मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को महिलाओं के साथ छेड़छाड़ करने वालों को कड़ी चेतावनी दी। लखनऊ के लोक भवन में उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसी बेटी को परेशान करने की हिम्मत करने वाला अपनी मौत की सजा खुद तय कर लेता है।
यह बात उन्होंने पुलिस भर्ती में चयनित 912 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र देते हुए कही।
बेटियों की सुरक्षा पर सख्त संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा, "आज कोई बेटी के साथ सड़क पर छेड़छाड़ करने की हिम्मत नहीं कर सकता। अगर कोई ऐसा करता है, तो उसे परिणाम पता हैं। अगर उसे परिणाम नहीं पता, तो मुझे लगता है कि वह खुद अपनी मौत की सजा तय कर रहा है।"
उन्होंने प्रदेश की मौजूदा कानून-व्यवस्था को 2017 से पहले के हालात से जोड़ते हुए तुलना की।
पुराने दंगों और भर्ती में गड़बड़ी का जिक्र
योगी ने कहा कि अब राज्य में दंगे नहीं होते। उन्होंने बताया, "कभी-कभी हम दंगों की मॉक ड्रिल करते हैं ताकि लोग यह न भूलें कि दंगे कैसे होते हैं।"
अन्य रिपोर्टों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने अलीगढ़, मेरठ और मुजफ्फरनगर में हुई सांप्रदायिक हिंसा का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि उस दौर में संगठित अपराध का असर अधिकारियों और न्यायपालिका के सदस्यों तक पर पड़ता था।
उन्होंने पुरानी भर्ती व्यवस्था पर भी निशाना साधा और इसे पक्षपात से भरा बताया। मुख्यमंत्री ने कहा, "कोई परीक्षा देता था, लेकिन नियुक्ति किसी और को मिल जाती थी।" उन्होंने जोड़ा कि पहले युवाओं को लगता था कि सिफारिश या पैसे के लेन-देन के बिना सरकारी नौकरी मिलना मुश्किल है।
योगी ने कहा कि भर्ती सुधारों से प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ी है।
पुलिस बल के आधुनिकीकरण का दावा
मुख्यमंत्री ने बताया कि 2017 में पुलिस के आधे से ज्यादा पद खाली थे। उस समय पुलिस बल की संख्या दो लाख से कम थी, जबकि जरूरत करीब चार लाख की थी।
उन्होंने कहा कि इसके बाद ढांचागत सुविधाओं को मजबूत किया गया, जिसमें 56 जिलों में बड़ी पुलिस बैरकों का निर्माण शामिल है। उन्होंने 34 पीएसी कंपनियों की बहाली, हर जिले में साइबर पुलिस थाने की स्थापना और फोरेंसिक ढांचे के विस्तार का भी उल्लेख किया।
योगी ने बताया कि सात शहरों में पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था लागू की गई है। उन्होंने कहा कि पुलिस अब प्रदेश के 25 करोड़ लोगों के लिए "भरोसे का प्रतीक" बन गई है और राज्य की छवि में यह बदलाव पुलिसिंग और अन्य शासन सुधारों की वजह से आया है।