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यूपी की वोटर लिस्ट में महिलाओं की बड़ी कमी, 1.21 करोड़ का अंतर दूर करने के लिए चलेगा अभियान

2027 विधानसभा चुनाव से पहले महिला मतदाताओं का पंजीकरण बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। आशा कार्यकर्ताओं, ANM, आंगनबाड़ी कर्मियों और स्वयं सहायता समूहों की मदद से छूटी हुई पात्र महिलाओं की पहचान होगी।

यूपी की वोटर लिस्ट में महिलाओं की बड़ी कमी, 1.21 करोड़ का अंतर दूर करने के लिए चलेगा अभियान
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

पुरुषों और महिलाओं के मतदाताओं में बड़ा अंतर
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची में महिला और पुरुष मतदाताओं की संख्या के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। निर्वाचन आयोग के 7 अक्टूबर 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में कुल 13.47 करोड़ पंजीकृत मतदाता थे।

इनमें लगभग 7.34 करोड़ पुरुष और 6.13 करोड़ महिला मतदाता शामिल थीं। यानी पुरुषों की तुलना में महिला मतदाताओं की संख्या करीब 1.21 करोड़ कम थी। इसके अलावा 4,082 तृतीय लिंग के मतदाता भी दर्ज थे।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने दिए विशेष अभियान के निर्देश
इस अंतर को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को पात्र महिलाओं का पंजीकरण बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

अधिकारियों से कहा गया है कि ऐसे क्षेत्रों और परिवारों की पहचान की जाए, जहां पात्र महिलाओं के नाम अभी विधानसभा मतदाता सूची में शामिल नहीं हैं। इस काम के लिए स्थानीय स्तर पर काम करने वाली महिला कार्यकर्ताओं और स्वयं सहायता समूहों की मदद ली जाएगी।

आशा, ANM और समूह सखियां घर-घर करेंगी संपर्क
महिला मतदाताओं की पहचान और पंजीकरण के लिए कई स्तरों पर अभियान चलाने की तैयारी है। इसमें प्रमुख रूप से शामिल होंगी:
- आशा कार्यकर्ता: अपने क्षेत्र में पात्र महिलाओं की पहचान करेंगी।
- ANM: स्वास्थ्य सेवाओं के दौरान महिलाओं को मतदाता पंजीकरण की जानकारी देंगी।
- आंगनबाड़ी कार्यकर्ता: परिवारों से संपर्क कर छूटे हुए नामों की जानकारी जुटाएंगी।
- स्वयं सहायता समूह: समूहों से जुड़ी महिलाओं को पंजीकरण के लिए प्रोत्साहित करेंगे।
- समूह सखियां: ग्रामीण क्षेत्रों में पात्र महिलाओं तक जानकारी पहुंचाने में सहयोग करेंगी।
इनके माध्यम से पात्र महिलाओं को मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए Form-6 भरने में मदद दी जाएगी।

क्या 1.21 करोड़ महिलाएं वोट देने से वंचित हैं?
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। पुरुषों और महिलाओं की पंजीकृत संख्या के बीच 1.21 करोड़ का अंतर है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि इतनी ही महिलाएं मतदान के अधिकार से वंचित हैं।

अलग-अलग आयु वर्ग, जनसंख्या संरचना, प्रवास और पात्रता जैसे कारण भी मतदाता संख्या को प्रभावित करते हैं। निर्वाचन विभाग का उद्देश्य पात्र लेकिन सूची से छूटी महिलाओं की पहचान करना है। इसलिए इस आंकड़े को सीधे अपंजीकृत महिला मतदाताओं की संख्या नहीं माना जाना चाहिए।

2027 चुनाव से पहले महिला मतदाताओं की भूमिका अहम
उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में महिला मतदाताओं की सही संख्या और उनका पंजीकरण राजनीतिक दलों के साथ-साथ निर्वाचन प्रशासन के लिए भी महत्वपूर्ण है।

महिलाओं के नाम मतदाता सूची में शामिल होने से उनकी चुनावी भागीदारी सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। साथ ही निर्वाचन आयोग को प्रदेश की वास्तविक मतदाता संरचना का अधिक स्पष्ट आकलन करने में सहायता मिलेगी।