लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद निर्वाचन विभाग ने पूरे प्रदेश में बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने 31 अक्टूबर 2026 को सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) को निर्देश दिया कि प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों में वोटर रजिस्ट्रेशन सेंटर पर तैनात कंप्यूटर सहायकों की ECINET पोर्टल लॉगिन आईडी तत्काल निष्क्रिय कर दी जाए।
इस आदेश का उद्देश्य मतदाता सूची में अनधिकृत बदलाव रोकना, लॉगिन व्यवस्था को सुरक्षित बनाना और प्रत्येक मतदाता रिकॉर्ड में संशोधन की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों तक सीमित करना है।
पीलीभीत में कैसे सामने आया मामला?
विवाद पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र संख्या 127 की मतदाता सूची से जुड़ा है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की ओर से शिकायत की गई थी कि मतदाता सूची में कई मतदाताओं के विवरण में कथित रूप से गड़बड़ी हुई है। कुछ मामलों में एक मतदाता के EPIC नंबर पर दूसरे व्यक्ति का विवरण दिखाई देने की शिकायत भी सामने आई।
जांच में पता चला कि 31 मई से 29 अगस्त 2026 के बीच एक कंप्यूटर सहायक ने ECINET पोर्टल पर 13,779 फॉर्म-8 आवेदन दर्ज किए थे। इन आवेदनों का इस्तेमाल मतदाता सूची में नाम, पते और अन्य विवरणों में संशोधन के लिए किया जाता है।
जांच के अनुसार:
- कुल दर्ज आवेदन: 13,779
- स्वीकृत आवेदन: 10,470
- अस्वीकृत आवेदन: 3,309
- स्वीकृत आवेदनों से संबंधित मूल आवेदन फॉर्म और सहायक दस्तावेज कार्यालय में उपलब्ध नहीं मिले।
निर्वाचन अधिकारियों ने स्वीकृत प्रविष्टियों को अनियमित पाया। हालांकि, इन मामलों में जिम्मेदारी और कानूनी दोष का अंतिम निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगा।
पूरे प्रदेश में 806 ऑपरेटरों की आईडी बंद
पीलीभीत की घटना के बाद निर्वाचन विभाग ने केवल एक जिले तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी। आदेश प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों के निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी कार्यालयों में लागू किया गया है।
हर विधानसभा क्षेत्र में दो कंप्यूटर सहायक तैनात होने के हिसाब से प्रदेश में लगभग 806 ऑपरेटरों की ECINET लॉगिन आईडी निष्क्रिय करने के निर्देश दिए गए हैं।
जिला निर्वाचन अधिकारियों को कहा गया है कि वे:
- सभी संबंधित ऑपरेटरों की लॉगिन आईडी बंद कराएं।
- संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO) से इसकी पुष्टि लें।
- हर विधानसभा क्षेत्र में कार्रवाई का स्वयं सत्यापन करें।
- अनुपालन रिपोर्ट मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय को भेजें।
अब मतदाता सूची में संशोधन कौन करेगा?
लॉगिन आईडी बंद होने का मतलब यह नहीं है कि मतदाता सूची में संशोधन का काम रोक दिया गया है। अब मतदाताओं के विवरण में बदलाव की प्रक्रिया में बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) और संबंधित निर्वाचन अधिकारियों की भूमिका बढ़ाई गई है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित बूथ के BLO को अपने क्षेत्र के मतदाता आवेदन और संशोधन से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। ERO अपने लॉगिन से प्रक्रिया की निगरानी कर सकेंगे। कंप्यूटर सहायकों को कार्यालय के दूसरे लिपिकीय काम जारी रखने की अनुमति रहेगी, लेकिन वे अपनी पुरानी आईडी से ECINET पर मतदाता संबंधी कार्रवाई नहीं कर सकेंगे।
कंप्यूटर ऑपरेटर के साथ अधिकारियों पर भी कार्रवाई
पीलीभीत मामले में निर्वाचन विभाग ने आउटसोर्सिंग एजेंसी को संबंधित कंप्यूटर सहायक अनिल कुमार की सेवाएं समाप्त करने का निर्देश दिया।
इसके अलावा भारत निर्वाचन आयोग ने 2 नवंबर को पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र के दो निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी को निलंबित करने तथा उनके खिलाफ FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए। आयोग ने मतदाता सूची की अन्य प्रविष्टियों की भी जांच कराने को कहा है।
अब पूरे यूपी की मतदाता सूची की जांच पर जोर
इस मामले का असर केवल पीलीभीत तक सीमित नहीं है। निर्वाचन आयोग ने प्रदेश के जिला निर्वाचन अधिकारियों और ERO को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में मतदाता सूची की जांच करें। खास तौर पर फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 के जरिए हुए नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन की प्रविष्टियों पर ध्यान देने को कहा गया है।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी योग्य मतदाता का नाम गलत तरीके से न हटे और किसी दूसरे व्यक्ति के विवरण में अनधिकृत बदलाव न हो।
आने वाले समय में इस जांच के नतीजे उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची की विश्वसनीयता और 2027 विधानसभा चुनावों की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण होंगे।