहरों को मदद मिल सकती है, जहां पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम चलाने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों और मानकीकृत प्रक्रियाओं की कमी है।
हालांकि, केंद्र की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कितने कर्मचारी प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं, वे अपने शहरों में किस तरह काम करते हैं और नसबंदी व टीकाकरण के परिणामों की नियमित निगरानी कैसे होती है।
निष्कर्ष: इंदिरानगर के जरहरा में ABC प्रशिक्षण केंद्र की शुरुआत लखनऊ के पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। 15 दिन के प्रशिक्षण, ऑपरेशन थिएटर और व्यावहारिक सुविधाओं के जरिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने का लक्ष्य है। अब सबसे महत्वपूर्ण बात होगी कि इस पहल से शहरों में पशु कल्याण, रेबीज नियंत्रण और सड़क पर रहने वाले कुत्तों के वैज्ञानिक प्रबंधन में कितना स्थायी सुधार आता है।