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लखनऊ के सिविल हॉस्पिटल में 35 सेमी ट्यूमर हटाया, मातृत्व की संभावना बचाई

29 साल की महिला के गर्भाशय को बचाते हुए डॉक्टरों ने 3.5 किलो का ट्यूमर निकाला।

अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में सर्जिकल टीम सर्जरी कर रही है
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

लखनऊ में शयामा प्रसाद मुखर्जी (सिविल) हॉस्पिटल की डॉक्टरों की टीम ने 29 साल की महिला से 3.5 किलो वजन का ट्यूमर निकाला है। ऑपरेशन में महिला के गर्भाशय को सुरक्षित रखा गया, जिससे उसे भविष्य में माँ बनने का मौका मिल सकेगा।

ट्यूमर 35 सेंटीमीटर लंबा, 20 सेंटीमीटर चौड़ा और 15 सेंटीमीटर गहरा था। यह गर्भाशय के आकार का लगभग पाँच गुना बड़ा था। ट्यूमर ब्रॉड लिगामेंट में था, जो गर्भाशय को सहारा देने वाले ऊतक हैं।

इस ट्यूमर के कारण दोनों यूरेटर्स, प्रमुख रक्त वाहिकाएँ और एक अंडाशय दबे हुए थे। इससे किडनी से मूत्र बाहर आने में रुकावट आ रही थी, जिसके कारण किडनी में सूजन आ गई थी।

महिला को निचले पेट में लगातार दर्द और पेट में सूजन का सामना करना पड़ रहा था। 22 अगस्त को हॉस्पिटल में भर्ती होने के बाद सीटी स्कैन से ट्यूमर की पुष्टि हुई।

टेस्ट में पता चला कि महिला को गंभीर रक्ताल्पता है। उसके रक्त में हीमोग्लोबिन 6.5 ग्राम प्रति डेसीलीटर था। ऑपरेशन से पहले उसे स्थिर करने के लिए तीन यूनिट खून चढ़ाया गया।

जटिल ऑपरेशन

सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ अनंद मिश्रा ने बताया कि ट्यूमर को इलिएक रक्त वाहिकाओं से खून मिल रहा था। यह गर्भाशय से गहराई से जुड़ा था, जिससे इसे निकालना मुश्किल था और ज़्यादा खून बहने का खतरा था।

डॉक्टरों ने ब्रॉड लिगामेंट माइओमेक्टोमी की प्रक्रिया अपनाई। इसमें ट्यूमर को निकाते समय आसपास की संरचनाओं को सुरक्षित रखा गया।

26 अगस्त को यह ऑपरेशन किया गया। जूनियर रेजिडेंट डॉ विनोद कुमार वर्मा और डॉ सचिन कुमार ने सर्जरी में सहायता की। एनेस्थिसियाविद डॉ एसके सिंह और डॉ मोहम्मद क़ासिम ने एनेस्थीशिया का प्रबंध किया।

महिला के कोई बच्चे नहीं हैं। ऑपरेशन के बाद शनिवार को स्थिर हालत में उसे छुट्टी दे दी गई। हॉस्पिटल के निदेशक डॉ जीपी गुप्ता ने पूरी टीम को बधाई दी।